डीडवाना: पुलिसकर्मियों ने किया शहीद की बहन का कन्यादान, गिफ्ट किए 1 लाख रुपये और स्कूटी

डीडवाना के खाखोली गांव निवासी कमांडो भींवाराम भाकर की ड्यूटी के दौरान शहादत हो गई. भींवाराम अपनी बहन सरोज का इकलौता भाई था. परिवार में भाई की शहादत के बाद शहीद के माता-पिता और बहन सब अकेले पड़ गए. शहीद भींवाराम की बहन की शादी तय की गई थी. बहन को रह-रह कर अपने भाई की याद भी आ रही थी. 

डीडवाना: पुलिसकर्मियों ने किया शहीद की बहन का कन्यादान, गिफ्ट किए 1 लाख रुपये और स्कूटी
भींवाराम अपनी बहन सरोज के इकलौते भाई थे.

हनुमान तंवरडीडवाना: शादी ब्याह में नागौर (Nagaur) जिले में ही नहीं, प्रदेश भर में यह गीत भात भरने जब भाई आता है तो बहन की ओर से गीत गाया जाता है कि "बीरा बणजे तू जायल रो जाट, बणजे खिंयाला रो चौधरी" और भाई अपनी बहन के भात में दिल खोलकर मायरा भरता है.

यह गीत 600 से 700 वर्ष पूर्व सल्तनत काल में रचा गया था. यही गीत एकबार फिर इतिहास नागौर की धरती पर दोहराया गया. नागौर में पुलिसकर्मियों ने शहीद की बहन का कन्यादान कर इतिहास रच दिया. 

दरअसल, डीडवाना के खाखोली गांव निवासी कमांडो भींवाराम भाकर की ड्यूटी के दौरान शहादत हो गई. भींवाराम अपनी बहन सरोज के इकलौते भाई थे. परिवार में भाई की शहादत के बाद शहीद के माता-पिता और बहन सब अकेले पड़ गए. शहीद भींवाराम की बहन की शादी तय की गई थी. बहन को रह-रह कर अपने भाई की याद भी आ रही थी. परिवार के लोगों को भी भींवाराम की कमी खल रही थी और भावुक नजर आ रहे थे.

वहीं शहीद की बहन की शादी का जब शहीद की बेंच 2013 के सिपाहियों और कमांडो को पता चला तो सबने तय किया कि शहीद भींवाराम हमारे बीच नहीं हैं तो क्या हुआ, बहन को भाई की कमी न खले. सबने कहा कि नागौर के पुलिसकर्मी भाई बनकर हमेशा बहन के साथ हैं और हमेशा रहेंगे.

पुलिसवालों ने कहा - बहन को नहीं खलेगी भाई की कमी
शहीद भींवाराम के बेचमैट ने तय किया कि बहन के कन्यादान के रूप में मायरा भरेंगे. नागौर के सभी पुलिसकर्मियों ने सहयोग किया और एक लाख इक्यावन हजार नकद एक स्कूटी और सोने का हार कन्यादान स्वरूप भेंट किए. साथी बेचमैट और अधिकारी शहीद बहन की शादी में शिरकत करने पहुंचे.

पुलिसकर्मियों के अपना एक परिवार है और पुलिसकर्मियों के परिवार वाले भी इसका एक हिस्सा है, यह आज साबित कर दिखाया नागौर के पुलिसकर्मियों ने. सभी साथी कमांडो शहीद भींवाराम की बहन की शादी के अवसर पर पहुंचे और परिवार की जिम्मेदारी को निभाते हुए फर्ज निभाया.

पुलिस ने पेश की मिसाल
एक तरफ जहां पुलिस को हमेशा लोगो द्वारा हमेशा शंका की दृष्टि से देखकर गलत समझा जाता है मगर नागौर पुलिस बेड़े द्वारा शहीद की बहन का भाई बनकर यह साबित कर दिया कि वे हर बहन के रखवाले हैं. भाई बनकर हमेशा बहन के सुख दुःख में काम आएगें और हिफाजत करेंगे. नागौर के इन जाबांज जवानों से सीख लेने की जरूरत आज देश के हर पुलिसकर्मी को है ताकि देश की बहन-बेटियों का विश्वास कायम रहे.