close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: 6 कारण जिनके चलते राज्य में बीजेपी का राज अस्त होता दिख रहा है!

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस ने बाजी मारी. कांग्रेस ने स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर कहीं बेहतर टिकट दिए.

राजस्थान: 6 कारण जिनके चलते राज्य में बीजेपी का राज अस्त होता दिख रहा है!
माना जा रहा है कि राजपूत समुदाय की नाराजगी वसुंधरा सरकार को भारी पड़ी है.

जयपुर : राजस्थान की राजनीति पांच साल में कितना बदल गई, ये विधानसभा चुनाव के रुझानों से समझा जा सकता है. राजस्थान में बीजेपी ने 2013 में 200 में 163 सीट जीती थीं. इस बार कांग्रेस ने लगातार बढ़त बना रखी है. यानी बीजेपी को राज्य में भारी नुकसान हो रहा है. राजस्थान में बीते दिनों हुए दो लोकसभा सीट और एक विधानसभा सीट के उप चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. इससे हवा का रुख बदलने का संकेत मिल गया था. आइए जानें कि वो कौन से कारण हैं, जो बीजेपी की हार का कारण बनें.

1. राजपूत फैक्टर
माना जा रहा है कि इस बार राजपूत वसुंधरा सरकार ने नाराज थे. इसका नुकसान चुवान में बीजेपी को उठाना पड़ा. चुनाव के दौरान राजपूत समाज के कई नेताओं ने बीजेपी के विरोध का ऐलान किया. गैंगस्टर आनंदपाल सिंह रावणा राजपूत समाज से था और उसके गैंग के 70 प्रतिशत लोग राजपूत है. मुठभेड़ में उसकी हत्या के बाद राजपूत समाज की नाराजगी बढ़ गई. राजपूत बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक है. उसके नाराज होने से बीजेपी परसेप्शन की लड़ाई चुनाव से पहले ही हार गई.

2. सचिन पायलट और अशोक गहलोत की जोड़ी
राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कांग्रेस में नया जोश भरने का काम किया. उन्होंने युवाओं को अपने साथ जोड़ा, जबकि दूसरी ओर अनुभवी अशोक गहलोत ने राज्य में जातीय समीकरणों को साधा. उन्होंने वरिष्ठ नेताओं में भरोसा जगाया कि कांग्रेस में सभी के लिए जगह होगी. राजपूतों की बीजेपी से नाराजगी और माली तथा गुर्जर वोट कांग्रेस के पक्ष में आने से राज्य के चुनावी समीकरण बदल गए.

3 वसुंधरा राजे की छवि
वसुंधरा राजे की छवि भी बीजेपी की हार की एक वजह रही. राज्य में उनकी महारानी वाली छवि है. आम धारणा है कि वो अपने खास लोगों की कोटरी में रहना पसंद करती हैं और आम जनता के साथ उनका जुड़ाव उतना नहीं है. आम बीजेपी कार्यकर्ताओं और संगठन के लोगों के साथ भी उनका भावनात्मक जुड़ाव कम है.

4. बगावत
राजस्थान में बीजेपी पिछले कई चुनावों से बगावत और भीतरघात का सामना कर रही थी. इस बार घनश्याम तिवाड़ी और मानवेंद्र सिंह के रूप में दो बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ दी. घनश्याम तिवारी ने अपनी अलग पार्टी बनाई, जबकि मानवेंद्र में शामिल हो गए. टिकट कटने से नाराज जिला स्तर के कई नेताओं की बगावत ने हालात को बीजेपी के लिए और बिगाड़ दिया. राज्य में पार्टी के नेताओं की बगावत बीजेपी की हार का एक प्रमुख कारण है.

5. पद्मावत का विरोध
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत का राजपूत समाज ने पूरे देश में विरोध किया. हालांकि ये विरोध राजस्थान में सबसे तेज था. राजपूत समाज की वसुंधरा राजे से शिकायत थी कि इस फिल्म के निर्माण और प्रदर्शन को रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए. चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया और बीजेपी पर राजपूतों की उपेक्षा का आरोप लगाया.

6. अयोग्य प्रत्याशी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस ने बाजी मारी. कांग्रेस ने स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर कहीं बेहतर टिकट दिए. जबकि बीजेपी के प्रत्याशियों का जनता के साथ उतना अधिक जुड़ाव नहीं था.