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बारां: मूलभूत सुविधाओं के आभाव में वीरान हुई 524 आवासों की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी

कॉलोनी में बिजली व्यवस्था के लिए खम्भे खड़े कर रोड पर लाइट की व्यवस्था तो कर दी गई थी, लेकिन लाइट देने की व्यवस्था नहीं की गई है.

बारां: मूलभूत सुविधाओं के आभाव में वीरान हुई 524 आवासों की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी
बिजली विभाग भी लगे ट्रांसफार्मर को निकल ले गए हैं.

बारां: प्रदेश के बारां में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आवासन मंडन की 524 मकान की कॉलोनी पिछले डेढ़ दशक से वीरान पड़ी है. यहां तक कि कॉलोनी में असामाजिक तत्वों के अड्डे बन गए है. राजस्थान आवासन मंडल की ओर से शहर के लोगों के लिए शहर से करीब दस किलोमीटर की दूरी पर कोटा रोड़ पर आवासीय कॉलोनी बनाने का निर्णय मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोगों को रास नहीं आ रहा है. 

कॉलोनी जंगल में तब्दील हो गई है. वहीं पूरी कॉलोनी, हाल यह है कि यहां कॉलोनी का निर्माण हुए डेढ़ दशक से अधिक का समय हो गया, लेकिन अब तक पूरी कॉलोनी वीरान पड़ी हुई है. कॉलोनी में बने करीब 524 आवासों में से करीब 75 प्रतिशत आवासों का आवंटन हो गया है. आवंटियों ने कब्जे भी संभाल लिए है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के नही मिलने के कारण अब तक एक भी आवंटी ने रहना शुरू नहीं किया है. वहीं दूसरी ओर आवासन मंडल ने कॉलोनी के निर्माण के बाद इसकी सुध नहीं ली. इससे अब यहां बने आवास भी जर्जर हो गए. अब इस कॉलोनी में मकान नहीं भूत बंगले नजर आते हैं.

कॉलोनी में बिजली व्यवस्था के लिए खम्भे खड़े कर रोड पर लाइट की व्यवस्था तो कर दी गई थी, लेकिन लाइट देने की व्यवस्था नहीं की. बिजली विभाग भी लगे ट्रांसफार्मर को निकल ले गए हैं. पेयजल के लिए टंकी बनी हुई है लेकिन आवासन मंडल की लापरवाही के कारण कनेक्शन तक नही दिया गया। ओर पेयजल की टंकी भी जर्जर हो गई।

आवासन मंडल की ओर से आवासों का निर्माण तो कराया गया, लेकिन अधिकांश आवासों में फर्श तक नहीं कराया गया. इससे आवासों में दो से तीन फीट तक गहरे गड्ढे हो रहे हैं. कई आवासों की दीवारों में दरारे आ गई है तो कई के खिड़की दरवाजे चोरी तक हो गए है. अज्ञात शातिर खिड़कियों में लगी लोहे की जालियां तक निकालकर ले गए है . आवासों की हालत भूत बंगले जैसी हो रही है.

कॉलोनी में कुछ जगह तक शुरू से सड़क निर्माण नहीं कराया गया. कुछ सड़के बनाई गई, लेकिन अब वह उखड़ गई है, डामर गायब होता जा रहा है. पार्क की हालत ऐसी है कि वहां दो पल सुकून से नहीं बीता सकते. पार्को की हरियाली उजड़ गई तथा झाड़ झंकाड़ उग गए. इसी तरह लाखों की लागत के विभिन्न श्रेणी के आवासों में झाड़-झंकाड़ उग आए है.

आवासन मंडल विकास समिति के देवकीनन्दन चतुर्वेदी का कहना है कि अधिक दूरी होने तथा कॉलोनी में सुविधाओं को व्यवस्थित नहीं रखने से लोगों ने अब तक बसना शुरू नहीं किया है. अब आवंटियों का राहत देने के लिए विभाग की ओर से मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत अनुदान दिया जाए. दण्डनीय राशि माफी योजना के तहत ब्याज राशि में छूट दी जाए. आवासों की मरम्मत कराकर सुविधाओं का विस्तार किया जाए. मुख्य प्रवेश मार्ग को 60 फीट चैड़ा कर सिटी फोरलेन पथ से जोड़ा जाए. 

आवासन मंडल की ओर से बड़े जतन से वर्ष 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में आवासन मंडल ने घरौंदा योजना के तहत अल्प आय वर्ग के करीब पांच सौ आवेदन लिए तथा कुछ वर्ष बाद आवासों का निर्माण शुरू किया. केन्द्रीय विद्यालय के पीछे हरिपुरा के समीप 233 आवास बनाए थे. बाद में इसके समीप ही 144 एवं करीब 122 आवास तथा उसके बाद 25 आवास और बनाए गए थे. यह सभी 524 आवास खाली पड़े हैं. जिला कलेक्टर इन्द्र सिंह का कहना कि शहर में आवासन मंडल की कॉलोनी वीरान पड़ी होने की जानकारी मिली है. आवासन मंडल के अधिकारी कोटा बैठते है अधिकारीयों की बैठकर एक कॉलोनी को बसाने के प्रयास किए जायेंगे.