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राजस्थान में कांग्रेस लोकसभा प्रत्याशियों को नहीं मिली विधायकों की मदद!

लोकसभा चुनाव के इन परिणामों को अगर समझने की कोशिश करें तो आप देखिए कि 25 की 25 सीटों पर मोदी लहर इस कदर हावी रही है कि कांग्रेस के प्रत्याशी कहीं भी मुकाबले में ही नजर नहीं आए हैं. 

राजस्थान में कांग्रेस लोकसभा प्रत्याशियों को नहीं मिली विधायकों की मदद!
फाइल फोटो

जयपुर: राजस्थान में कांग्रेस की करारी हार के पीछे एक बड़ी वजह यह भी रही है कि लोकसभा प्रत्याशियों को विधायकों की तरफ से कोई मदद नहीं मिल पाई. राजस्थान में 200 विधानसभा क्षेत्रों में से कांग्रेस केवल 15 विधानसभा सीटों पर ही बढ़त ले पाई है. अगर इसे विधानसभा सीटों की तर्ज पर देखा जाए तो भाजपा और आरएलडी को 185 सीटें मिली हैं जो कि अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है.

राजस्थान के विधानसभा चुनाव में 200 में से 100 सीटें जीतकर सत्ता में आने वाली कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में करारी हार मिली है. 200 में से कांग्रेस लोकसभा चुनाव की 9 संसदीय क्षेत्रों की 15 सीटों पर ही बढ़त ले पाई है यानी इस चुनाव को विधानसभा चुनाव की तर्ज पर देखा जाए तो भाजपा और आरएलडी को 185 सीटें हासिल हुई हैं. अकेले भाजपा ही 178 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस से आगे रही है. इनमें भी 16 संसदीय क्षेत्र रहे हैं जिनमें सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा का दबदबा रहा है.

लोकसभा चुनाव के इन परिणामों को अगर समझने की कोशिश करें तो आप देखिए कि 25 की 25 सीटों पर मोदी लहर इस कदर हावी रही है कि कांग्रेस के प्रत्याशी कहीं भी मुकाबले में ही नजर नहीं आए हैं. लोकसभा प्रत्याशियों को विधायकों की तरफ से कोई मदद नहीं मिल पाई. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को राजस्थान में 100 सीटें मिली थी. भाजपा को 73 सीटें हासिल हुई थी. हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलडी को 3 सीटें मिली थी. बसपा ने राजस्थान में 6 सीटें जीती थीं. आदिवासी बेल्ट में सक्रिय बीटीपी को 2 सीटें मिली थी.13 निर्दलीय चुनाव जीते थे और एक सीट आरएएलडी को जो कि कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी हासिल हुई थी लेकिन लोकसभा चुनाव में यह तस्वीर पूरी तरीके से बदल गई. 

कांग्रेस इस लोकसभा चुनाव में केवल 15 विधानसभा सीटें ही जीत पाई है। इन विधानसभा सीटों की बात करें तो जयपुर की आदर्श नगर, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, जालौर की रानीवाड़ा, नागौर की मकराना, भरतपुर की कामा बाड़मेर के शिव और जैसलमेर, करौली के सपोटरा और टोडाभीम, दोसा की महुआ सिखाएं सिकराय और दौसा, टोंक की बामनवास, गंगापुर और सवाई माधोपुर की विधानसभा सीट पर ही कांग्रेस को बढ़त मिल पाई है.

इन आंकड़ों को देखने के बाद बिल्कुल साफ है कि कांग्रेस को जनता ने लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से नकार दिया यानी वर्तमान विधायक जो चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे उनका भी प्रभाव मोदी लहर के आगे कहीं नहीं टिक पाया. पूरे राजस्थान में केवल और केवल मोदी का जादू नजर आया ऐसे में निश्चित तौर पर पार्टी आलाकमान को विधायकों की इन परफारमेंस का भी आकलन करना होगा. आखिर 5 महीनों में ऐसा क्या हो गया कि कांग्रेस की स्थिति इतनी खराब हो गई है.