नागौर: प्रवासी पक्षियों को भा रही है डीडवाना की आबोहवा, कुरजां ने बनाया अपना प्रवास स्थल

राजस्थान में वैसे तो खिंचन ऐसा स्थान है जहां हजारों की तादाद में हर साल कुरजां अपना डेरा डालती है. लेकिन विगत 2-3 सालों से यहां कुरजां पक्षी ने डीडवाना में भी प्रवास प्रारंभ किया है

नागौर: प्रवासी पक्षियों को भा रही है डीडवाना की आबोहवा, कुरजां ने बनाया अपना प्रवास स्थल
कुरजां पक्षियों ने यहां अपना प्रवास स्थल बनाया है.

हनुमान तंवर/नागौर: सुदूर प्रदेशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का राजस्थान से जुड़ाव सदियों से रहा है और यही वजह है कि कई प्रवासी पक्षी राजस्थान की संस्कृति का एक हिस्सा भी बन गए हैं. इन प्रवासी पक्षियों पर राजस्थान की इस मरुभूमि में कई गीत और कहानी गाई और लिखी गई.

इन प्रवासी पक्षियों पर सबसे ज्यादा विरह के गीत लिखे गए. डेमोसिल क्रेन जिसे स्थानीय भाषा मे कुरजां कहा जाता है, इस पर भी कई गीत लिखे गए जिसमें 'कुरजां ये म्हारो भंवर मिला दे य..' सबसे ज्यादा प्रचलित राजस्थानी गीत रहा है. जिसमें नायिका कुरजां को विदेश में बसे नायक से मिलाने की बात कहती है. 

दरअसल, डीडवाना के आसपास का क्षेत्र वेटलैंड है और नमक झील और उसके आसपास के तालाबों में यहां अक्सर हजारों की तादाद में विदेशी पक्षियों की कलरव देखी और सुनी जा सकती है. साइबेरियन सारस जिसे फ्लेमिंगो भी कहा जाता है और स्थानीय भाषा मे राजहंस कहे जाने वाले प्रवासी पक्षी का यह क्षेत्र कई सालों से पसंदीदा क्षेत्र बना हुआ है. 

यहां के तालाबों और झील में बहुतायत पाए जाने वाली स्पाईरोलिना ग्रीन एल्गी इनका पसंदीदा भोजन है, जो प्रचुर मात्रा में यहां उपलब्ध रहता है. जिसके चलते फ्लेमिंगो के कई झुंड यहां स्थाई प्रवास भी करते देखे गए हैं और विशेषज्ञों के अनुसार यहां इन प्रवासियों ने नेस्टिंग की प्रक्रिया भी पिछले कुछ सालों में प्रारंभ की है. 

राजस्थान में वैसे तो खिंचन ऐसा स्थान है जहां हजारों की तादाद में हर साल कुरजां अपना डेरा डालती है. लेकिन विगत 2-3 सालों से यहां कुरजां पक्षी ने डीडवाना में भी प्रवास प्रारंभ किया है, जो पक्षी प्रेमियों को खूब भा रहा है. 

सांभरलेक में गत वर्ष हुई पक्षी त्रासदी के बाद पक्षी प्रेमियों में पक्षियों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता देखी गई थी. सांभरलेक में हुई पक्षी त्रासदी के पीछे एवियन बोटूलिज्म को कारण माना गया था. सांभर पक्षी त्रासदी के वक्त डीडवाना में भी प्रवासी पक्षी काफी देरी से आए थे. लेकिन यहां जितने भी प्रवासी पक्षी आए वो बिल्कुल सुरक्षित थे. 

हालांकि, प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर यहां किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था प्रशासन और सरकार द्वारा कभी नहीं की गई. लेकिन प्राकृतिक रूप से सुरक्षित माहौल यहां इन प्रवासी पक्षियों को मिला हुआ है.

कुरजां का अल्पकालीन प्रवास यहां पक्षी प्रेमियों को सुखद अहसास करवा रहा है. लेकिन प्रशासनिक तौर दाने पानी की कोई व्यवस्था अगर इन प्रवासी पक्षियों के लिए की जाए तो इनके प्रवास काल की अवधि और संख्या में इजाफा हो सकता है, जिससे पर्यटकों को भी यहां आकर्षित किया जा सकता है.