Bhopal gas tragedy: भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को सम्मान देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में एक भव्य स्मारक बनाने की योजना बना रही है. इस स्मारक को हिरोशिमा और नागासाकी की तर्ज पर तैयार किया जाएगा. इस स्मारक को बनाने में करीब 1200 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आने का अनुमान लगाया गया है.
3 December 2025 Holiday: मध्य प्रदेश में 3 दिसंबर को भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर सरकारी अवकाश रहेगा और इस मौके पर भोपाल शहर में स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी रहेगी. हालांकि, इस दिन बैंक खुले रहेंगे, क्योंकि बैंकों की छुट्टी आरबीआई तय करता है.
Bhopal Gas Tragedy Victims: 41 साल पहले 2 दिसंबर की जहरीली रात को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ. कीटनाशक बनाने वाली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव ने हजारों लोगों को जान ले ली और लाखों लोगों को प्रभावित किया. आज 41 सालों बाद भी भोपाल की गलियों में गैस लीक वो घाव हैं, जो शायद ही कभी भर सकें. आज भी मिथाइल आइसोसाइनेट का जहर पीड़ितों के शरीर में बैठा है. इसका खुलासा भारतीय मेडिकल अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर (ICMR) की नई रिपोर्ट में हुआ है.
Bhopal Gas Tragedy Holiday: ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੇ ਭੋਪਾਲ ਵਿੱਚ ਭੋਪਾਲ ਗੈਸ ਤ੍ਰਾਸਦੀ ਦੀ ਬਰਸੀ ਦੇ ਮੌਕੇ ‘ਤੇ 3 ਦਸੰਬਰ ਨੂੰ ਜਨਤਕ ਛੁੱਟੀ ਦਾ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਦੱਸ ਦੇਈਏ ਕਿ ਭੋਪਾਲ ਗੈਸ ਤ੍ਰਾਸਦੀ 1984 ਵਿੱਚ ਵਾਪਰੀ ਸੀ ਅਤੇ ਇਸ ਦਿਨ ਨੂੰ ਯਾਦਗਾਰੀ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹੋਏ ਹਰ ਸਾਲ ਸਥਾਨਕ ਛੁੱਟੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
Union Carbide Gas Leak: 2-3 दिसंबर की दरम्यानी रात जब लोग नींद के आगोश में थे, तब कई लोगों को ये नहीं पता था कि वे सुबह का सूरज नहीं देख पाएंगे. जो गिर गया, वह उठ नहीं पाया. उस रात हर व्यक्ति की जुबान पर शायद एक ही बात थी कि भगवान उन्हें मौत दे दे.
Bhopal Gas Tragedy: 2-3 दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात जब लोग नींद के आगोश में थे, तब अचानक भोपाल में कीटनाशक दवा बनाने वाली यूनियन कार्बाइड लिमिटेड फैक्ट्री से खतरनाक मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव शुरू हो गया. तब इस गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली.
National Pollution Control Day: भारत हर साल 2 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाता है. यह दिवस हमें चेतावनी देता है कि प्रदूषण सिर्फ हवा-पानी का नहीं, बल्कि सभ्यता का भी दुश्मन है. आज ग्लेशियर पिघल रहे हैं, नदियां सूख रही हैं, दिल्ली का प्रदूषण सांस का दुश्मन बन चुका है. इस स्थिति में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है.
MP News-भोपाल की यूनियम कार्बाइड फैक्ट्री की 899 टन जहरीली राख को लेकर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है. हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि राख का निष्पादन पीथमपुर में न किया जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर 2025 को की जाएगी.
Bhopal News: सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस पीड़ितों के मामले में हुई सुनवाई पर सख्ती दिखाई है, क्योंकि 13 साल पहले दिए गए निर्देश अभी तक पूरे नहीं हुए हैं, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भी जारी किया है.
Bhopal Gas Tragedy: करीब 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले रासायनिक कचरे को जलाया गया. अब उससे निकली राख के निपटारे पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से उनकी रणनीति पूछी है. भोपाल की ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन संस्था ने याचिका दायर कर इस राख को अमेरिका भेजना की मांग की है. हवाला तमिलनाडु में यूनीलीवर कंपनी के कचरे वाले मामले का दिया है.
