38 साल बाद भी हक नहीं मिलने से नाराज भोपाल गैस पीड़ित, दिल्ली करेंगे कूच
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38 साल बाद भी हक नहीं मिलने से नाराज भोपाल गैस पीड़ित, दिल्ली करेंगे कूच

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की सदस्य रचना ढींगरा ने बताया कि पांच संगठनों ने अब तक 40 हजार गैस पीड़ितों के हस्ताक्षर लिए हैं.

38 साल बाद भी हक नहीं मिलने से नाराज भोपाल गैस पीड़ित, दिल्ली करेंगे कूच

प्रिया पांडेय/भोपालः भोपाल गैस कांड को करीब 38 साल बीत चुके हैं लेकिन अभी तक इस त्रासदी के पीड़ितों को उनका हक नहीं मिला है. आगामी 3 दिसंबर को भोपाल गैस कांड की 38वीं बरसी है. ऐसे में इस त्रासदी ने पीड़ितों ने विरोधस्वरूप दिल्ली में रैली निकालने का फैसला किया है. पीड़ितों की मांग है कि उन्हें अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए. अपनी इस मांग को लेकर भोपाल गैस कांड पीड़ित आगामी 2 दिसंबर को दिल्ली जाएंगे.

केंद्रीय मंत्री से करेंगे मुलाकात
भोपाल गैस पीड़ित दिल्ली में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात करेंगे. इनकी मांग है कि हर गैस पीड़ित को 6 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए. आरोप है कि भोपाल गैस कांड के 5 लाख 21 हजार पीड़ितों को सही मुआवजा नहीं मिला. यही वजह है कि वह गैस पीड़ितों को कुल 646 करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं. 

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की सदस्य रचना ढींगरा ने बताया कि पांच संगठनों ने अब तक 40 हजार गैस पीड़ितों के हस्ताक्षर लिए हैं. उल्लेखनीय है कि 10 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई भी होनी है. गैस पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.

बता दें कि 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीली मिथाइल आइसोनेट गैस रिसने से 3000 से अधिक लोग मारे गए थे. इस हादसे में लाखों लोग प्रभावित हुए थे. जहरीली गैस के रिसाव के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमारियों का शिकार हो गए थे, जो बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त मुआवजे की लंबे समय से मांग कर रहे हैं.   

 

मुआवजे की मांग का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. दरअसल यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन ने गैस पीड़ितों को 470 मिलियन डॉलर का मुआवजा दिया था. साल 2010 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुधारात्मक याचिका दाखिल की थी. जिस पर बीते दिनों सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया था और पूछा था कि क्या सरकार यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन की उत्तराधिकारी कंपनियों से मुआवजे की अतिरिक्त धनराशि की मांग करने वाली अपनी उपचारात्मक याचिका पर आगे बढ़ना चाहती है?

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