जयपुर: नगर निगम चुनाव में बागियों ने बढ़ाई BJP-कांग्रेस की मुश्किलें! पार्टी बोली...

कार्रवाई के दावों के बीच हैरानी की बात यह है कि अभी तक कांग्रेस और बीजेपी दोनों के पास ही चुनाव मैदान में डटे बागियों का सटीक आंकड़ा नहीं है. 

जयपुर: नगर निगम चुनाव में बागियों ने बढ़ाई BJP-कांग्रेस की मुश्किलें! पार्टी बोली...
नगर निगम चुनाव में बागियों ने बढ़ाई BJP-कांग्रेस की मुश्किलें! (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जयपुर: नगर निगम चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के जीत के अपने-अपने दावे हैं. लेकिन इन दावों के पेड़ में मट्ठा डालने का काम पार्टी के ही बागी कर रहे हैं. बीजेपी भी बागियों को लेकर चिंतित है तो कांग्रेस भी परेशान दिख रही है. यही कारण है कि दोनों पार्टियों ने साफ कर दिया है कि अगर पार्टी के किसी भी बागी ने चुनाव लड़ा तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है. लेकिन कार्रवाई के दावों के बीच हैरानी की बात यह है कि अभी तक कांग्रेस और बीजेपी दोनों के पास ही चुनाव मैदान में डटे बागियों का सटीक आंकड़ा नहीं है. 

दरअसल, नगर निगम के चुनाव में नाम वापसी की मियाद बीत गई है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही अपनी-अपनी पार्टी के बागियों को बैठाने की भरसक कोशिश की. कांग्रेस में टिकट विधायकों ने बांटे थे. लिहाजा बागियों को बैठाने का जिम्मा भी खुद विधायकों के पास ही था. लेकिन सवाल यह उठा कि जिस नेता ने टिकट काटा, पार्टी का बागी भला उसके समझाने से मानता कैसे? लेकिन फिर भी विधायकों ने जतन किए और कांग्रेस पार्टी के अधिकांश मूल कार्यकर्ताओं को नाम वापस कराने में कामयाब भी रहे.

हालांकि, सच्चाई यह भी है कि खुद पार्टी को ही नहीं पता कि कांग्रेस के कितने बागी चुनाव मैदान में हैं.  जयपुर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और सरकार में परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास कहते हैं कि अधिकांश बागियों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में नाम वापस ले लिया है और अगर अभी भी कोई चुनाव मैदान में डटा रहा चुनाव लड़ा तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होना तय है.

इधर, बीजेपी की हालत भी कांग्रेस से बेहतर तो किसी सूरत में नहीं कही जा सकती. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया कहते हैं कि पार्टी ने 95 फीसदी से ज्यादा बागियों के नाम वापस करा दिए हैं और अभी भी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के समर्थन में बागियों के बैठने का सिलसिला जारी है. पूनिया ने कहा कि इसके बाद भी अगर कोई पार्टी कार्यकर्ता चुनाव मैदान में बैठा रहा तो पार्टी के संविधान के दायरे में रहकर उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूर की जाएगी.

दोनों प्रमुख राजनीतिक दल बागियों को आंख दिखा रहे हैं. उन पर कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं. लेकिन चौकाने वाली बात यह भी कि जिन पर कार्रवाई करनी है पार्टी को उन कार्यकर्ताओं के बारे में अता-पता ही नहीं है. बीजेपी ने नाम वापसी के आखिरी दिन जयपुर में 53 प्रत्याशी बैठाने का दावा किया तो कांग्रेस भी 90 फीसदी से ज्यादा बागी बैठाने की बात करती रही. इन सब दावों के इतर चुनाव मैदान में डटे बागियों को खुद की योग्यता के साथ ही व्यक्तिगत सम्पर्कों पर भरोसा है. ऐसे में कार्रवाई की बात करने वाली पार्टियां इस बात पर भी नजर गड़ाए रहेंगी कि किस बागी को कब अपने साथ लेना है. क्योंकि अगर बागी हार गया तो बैरी और जीत गया तो पार्टी को उसे भी गले लगाना मंजूर होगा. क्योंकि निगम की राजनीति में कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता सिर्फ और सिर्फ संख्याबल के आधार पर ही तय होगा. 

(इनपुट-दामोदर प्रसाद/शशि मोहन)