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अजमेर: मूलभूत सुविधाओं को तरसता गोपालपुरा गांव, विकास के नाम पर सिर्फ एक हैंडपंप

गांव के लोगों को मोबाइल चार्ज करने दूसरे गांव में जाना पड़ता है. वहीं गोपालपुरा गांव में एक भी ब्लॉक अथवा सीसी रोड नहीं बना है.

अजमेर: मूलभूत सुविधाओं को तरसता गोपालपुरा गांव, विकास के नाम पर सिर्फ एक हैंडपंप
पक्की सड़क गांव से 4 किलोमीटर दूर है.

जगपुरा:आसींद तहसील के जगपुरा पंचायत के गोपालपुरा गांव जिसमें भील समाज के 50 घरों की बस्ती में लगभग 300 व्यक्तियों की जनसंख्या निवास करती है. आजादी के 70 साल गुजर जाने के बाद भी इस गांव में बिजली पानी चिकित्सा सड़क परिवहन आदि सुविधाएं गांव के लोगों को नहीं मिल पाई है. आवास के अभाव में गांव में के लोग पोस मकान में रहने को मजबूर हैं.

हालांकि लोगों ने समस्याओं हेतु प्रशासन को कई बार अवगत कराया परंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया. इस गांव में चुनाव के समय ही नेता व प्रशासनिक अधिकारी गाड़ी लेकर आते हैं. चुनाव खत्म होते ही गांव को भूल जाते हैं. इस गांव के लोग रोजगार के अभाव में महाराष्ट्र गुजरात में महिलाओं बच्चों सहित मजदूरी करते हैं. बारिश के दौरान लोग गांव में वापस आते हैं. जो बरसात की फसल की कटाई कर परिवार सहित वापस मजदूरी पर बाहर चले जाते हैं. 

वहीं, गोपालपुरा में विकास पर नजर डाले तो एकमात्र हैंडपंप नजर आता है. गांव के लोग स्नान करने से लेकर खुद के पीने का पानी और पशुओं को पिलाने के लिए हैंडपंप के पानी का सहारा लेते हैं. वहीं, कही बार तो बच्चे हैंड पंप पर ही स्नान करते नजर आते हैं. चंबल परियोजना इस गांव से कोसों दूर नजर आती है. बिजली नहीं होने पर ग्रामीण चिमनी का सहारा लेकर रात का गुजारा करते हैं. गांव में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है हर घर में केरोसिन की चिमनी जलाई जाती है. 

गांव के लोगों को मोबाइल चार्ज करने दूसरे गांव में जाना पड़ता है. वहीं गोपालपुरा गांव में विकास के नाम पर एक भी ब्लॉक अथवा सीसी रोड नहीं बना है. गांव की हर रास्ते उबड़ खाबड़ वह कीचड़ भरा रास्ता होने से आए दिन ग्रामीणों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है. सड़क गांव से 4 किलोमीटर दूर है. आवागमन सुविधा नहीं होने से गोपालपुरा गांव के ग्रामीण 4 किलोमीटर पैदल या साइकिल का सहारा लेकर घर जाते हैं. 50 घरों की बस्ती में एक भी मोटरसाइकिल कार नहीं है बीमार होने पर दूसरे गांव से वाहन मंगवा कर उन्हें चिकित्सालय ले जाना पड़ता है. 

हाल ऐसा है कि कभी बस या बड़े वाहन गांव से निकलते हैं तो गांव के बच्चे वाहनों को देखने के लिए उमड़ पड़ते हैं. शिक्षा का अभाव ऐसा है कि गोपालपुरा भील समाज के पूरे गांव में 60 -70 बच्चे हैं, जिसमें 5 बच्चे जो वर्ष में 4 माह के लिए दोला खेड़ा स्कूल जाते हैं और बाद में परिवार के साथ महाराष्ट्र गुजरात मजदूरी पर चले जाते हैं. गांव में अधिकतर घर चयनित बीपीएल परिवार के हैं, पर आज तक इनके कोई आवास योजना के मकान नहीं बना है. गांव के ग्रामीण सिर्फ केलु पोस व चंदर डाले हुए मकान में जीवन यापन करते हैं. आजीविका का साधन मात्र कृषि व भेड़ बकरियां बना हुआ है.