कोटा: यहां के हर घर के आंगन में है मौत का खंभा, प्रशासन को हादसे का इंतजार

40 साल पहले 132 केवी की इस लाइन को यहां डाला गया था. इसके बाद धीरे-धीरे लोग यहां अपने आशियाने बनाते चले गए. इतना ही नहीं, लोगों ने बिजली के पोल के चारों तरफ भी अपने घर बना लिए.

कोटा: यहां के हर घर के आंगन में है मौत का खंभा, प्रशासन को हादसे का इंतजार
इलाके में रहने वाले लोगों का कहना है कि लगातार किसी हादसे की आशंका बनी रहती है.

कोटा: जिले में लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र के प्रेम नगर इलाके में लोग 132 केवी लाइन के नीचे रहने के लिए मजबूर हैं. हाईटेंशन लाइन के नीचे करीब 5000 घर बने हुए हैं. हाइटेंशन लाइन के खंभे लोगों के घरों में खड़े हैं. 

इन हालातों के बीच लोग डर के साए में रहने को मजबूर हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. क्षेत्रवासी अब इन हालातों से खुद को छुटकारा दिखाने के लिए लगातार प्रशासन से मांग कर रहे हैं.

दरअसल, 40 साल पहले 132 केवी की इस लाइन को यहां डाला गया था. इसके बाद धीरे-धीरे लोग यहां अपने आशियाने बनाते चले गए. इतना ही नहीं, लोगों ने बिजली के पोल के चारों तरफ भी अपने घर बना लिए. इससे उनके घरों में ही ये पोल आ गए. यहां तक की जब इनके पट्टे जारी करने की बात आई तो प्रशासिक अधिकारियों ने इसके पट्टे भी जारी कर दिए.

जारी कर दिए गए मकानों के पट्टे
लोगों में इसे लेकर भय भी है तो आक्रोश भी है लेकिन विकास की इबारत लिखने का दावा करने वाले नेताओं और अफसरों ने आज तक इसके समाधान के लिए कोई जहमत नहीं उठाई. लापरवाही और उदासीनता की पराकाष्ठा ये है कि वोट के लालचियों और जिम्मेदार विभागों ने इन 132 केवी के खम्भों को घेर कर बनाए गए इन मकानों के पट्टे भी जारी कर दिए.

बनी रहता है हादसे की आशंका
इलाके में रहने वाले लोगों का कहना है कि लगातार किसी हादसे की आशंका बनी रहती है. इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं. लगातार जान जाने का  डर बना रहता है. महिलाओं का कहना है की बच्चों के खेलने के दौरान भी लगातार डर लगता है. एक बार तो यहां बिजली का तार भी गिर चुका है. हालांकि ये गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ.

कई बार दर्ज करवाई जा चुकी है शिकायत
लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि हमने मामले में शिकायत दर्ज नहीं करवाई कई बार अफसरों और नेताओं के चक्कर काटे लेकिन न 132 केवी की लाइन हटी और न ही इन लोगों की सुरक्षा के लिए कोई सुझाव आया. लोगों का कहना है कि शायद सरकार किसी हादसे का इंतजार कर रही है.

अब यूआईटी ही कर सकती है विस्थापित 
राजस्थान राज्य प्रसारण निगम के अधिकारियों से जब इस बाबत पूछा गया तो पता चला कि कई बार लोगों को पोल के आस पास से हटाने के लिए चेतावनी भी दी गई है लेकिन यूआईटी के द्वारा इन मकानों को पट्टे दे देने से इन्हें यहां से हटाना प्रसारण निगम के बूते में नहीं है. अब यूआईटी ही इन्हें विस्थापित कर सकती है.

Edited by : Sumit Singh, News Desk