ध्यान दें, रिश्तेदारों और जानकारों की है आपकी बेटी पर बुरी नज़र!

राजस्थान में मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म और हत्या की बढ़ती वारदातों के मद्देनज़र राजस्थान पुलिस ने एक सर्वे कराया, जिसके आकंड़े रिश्तों की सोच में डूबे हुए हैं.  

ध्यान दें, रिश्तेदारों और जानकारों की है आपकी बेटी पर बुरी नज़र!
प्रतीकात्मक तस्वीर

शरद पुरोहित/जयपुर: राजस्थान में मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म और हत्या की बढ़ती वारदातों के मद्देनज़र राजस्थान पुलिस ने एक सर्वे कराया, जिसके आकंड़े रिश्तों की सोच में डूबे हुए हैं. इस रिपोर्ट को पढ़ना आपके लिए बेहद जरूरी है. क्योंकि आपके मासूम बच्चों और बच्चियों पर आपके रिश्तेदार, आपके पड़ोसी या दोस्त की गंदी नज़र हो सकती है. 

डिजिटल इंडिया की शाइनिंग में जब मुल्क जगमगा रहा है. चारों तरफ उजालों का एलान हो रहा है. हर तरफ विकास की बहार का गुणगान हो रहा है. बेटियां अंधेरों से अज़ादी मांग रही हैं. जुल्म से आज़ादी मांग रही हैं, हैवानों से आज़ादी मांग रही हैं. आज़ादी मांग रही है अपने ऊपर होने वाले अत्याचार से, आज़ादी मांग रही हैं बेटियों के लहू से रंगे अखबार से, क्योंकि बेटियों को डर है कहीं कोई शैतान उनकी अस्मत ना रौंद दे. राजस्थान के दिल पर लिखे बेटियों के दर्द के आंकड़े पढ़कर दिल सहम जाता है. 

सरकारें बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे का एलान करती है, लेकिन इस नारे के साए में हैवान बेटियों के अस्मत कौ रौंद रहे हैं. बेटियों पर उनके ही रिश्तेदार गंदी निगाहें रखें हैं, ऐसे में बेटियां विश्वास करे तो किस पर करे. 

राजस्थान में नाबालिग बच्चों के साथ हो रही इन घटनाओं के बाद सूबे की पुलिस ने पूरे प्रदेश में एक सर्वे कराया कि आखिर नाबालिग बच्चियों के साथ गलत काम करने वाले कौन लोग हैं. प्रदेशभर में नाबालिग बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वाली घटनाओं को पहले क्लब किया गया, फिर आरोपियों और पीड़िता के रिश्तों के बारे में जांच की गई तो पता चला की 89 प्रतिशत मामलों में परिवार के सदस्य, परिवार के सदस्यों के दोस्त या कॉलोनी वाले ही आरोपी थे.

18 साल से कम उम्र की 89 प्रतिशत बच्चियां अपनों की हवस, क्रूरता, दरिंदगी और हैवानियत के अलावा गंदी सोच का शिकार हुई हैं. प्रदेश में 11 प्रतिशत बच्चियों के साथ हैवानों ने दरिंदी की दास्तां दिखी है. ऐसे में अगर ये सोचना जरूरी हो जाता है कि हमें अपने से सतर्क रहना होगा. अपने बच्चों को अपनों की ही गंदी नज़र से बचाना होगा. बच्चे-बच्चियों को गुड टच और बैड टच के बारे में बताना होगा, ताकि इस तरह की मामलों में कमी आ सके.

राजस्थान पुलिस की सिविल राइट्स विंग ने बच्चियों के साथ हुए अपराध के बारे में एक रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट के मुताबिक 0-6 साल की बच्चियों के साथ 3 प्रतिशत, 6-12 साल की बच्चियों के साथ 19 प्रतिशत, 13-16 साल की किशोरियों के साथ 45 प्रतिशत और 16 से 18 साल की बच्चियों के साथ 32 प्रतिशत लोगों ने ज्यादती की है. इसके अलावा प्रदेश में 37 प्रतिशत बच्चियों के साथ मित्र और पड़ोसी ने, 12 प्रतिशत बच्चियों के साथ रिश्तेदारों ने, 49 प्रतिशत बच्चियों के साथ दूसरे परिचित व्यक्ति ने और 11 प्रतिशत बच्चियों के साथ अनजान लोगों ने अत्याचार किया है. 

बात अगर सूबे में पॉक्सो एक्स के लंबित मामलों की करें, तो आंकड़े खुद रोते हुए नज़र आते हैं. फैसले की इंतज़ार में बैठी आंखे पथरा गई हैं.

पोक्सो एक्ट के लंबित मामले
सूबे में 1 अप्रैल से 30 जून 2019 तक 947 नए केस दर्ज.
पॉक्सो कोर्ट में 148 फैसले आए.
सूबे की 56 पॉक्सो कोर्ट में 3 महीने में 1243 केसों में फैसले हुए.
प्रदेश की पॉक्सो कोर्ट में 6317 केस लंबित.
3 महीने में 947 नए मुकदमे भी दर्ज.
जयपुर की 6 और जिले की 1 पॉक्सो कोर्ट में 148 केस में फैसला आया.
जयपुर महानगर और जिले की पॉक्सो कोर्ट में 30 जून तक 618 केस लंबित.
अजमेर की 2 पॉक्सो कोर्ट ने 54 केसों में फैसला सुनाया.
30 जून तक अजमेर पॉक्सो कोर्ट में 176 केस लंबित.
अलवर की 4 पॉक्सो कोर्ट ने 63 केसों में फैसला दिया, 414 केस लंबित.
कोटा की 5 पॉक्सो कोर्ट ने 98 केसों में फैसला दिया, 30 जून तक 472 केस लंबित.
जोधपुर की मेट्रो और जिले की पॉक्सो कोर्ट ने 38 केस में फैसला सुनाया, 291 केस लंबित.
उदयपुर की 1 और 2 पॉक्सो कोर्ट में 128 केस में फैसला आया, 256 केस लंबित.
जैसलमेर पॉक्सो कोर्ट में सबसे कम 14 केस लंबित.
पॉक्सो कोर्ट में 30 जून तक 14 केस लंबित.
पॉक्सो कोर्ट ने 3 महीनों में 6 मुकदमों में फैसला सुनाया.
उदयपुर और टोंक में सबसे ज्यादा केस.
3 महीने में उदयपुर की पॉक्सो कोर्ट में 82 नए मुकदमे दर्ज.
टोंक में 74 नए मुकदमे दर्ज किए गए.

पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आंकड़े ही प्रदेशवासियों को चौंकाने के लिए काफी है. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि इनमें अधिकतर मामलों में परिचित ही बच्चियों के साथ छेड़छाड़ या फिर दुष्कर्म के लिए जिम्मेदार है.