डूंगरपुर: अधिकारियों ने छीन लिया बुजुर्ग महिला का सहारा, अब दर-दर की खा रही ठोकरें

पेंशन के अभाव में पिछले कई दिनों से जुबैदा के चूल्हे से धुआं नहीं उठा है. अब पेट भरने के लिए न चाहते हुए भी जुबैदा को भीख मांगनी पड़ रही है. 

डूंगरपुर: अधिकारियों ने छीन लिया बुजुर्ग महिला का सहारा, अब दर-दर की खा रही ठोकरें
सरकार से मिलने वाली दिव्यांग पेंशन ही जुबैदा के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा था.

अखिलेश शर्मा, डूंगरपुर: प्रदेश सरकार की ओर से जन कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के चलते उन योजनाओं का लाभ लाभार्थियों को समय पर नहीं मिल पाता है.
एक ऐसा ही मामला सामने आया है डूंगरपुर शहर में, जहां शहर के पातेला निवासी एक दिव्यांग महिला पिछले 7 सात महीनों से अपनी पेंशन के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर है.

इस दिव्यांग महिला का नाम जुबैदा है. शहर के घांटी मोहल्ला निवासी जुबैदा का न तो पति है और न ही बेटे-बेटियां जो बुढ़ापे और लाचारी की इस हालत में उसका ख्याल रख सके. जुबैदा का कहना है कि वो घाटी मोहल्ला स्थित झोपड़े में अकेली रहती है और खुद ही खाना बनाकर अपना जीवन यापन करती है. ऐसे में सरकार से मिलने वाली दिव्यांग पेंशन ही जुबैदा के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा था लेकिन लापरवाह सरकारी अधिकारियों ने जुबैदा का ये एक मात्र सहारा भी छीन लिया. जुबैदा को पिछले 7 माह से पेंशन नहीं मिली है, जिसकी वजह से वो रोजाना सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है.

पेंशन के अभाव में पिछले कई दिनों से जुबैदा के चूल्हे से धुआं नहीं उठा है. अब पेट भरने के लिए न चाहते हुए भी जुबैदा को भीख मांगनी पड़ रही है. महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी जब ज़ुबैदा की समस्या हल नहीं हुई. ज़ुबैदा ने कहा कि तहसील ओर उपखंड कार्यालय से लेकर पोस्ट आफिस तक वो अपनी समस्या को लेकर कई बार गई लेकिन कहीं से कोई मदद नही मिली.

दर-दर की ठोकरें खाने के बाद बड़ी उम्मीद से ज़ुबैदा ने जिला कलेक्टर के आने से पहले उनके कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया. कलेक्टर आलोक रंजन जब कार्यालय आए तो उन्होंने राह में बैठी दिव्यांग की समस्या पूछी लेकिन मीडिया के कैमरे देखते ही कलेक्टर रंजन अपने अधीनस्थ अधिकारियों को महिला की मदद करने के निर्देश देते हुए अपने चैंबर में चले गए. इस मामले में जब मीडिया ने कलेक्टर आलोक रंजन से मिलना चाहा तो उन्होंने मिलने से मना कर दिया. 
बहरहाल प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री की मंशा है कि सरकार की कल्याणकारी योजना का लाभ पात्र व्यक्ति को समय पर मिले लेकिन डूंगरपुर के कुछ अधिकारी सरकार की इस मंशा को पलीता लगाने में लगे हैं. खैर अब देखना होगा की दिव्यांग बेवा को आखिर कब तक उसकी पेंशन मिल पाती है?