ग्रह-नक्षत्रों नहीं, इस रक्षाबंधन चलेगी बहनों की मर्जी, सालों बाद आया है शुभ संयोग

इस बार अधिक चिंता है कि भाई या बहन को कोरोना वायरस से किस तरह महफूज रखा जाए.

ग्रह-नक्षत्रों नहीं, इस रक्षाबंधन चलेगी बहनों की मर्जी, सालों बाद आया है शुभ संयोग
इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा.

जयपुर: वैसे तो भाइयों की कलाई पर राखी बांधने का कोई समय अशुभ नहीं होता लेकिन इस साल मनाए जाने वाले रक्षाबंधन पर्व में कुछ खास है. आपको बता दें कि इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा.

इसका मतलब एकदम साफ है कि इस साल रक्षाबंधन के दौरान ग्रह-नक्षत्रों का नहीं, बल्कि बहनों की मर्जी चलेगी लेकिन इस बार अधिक चिंता है कि भाई या बहन को कोरोना वायरस से किस तरह महफूज रखा जाए.

कुमकुम, हल्दी, चावल, दीपक, मिठाई की थाली सजाने के लिए बेसब्री से किया जा रहा इंतजार समाप्त हो गया है. घरों में बच्चों के साथ-साथ बड़े-बुजुर्गों में भी नटखटपन, शरारत और चुलबुलापन दिखाई देने लगा है. मौका है रक्षाबंधन पर्व सेलिब्रेशन का. बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए रक्षाबंधन पर्व का इंतजार करती हैं. भाई के माथे पर बहने तिलक लगा कर दीर्घायु होने की कामना करती हैं और भाई अपनी बहन की सुरक्षा और खुशी के लिए संकल्प लेते हैं. श्रावण मास के अंतिम सोमवार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है. 

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ज्योतिषविदों के मुताबिक, शास्त्रानुसार रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा आने पर इसे टाला जाता है और इस समय में राखी नहीं बांधी जाती लेकिन इस बार भद्रा सुबह 9.29 तक रहेगी. अत: इसके बाद रक्षाबंधन का पर्व संपूर्ण दिन रहेगा. बहनें आयुष्मान योग में भाइयों की कलाई पर राखियां बांध सकेंगी. इस बार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत फैंसी राखियों के बजाय स्थानीय राखियों का बाजार एकदम खास हैं. उधर छोटीकाशी के मंदिरों में रक्षाबंधन पर्व श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा. आराध्य देव गोविंददेवजी मंदिर में ठाकुरजी और राधाजी की कलाई पर सुनहरी कलाबूत की राखी बांधी जाएगी लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिर बंद होने के कारण भक्त ठाकुरजी और राधाजी को राखी अर्पित नहीं कर सकेंगे. रक्षाबंधन पर ठाकुजी सुनहरी पारचे की पोशाक धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे. वहीं शहर के अक्षयपात्र मंदिर, अक्षरधाम मंदिर, इस्कॉन मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भगवान को राखी अर्पण की जाएगी.

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, शुभ का चौघड़िया सुबह 9.29 से 10.54, दोपहर बाद 2.12 बजे से शाम 7.10 बजे तक चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया रहेंगे. इसके अलावा दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12.06 से 12.59 बजे तक रहेगा. अत:राखी संपूर्ण दिन बांधी जा सकेगी. ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि श्रावण के आखिरी सोमवार होने के साथ ही रवियोग, उत्तराषाढ़ नक्षत्र, श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान, सवार्थसिद्धि योग के बीच पर्व मनाया जाएगा. इस बार कर्क राशि में चल रहे सूर्य, बुध का चंद्रमा-शनि से, मिथुन राशि में चल रहे शुक्र, राहु का गुरू-केतु से समसप्तक योग रहेगा, जो केंद्र योग बनाएगा. यह संयोग पर्व की श्रेष्ठता में चार चांद लगाएगा. 

आठ ग्रहों का यह संयोग कई साल बाद बनेगा. ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, श्रवण नक्षत्र और उतरा आषाढ़ नक्षत्र का विशेष शुभ संयोग सभी वर्गों के लिए सुख समृद्धि कारक और कृषि क्षेत्र में लाभकारी रहेगा. श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग एक साथ होना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. यह दिन नामकरण, व्यापार व वाहन खरीदने के लिए शुभ है.

बहरहाल, रक्षाबंधन यानी राखी का पर्व भाई-बहन के प्यार का त्योहार है. एक मामूली सा धागा जब भाई की कलाई पर बंधता है, तो भाई अपनी बहन की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने को तैयार हो जाता है. श्रावण मास की पूर्णिमा को इसी दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र के रूप में रंग-बिरंगी राखियां बांधती हैं.