Waste of Union Carbide Factory Burnt to Ashes: भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे को पूरी तरह जलाकर खाक कर दिया गया है. अब इसके राख और अवशेष को दफनाने की प्रकिया जारी है. बताते चले कि लंबे विवादों के बीच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में 337 टन जहरीले कचरे को पीथमुप में जलाया गया है.
Bhopal Gas Tragedy: यूका के जहरीले कचरे को जलाने से रोकने वाले दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनावाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि इस मामले पर अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद करेंगे.
Bhopal Union Carbide Toxic Waste: मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे मामले में हलफनामा पेश किया और कंटेनर्स में भरे कचरे को अनलोड करने परमिशन मांगी
Union Carbide Waste News: आखिरकर राजधानी भोपाल को चार दशक बाद जहरीले कचरे मे मुक्ति मिल गई है. बुधवार देर रात जहरीले कचरे को पीथमपुर के लिए भेज दिया गया. भारी सुरक्षा के बीच कचरे को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पीथमपुर लाया गया. यहां विशेष सुरक्षा के साथ कचरे को नष्ट किया जाएगा.
40 years after Bhopal gas tragedy: साल 1984, दो-तीन दिसंबर की आधी रात भोपाल के लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी. भापोल की हवा में मिथाइल आइसोसाइनेट नाम का जहर बहा था. यूनियन कार्बाइड के कारखाने के टैंक नंबर 610 से लीक हुई इस गैस ने पूरे शहर को श्मशान में बदल दिया. इस भोपाल गैस त्रासदी को 2024 में चालीस साल हो गए. सरकार ने रेडियोएक्टिव वेस्ट को अब खत्म करने का प्लान बना लिया है. तो आइए जानते हैं कि आखिर कितना खतरनाक है भोपाल का 377 मीट्रिक टन रेडियोएक्टिव वेस्ट और 40 साल बाद कैसे सरकार करेगी निपटारा.
Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फेक्ट्री से जहरीला कचरा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है. कचरे को जंबू बैग में पैक किया जा रहा है. इसे हैडार्डस वेस्ट कंटेनर में भरकर पीथमपुर ले जाया जाएगा.
Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस त्रासदी की बरसी पर सीएम मोहन यादव ने बताया कि 40 साल पहले उस रात वह भी भोपाल में मौजूद थे, अगले दिन सुबह वह मौके पर भी पहुंचे थे.
Bhopal Gas Tragedy: भोपाल आपदा के लगभग चार दशक बाद भी न्याय, पुनर्वास और पर्यावरण सफाई के वादे बड़े पैमाने पर अधूरे हैं, जिससे बचे लोगों को दुनिया की सबसे खराब औद्योगिक त्रासदियों में से एक के दीर्घकालिक परिणामों को सहना पड़ रहा है.
दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदा, भोपाल गैस त्रासदी के बचे लोगों के साथ काम करने वाले एक संगठन ने दावा किया है कि गैस प्रभावित लोगों में बीमारियों की दर अप्रभावित लोगों के मुकाबले कहीं अधिक है.
mp news-2 दिसंबर 1984 की रात मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक हादसा हुआ था, जिसके निशान आज भी देखने को मिलते हैं. भोपाल गैस त्रासदी को 40 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इतने सालों बाद भी लोगों के जख्म हरे हैं. जानिए इस त्रासदी की पूरी कहानी
National Pollution Control Day: राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस हर साल 2 दिसंबर को मनाया जाता है ताकि 2 दिसंबर 1984 को भोपाल गैस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी जा सके. यह भोपाल गैस त्रासदी की याद दिलाता है और प्रदूषण के बारे में जागरूकता बढ़ाता है.
Womens Day: रशीदा बी और चंपा देवी शुक्ला मिलकर भोपाल गैस कांड के प्रभाव के चलते माजूर हुए बच्चों की जिंदगी में रोशनी बिखरने की कोशिश कर रही हैं. अब तक वह अपनी मुहिम के जरिए 100 बच्चों की जिंदगी बदल चुकी हैं