अलवर: एनजीटी के आदेश के बाद हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल अलवर में एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(National Green Tribunal) ने बढ़ते प्रदूषण के चलते सभी ईंट के भट्टों पर पिछले पंद्रह नवंबर से रोक लगा रखी है. 

अलवर: एनजीटी के आदेश के बाद हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट
मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट

जुगल किशोर/अलवर: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल अलवर में एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(National Green Tribunal) ने बढ़ते प्रदूषण के चलते सभी ईंट के भट्टों पर पिछले पंद्रह नवंबर से रोक लगा रखी है. साथ ही, इप्का यानी एनवायरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल ऑथरिटी ने सभी क्रेशरों पर रोक लगा दी है. वहीं अब इसके कारण यहां व्यापार तो प्रभावित हुआ ही लेकिन हजारो श्रमिकों पर रोजी रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है.

एनजीटी ने प्रदूषण कंट्रोल के चलते एनसीआर के सभी ईंट भट्टों पर रोक लगाने से इससे अलवर जिले में चलने वाले करीब 150 भट्टों पर काम करने वाले मजदूर परिवारों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. बता दें कि, एक ईंट भट्ठे पर रोजाना करीब 20 से 25 हजार ईटो की बिक्री होती है, जिससे पूरा दिन सभी मजदूर परिवार इसमें लगे रहते है.

वहीं, यकायक लगी इस रोक के बाद मजदूरों से लेकर परिवहन से जुड़े ट्रेक्टर व ट्रक मालिकों और मजदूरों पर भी इसका असर देखा जा रहा है. खबर के मुताबिक, अलवर में ईंट भट्टों पर करीब 10 करोड़ कच्ची ईंटो के ढेर लगे है. वहीं, मजदूर परिवार आगामी 18 दिसम्बर को होने वाली एनजीटी में सुनवाई के बाद फैसले का इंतजार कर रहे हैं. अगर एनजीटी ने रोक नहीं हटाई तो ये मजदूर पलायन कर जाएंगे.

गौरतलब है कि 15 नवम्बर से ईंट भट्टों पर रोक लगी थी. वहीं, इससे पहले एनवायरमेंट पॉल्यूशन कन्ट्रोल ऑथरिटी ने 15 नवम्बर से एनसीआर के सभी क्रशर भी बंद करवा दिए है. इससे जिले के करीब 40 से ज्यादा क्रेशर बन्द हो चुके है. इससे न सिर्फ सरकारी औऱ गैर सरकारी निर्माण कार्य रुके है बल्कि एक बड़ा मजदूर वर्ग भी इससे प्रभावित हुआ है.

अलवर को एनसीआर का फायदा मिला या नहीं मिला पर एनजीटी और इफ्का के आदेशों से एक बड़े मजदूर वर्ग को रोजी रोटी का संकट जरूर देखा जा रहा है. अब इनकी निगाहे 18 दिसम्बर को एनजीटी के अग्रिम आदेशों पर टिकी है.