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जोधपुर: प्रशासन की अनदेखी का शिकार हुआ करोड़ों रुपए से बना ओपीडी ब्लॉक भवन

प्रोजेक्ट के अधूरे रहने के कारण शाम होते ही यह भवन असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है.

जोधपुर: प्रशासन की अनदेखी का शिकार हुआ करोड़ों रुपए से बना ओपीडी ब्लॉक भवन
अब एक बार फिर लोगों को उम्मीद बंधी है कि जल्द ही प्रोजेक्ट का काम शुरू होगा.

जोधपुर/अरुण हर्ष: कहा जाता है कि हाकम भले ही बदल जाए लेकिन हुकुम नहीं बदलते हैं, लेकिन पिछले 6 वर्षों में हुए सत्ता परिवर्तन का सबसे बड़ा दंश यदि किसी ने झेला है तो वह जोधपुर है. 2008 से 2013 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से जोधपुर शहर को मेडिकल हब बनाने की दृष्टि से विभिन्न प्रोजेक्ट शुरू किए गए थे लेकिन 2013 में सरकार बदलने के साथ ही यह सभी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चल गए. हालात यह है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद भी अभी तक यह प्रोजेक्ट धूल फांक रहे हैं. सरकार बदलने के साथ ही अब एक बार फिर लोगों को उम्मीद बंधी है कि जल्द ही प्रोजेक्ट का काम शुरू होगा.

यह कहानी है जोधपुर का महात्मा गांधी अस्पताल का निर्माणाधीन ओपीडी भवन. तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2012 में मरीजों को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं देने के उद्देश्य से एमजीएच, केएन चेस्ट भवन ओर उम्मेद अस्पताल में नई ओपीडी ब्लॉक बनाने की घोषणा की थी. मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के बाद ओपीडी ब्लॉक बनने का काम भी शुरू हो गया. करीब 1 साल तक युद्ध स्तर पर एमजीएच में ओपीडी भवन का काम शुरू किया गया. साथ ही अस्पताल के चेस्ट हॉस्पिटल में भी इसी तरह नई ओपीडी ब्लॉक का निर्माण शुरू किया गया लेकिन सरकार बदलने के साथ ही यह सभी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चले गए. पर्याप्त बजट के अभाव में जो काम चल रहा था वह भी अधूरा रह गया. 

अब पिछले करीब 4 वर्षो से यह प्रोजेक्ट का काम रुका हुआ है. अब तक इन प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन पूरे प्रोजेक्ट नहीं होने के कारण यह लोगों के लिए उपयोगी साबित नहीं हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि इन प्रोजेक्ट के पूरा नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यदि यह प्रोजेक्ट पूरा होता है तो मरीजों को इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं होगी और एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं मिल जाएगी. वहीं प्रोजेक्ट के अधूरे रहने के कारण शाम होते ही यह भवन असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है.

वहीं मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल का कहना है कि इन प्रोजेक्ट का 80% काम पूरा हो चुका है और शेष 20% कार्य को पूरा करने के लिए लगभग 12 करोड रुपए की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि इसके लिए राज्य सरकार को रिमाइंडर भेजा गया है और ज्यो ही राज्य सरकार की ओर से बजट मिलेगा इन प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में अपने हर भाषण में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर जोधपुर के साथ उपेक्षा करने का आरोप लगाया था लेकिन अब राज बदलने के 6 महीने होने के बावजूद भी इन प्रोजेक्ट को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है. लोगों को उम्मीद है कि इस बार के बजट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अधूरे पड़े प्रोजेक्ट की पूरा करने के लिए स्वीकृति जारी करेंगे जिससे इन प्रोजेक्ट का लाभ जोधपुर सहित संभाग भर के मरीजों को मिल सकेगा.