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कोटा: जेके लोन अस्पताल में बच्चों की सेहत से खिलवाड़, लैब में मिले एक्सपायर हुए सीरिंज

मामले का खुलासा होने के बाद अस्पताल में हड़कप मच गया. लेब प्रभारी महेश पंवार भी मौके पर पहुंचे. आनन फानन में उन्होंने डिस्पोसिबल सीरिंज (5 एमएल) के पैकेट को डस्टबिन में फेंका. 

कोटा: जेके लोन अस्पताल में बच्चों की सेहत से खिलवाड़, लैब में मिले एक्सपायर हुए सीरिंज
इंडोर लैब में एक दिन में करीब 125 मरीज जाच के लिए आते है.

मुकेश सोनी/कोटा: सम्भाग के सबसे बड़े मातृ एंव शिशु अस्पताल, जेके लोन में मासूम बच्चों की सेहत से खिलवाड़ का मामला सामने आया है. अस्पताल की इंडोर लैब में 15 माह पहले एक्सपायर हो चुकी डिस्पोसिबल सीरिंज के चार पैकेट मिले है. जब मीडियाकर्मी जेके लोन अस्पताल पहुचे तो मामले का खुलासा हुआ. अस्पताल की लैब में डिस्पोसिबल सीरिंज (5 एमएल) के 400 नग मिले. जो मई 2018 में ही एक्सपायर हो चुके. 

मचा हड़कम्प
मामले का खुलासा होने के बाद अस्पताल में हड़कप मच गया. लेब प्रभारी महेश पंवार भी मौके पर पहुंचे. आनन फानन में उन्होंने डिस्पोसिबल सीरिंज (5 एमएल) के पैकेट को डस्टबिन में फेंका. जेकेलोन अस्पताल में दो लैब है एक आउटडोर लैब ( रूम no 4 )और दूसरी इंडोर लैब ( रूम no 151). इंडोर लैब ( रूम no 151 ) में भर्ती मरीजों की जांच और सेम्पल कलेक्शन होता है. जबकि आउटडोर लेब में ANC CARD वाली महिला मरीजों की जांच होती हैं. इंडोर लैब में एक दिन में करीब 125 मरीज जाच के लिए आते है. यहां साल भर में हजारों डिस्पोसिबल सीरिंज का इस्तेमाल होता है.

इंफेक्शन का खतरा
जानकारी के मुताबिक एक्सपायरी सीरिंज के उपयोग से इंफेक्शन (संक्रमण) फेल सकता है. एक्सपायरी सीरिंजों में जंग लग सकता है. यही सीरिंज अगर किसी बच्चे के सीबीसी (रक्त) की जांच के लिए सेम्पल के उपयोग में ले ली जाए तो उसे संक्रमण हो सकता है. अस्पताल की लैब में प्रतिदिन 150 मरीज जाच के लिए आते है. ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है अब तक कितनी एक्सपायरी डिस्पोसिबल सीरिंज का उपयोग किया जा चुका होगा.

जवाब मांगते सवाल
ऐसे में सवाल उठता है कि 15 माह पहले ही एक्सपायरी हो चुके डिस्पोसिबल सीरिंज लैब में कैसे आये? जबकि अस्पताल में प्रतिमाह हजारों डिस्पोसिबल सीरिंज का उपयोग किया जाता है. यदि बल्क में मंगवाया गया था तो उनकी एक्सपायरी डेट पर ध्यान क्यो नही दिया गया? यदि भूलवश एक्सपायरी डेट के डिस्पोसिबल सीरिंज आ भी गए तो उनको अभी तक डिस्पोज क्यो नही किया गया? उनको लैब में सम्भाल कर क्यो रखा गया? या फिर गुपचुप तरीके से इनका इस्तेमाल किया जा रहा था ? ऐसे तमाम सवाल है जिनके जवाब अस्पताल प्रशासन को देने पड़ेंगे.

जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ एचएल मीणा का कहना है कि अस्पताल में नया स्टॉक आया था. लेब में तीन-चार पैकेट पुराना स्टॉक रह गया होगा. इनका इस्तेमाल नही किया गया. मामला जानकारी में आते ही मैंने लैब व स्टोर में दिखवाकर सारी एक्सपायरी सीरिंजों को फिंकवा दिया है. मामले में किसी की लापरवाही होगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.