close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जयपुर: पंचायत पुनर्गठन के तहत नई समिति बनने का प्रस्ताव तैयार

उपखंड अधिकारियों की ओर से भेजे गए नई पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के गठन प्रस्तावों के बाद कलक्टर ने प्रारूप का प्रकाशन कर दिया है. 

जयपुर: पंचायत पुनर्गठन के तहत नई समिति बनने का प्रस्ताव तैयार
जयपुर जिले में 49 ग्राम पंचायतों को मिलाकर एक नई पंचायत समिति जोबनेर बनना प्रस्तावित है.

जयपुर: पंचायतों के पुर्नगठन के तहत जयपुर जिले में एक नई पंचायत समिति सहित 66 नई ग्राम पंचायत बनना प्रस्तावित है. राज्य सरकार की ओर से पंचायतीराज संस्थाओं के पुर्नगठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन के संबंध में तैयार प्रस्तावों के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है. जयपुर जिले में 49  ग्राम पंचायतों को मिलाकर एक नई पंचायत समिति जोबनेर बनना प्रस्तावित है. उपखंड अधिकारियों की ओर से भेजे गए नई पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के गठन प्रस्तावों के बाद कलक्टर ने प्रारूप का प्रकाशन कर दिया है. 

पुर्नगठन का प्रस्ताव पास हुआ तो जयपुर जिले में 16 पंचायत समिति और 598 ग्राम पंचायतें होंगी. ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, सीमांकन, नव सृजन के तहत कलेक्टर पंचायत जगरूप सिंह यादव ने जयपुर जिले की 15 पंचायत समिति क्षेत्रों में पुनर्गठित, पुनर्सीमांकित, नवसृजित कर 91 नई ग्राम पंचायतों और एक नई पंचायत समिति जोबनेर के नामों के प्रस्ताव प्रकाशित कर संबंधित क्षेत्रों में नोटिस बोर्ड पर चस्पा करवाया है. राजस्थान पंचायती राज अधिनियम के तहत आपत्तियां आमंत्रित की गई है. वर्ष 1991 के बाद वर्ष 2014 में भाजपा सरकार ने 1991 के बाद पंचायतीराज संस्थाओं का पुनर्गठन कराया था. इसमें जिले को दो नई ग्राम पंचायत जालसू और पावटा मिली थी. साथ ही 42 नई ग्राम पंचायतें बनी थी. 

वहीं इस बार राज्य सरकार की ओर से नियमों में राहत भी दी गई है. ऐसे में इस बार एक नई पंचायत समिति जोबनेर भी बन सकती है. जिले में 66 नई ग्राम पंचायतों का गठन हो सकता है. इसके बाद जिले में 16 पंचायत समितियां और 598 ग्राम पंचायत रहेंगी. वर्तमान में जिले में  532 ग्राम पंचायतें हैं और 15 पंचायत समितियां हैं. सीमांकन या पुनर्गठन के दौरान जिले में 172 ग्राम पंचायतों का टूटना तय है. इन ग्राम पंचायतों के अधीन आने वाले गांवों में से नई ग्राम पंचायतों का गठन होगा. जनवरी-फरवरी 2020 में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव प्रस्तावित हैं. ऐसे में सितंबर तक इसकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.

बता दें कि नई ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव के लिए 4 शर्तें जरूरी हैं. पुनर्गठन, पुन: सीमांकन, नवसृजन के प्रस्ताव तैयार करने के लिए न्यूनतम जनसंख्या 4 हजार व अधिकतम 6 हजार 500 रहेगी. किसी ग्राम के निवासियों की मांग व प्रशासनिक दृष्टि से ऐसे गांवों को वर्तमान ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायत में शामिल किया जा सकता है, लेकिन उस गांव की दूरी दूसरी नई ग्राम पंचायत के मुख्यालय से 8 किमी से अधिक नहीं हो. राज्य के अनुसूचित व मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए दूरी का निर्धारण करने के लिए कलेक्टर प्रशासनिक व व्यावहारिक दृष्टिकोण से स्वयं निर्णय ले सकेंगे. किसी भी राजस्व ग्राम को विभाजित कर दो पंचायतों में नहीं रखा जाएगा. संपूर्ण राजस्व गांव एक ही पंचायत में रहेगा.

वहीं पंचायत समिति के लिए 40 या अधिक ग्राम पंचायतों की संख्या, 2 लाख से अधिक आबादी तो पुनर्गठन, पंचायत समिति में न्यूनतम 25 ग्राम पंचायतें. कोई भी ग्राम पंचायत दो पंचायत समितियों के अधीन विभाजित नहीं होगी यानी पूरी ग्राम पंचायत एक ही पंचायत समिति में रहेगी. पंचायत समिति में वार्डों की संख्या न्यूनतम 15 होगी जैसी शर्तें होंगी.

कलक्टर जगरूप सिंह यादव ने बताया की पंचायतों के पुनर्गठन के प्रस्तावों के प्रारूप प्रकाशन के बाद संबंधित पंचायत के लोग आपत्ति दर्ज करवा सकेंगे. उसके बाद ड्राफ्ट प्रस्तावों की आपत्तियों पर सुनवाई की जाएगी. यह सब काम हो जाने के बाद  जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर पंचायती राज विभाग को भेजा जाएगा. यादव ने बताया की एक ग्राम पंचायत में आठ किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों को ही शामिल किया गया है. किसी भी राजस्व ग्राम को दो पंचायतों में नहीं रखा गया है. पंचायत समिति और ग्राम पंचायत के विस्तार-पुनर्गठन सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन द्वारा ही किया गया है. सभी ग्राम पंचायतों की जनसंख्या, उनकी भौगोलिक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करने के बाद ही प्रस्ताव तैयार किए गए हैं. ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के लिए पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन, नवसृजन के लिए वर्ष 2011 की जन-गणनाओं के आंकड़ों के आधार पर ही प्रस्ताव तैयार किया है.

बहरहाल, राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्गठन कार्यक्रम में बदलाव किया है. पहले ये प्रक्रिया 2 सितंबर तक पूरी हो जानी थी. अब 7 सितंबर तक पूरी होगी. नए शेड्यूल के अनुसार 29 जुलाई तक नई ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां बनाने के प्रस्ताव तैयार करने की मियाद रखी गई थी. इस पर 30 जुलाई से 29 अगस्त तक राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 101 के तहत आपत्तियां आमंत्रित की जा सकेंगी. इसके बाद 30 अगस्त से 4 सितंबर तक आपत्तियों पर सुनवाई की जाएगी. फिर 5 सितंबर से 7 सितंबर तक आपत्तियों का निस्तारण कर प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे जाएंगे.