कोटा: भूकंप के लिए भी हमेशा तैयार रहती है आर्मी, देखें कैसे होती है रिहर्सल

एक्सरसाइज राहत में दिखाया गया कि कोटा में भूकंप आता है. कोटा में मरीज अस्पतालों में फंस गए, सड़कें फटने से वाहन सड़कों पर क्षतिग्रस्त हो गए और जाम की स्थिति बन गई.

कोटा: भूकंप के लिए भी हमेशा तैयार रहती है आर्मी, देखें कैसे होती है रिहर्सल

कोटा/ हिमांशु मित्तल: राजस्थान के कोटा के शिवपुरार इलाके में अचानक भूकंप आने से अफरा तफरी और तबाही का माहौल बन गया. हर तरफ चीख पुकार मची थी, हजारों लोग बड़ी मंजिलों के मलबे में दब गए. कोई अपने अपनों को बचाने की गुहार कर रहा था. इसी बीच आपदा प्रबंधन के 18 संगठन और भारतीय सेना ने मौर्चा संभाला और फंसे हुए लोगों की जान बचाने में जुट गए.  

घबराएं नहीं कोटा में भूकंप जैसी घटना नहीं हुई है लेकिन अगर कभी इस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़े तो कैसी होगी हमारी तैयारी इसे लेकर पीएम मोदी के निर्देश पर एक्सरसाइज राहत आयोजित की गई. इस दौरान सप्त शक्ति कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मैथसन विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे. वंही कोटा जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त समेत कोटा एसपी मौजूद रहे.  

एक्सरसाइज राहत में दिखाया गया कि कोटा में भूकंप आता है. कोटा में मरीज अस्पतालों में फंस गए, सड़कें फटने से वाहन सड़कों पर क्षतिग्रस्त हो गए और जाम की स्थिति बन गई. वहीं बच्चे स्कूल की टूटी बिल्डिंग में खतरे में थे. एजुकेशन सिटी में आए ऐसे जलजले ने पूरा जीवन अस्त व्यस्त कर दिया. ऐसे में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, स्टेट एमजरेंसी सर्विसेज, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज एंव आर्म्ड फोर्सेज के जवानों ने मोर्चा संभाला.  

इस प्रदर्शन क्षेत्र में 6 साइट बनाकर भूकम्प से हुई तबाही और उससे जुड़ी राहत और बचाव की समन्वित कार्यवाही का प्रदर्शन करते हुए बचाव, राहत एवं पुनर्वास से जुड़ी आपदा प्रबन्धन क्षमताओं की झलक दिखाई गई. स्टेजिंग एरिया में इकट्ठा होकर संयुक्त राहत दल आपसी तालमेल का बेहतर प्रदर्शन करते हुए सौंपे गए दायित्वों को बखूबी निभाते हैं. टूटे पुल की जगह सेना तुरन्त एम 50 पुल बनाकर आवागमन सुचारू करती है ताकि संयुक्त राहत दल प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर फंसे लोगों को बचा सके. एम्बुलेंस, फायर फाइटर, चेतक-ध्रुव जैसे हेलिकॉप्टर हवा में रहते हुए ऊंची बिल्डिंग से गर्भवती महिला को एयरलिफ्ट के जरिए रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाते हैं तो राहतकर्मियों एवं राहत सामग्री को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाते हैं.   

गंभीर घायलों को हेलिकॉप्टर से अस्पताल भेजा जाता है. वहीं ट्राइटन मॉल में लगी आग से रस्सियों के सहारे राहत दल लोगों की जान बचाते हैं. हाइड्रॉलिक लिफ्ट लेडर के साथ अग्निशामक दल, फायर फाइटर, जेसीबी, बुलडोजर, एम्बुलेंस आदि के साथ ही सीआईएसफ एवं आरएसी इस क्षेत्र में मौजूद हैं ताकि हड़बड़ी या दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हो. एक छोटे ऑपरेशन थिएटर के साथ छोटा अस्पताल कायम किया गया जहां माइनर एमरजेंसी सर्जरी कर सकते हैं.

बहरहाल, राजस्थान भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं के सांए में रहता है. भूकंप जैसी आपदा के लिए प्रबंधन बेहद जरूरी है. देश भूकंप की दृष्टि से चार जोन में विभाजित किया गया है. इनमें राजस्थान के अधिकांश क्षेत्र जोन दो में आते हैं. जो सबसे कम खतरे वाला क्षेत्र है.