हाथरस की मिस्ट्री वुमन की पूरी कहानी; कभी 'भाभी' कभी 'बहन', हाथरस जाने की वजह भी नहीं बता पाई

योगी सरकार के खिलाफ जहर उगलते हुए लिखा था ‘’अपनी जाति का अहंकार, अपनी जाति में ही सीमित रखो, वरना तुम्हारे गर्म खून पर हमारा सदियों का खौलता खून भारी पड़ जाएगा.’’

Oct 12, 2020, 17:31 PM IST

प्रतीति पाण्डेय/जबलपुर: जबलपुर की रहने वाली हाथरस की मिस्ट्री वुमन जब मामले में फंसने लगी तो अपने बयान से पल-पल पलट रही है. जबलपुर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर राजकुमारी बंसल की चर्चा जब नक्सल भाभी के तौर पर हुई, तो उसने जी मीडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि उन्होंने खुद को भाभी कहा ही नहीं था. (बार-बार बदलती रहीं बयान)

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भाभी नहीं मैंने तो बताया था 'बहन'

राजकुमारी बंसल ने कहा वे हाथरस के पीड़ित परिवार के साथ जरूर थीं, लेकिन उन्होंने किसी को भी अपना रिश्ता भाभी के तौर पर नहीं बताया. उन्होंने पीड़िता की बहन के तौर पर जरूर बात की थी.

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योगी सरकार के लिए लिखा-हमारा खौलता खून भारी पड़ेगा

डॉक्टर राजकुमारी बंसल ने योगी सरकार के खिलाफ जहर उगलते हुए लिखा था ‘’अपनी जाति का अहंकार, अपनी जाति में ही सीमित रखो, वरना तुम्हारे गर्म खून पर हमारा सदियों का खौलता खून भारी पड़ जाएगा.’’

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पीड़ित परिवार के साथ हमेशा खड़ी रहूंगी

नक्सल भाभी के तौर पर चर्चित हुईं राजकुमारी बंसल कहती हैं कि 'मुझे घरवालों ने बेटी की तरह माना'. राजकुमारी अब भी कहती हैं कि पीड़ित परिवार जब भी मुझे बुलाएगा मैं उनकी मदद के लिए जाऊंगी. (दो दिन पहले सोशल मीडिया पर उगला था जहर) 

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नकली भाभी ने दिए मीडिया से बात करने के बचकाने कारण

डॉक्टर राजकुमारी बंसल ने खुद पर लगे आरोपों के बचाव में बोलीं कि उन्होंने तब मीडिया के सामने पीड़ित परिवार का पक्ष रखा, जब परिजनों ने उन्हें इस बात की अनुमति दी.  ('पीड़ित परिवार जब भी बुलाएगा, मैं जाऊंगी')

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हाथरस कांड में मिस्ट्री वुमन बन चर्चित हुईं राजकुमारी

पीड़ित परिवार के घर में 4 दिनों तक रही राजकुमारी का नक्सली कनेक्शन भी बताया गया. उन्होंने कहा वहां रहते हुए किसी से उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर चर्चा नहीं की, न ही किसी राजनैतिक व्यक्ति से मिलीं. (इसलिए मीडिया से कर रही थी बात)

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4-7 अक्टूबर तक हाथरस में रहीं राजकुमारी बंसल

डॉक्टर बंसल के मुताबिक वो बाकायदा छुट्टी लेकर 4 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक पीड़ित परिवार के घर में रही थीं. जहां उन्होंने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद भी दी. वे अपने समाज के पीड़ित परिवार को संबल देने गई थीं. (न नेता से मिली, न नक्सलियों को जानती, मीडिया को अलग धमकाया)

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फोरेंसिक रिपोर्ट देखना चाहती थी लेकिन देख नहीं पाई

पेशे से डॉक्टर और जबलपुर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंड प्रोफेसर राजकुमारी बंसल का कहना है कि वे केस से जुड़ी मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट्स देखना चाहती थीं, लेकिन वे नहीं देख पाईं. (अपने समाज के पीड़ित परिवार को देने गई थी मदद)

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एमपी के मंत्री ने बताया था नक्सली कनेक्शन

शिवराज सरकार में मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा था कि पीड़ित परिवार के साथ रहने वाली महिला का नक्सली कनेशन है. ये देश को तोड़ने का षड्यंत्र चल रहा है और ये उस षड्यंत्र का हिस्सा लगता है. (''मैं तो गई थी मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स देखने'')

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बिना शासन आदेश नहीं लेंगे एक्शन-डीन

सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डीन पीके कसार ने कहा कि अगर शासन कोई आदेश दे या कोई शिकायत मिले तभी जारी डॉ. बंसल के खिलाफ कार्रवाई करेंगे. (मंत्री ने कहा महिला का नक्सली कनेक्शन)