झुंझुनूं: चौकी प्रभारी एक हजार की रिश्वत लेता रंगे हाथों गिरफ्तार

एसीबी की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गुढ़ागौडजी थाना इलाके की चंवरा चौकी प्रभारी सुरेशकुमार को एक हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है.

झुंझुनूं: चौकी प्रभारी एक हजार की रिश्वत लेता रंगे हाथों गिरफ्तार
चंवरा चौकी प्रभारी सुरेश कुमार

झुंझुनूं: एसीबी की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गुढ़ागौडजी थाना इलाके की चंवरा चौकी प्रभारी सुरेश कुमार को एक हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. जानकारी के मुताबिक टोडी निवासी जयप्रकाश कुल्हरी के कैंटर से एक कार का 20 दिसंबर को टीटनवाड़ बस स्टैंड के पास एक्सीडेंट हो गया था. इस मामले में कार चालक ने कैंटर चालक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था. इस कैंटर में मूंगफली की बोरियां थी. हादसे के बाद पुलिस ने कैंटर को जब्त कर लिया. उसे छुड़वाने के लिए चंवरा चौकी प्रभारी ने जयप्रकाश कुल्हरी से दो बोरी मूंगफली और पांच हजार रुपए की रिश्वत की मांग की. दरअसल चौकी प्रभारी के ओर से कहा गया कि उसे भी डीएसपी और एसएचओ को पैसे देने पड़ते हैं. 

जयप्रकाश के मुताबिक उसने इसकी शिकायत एसीबी झुंझुनूं को दी, जिसके बाद एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करवाया. सत्यापन के दौरान पांच हजार रुपए का सौदा तीन हजार रुपए में तय हुआ और चंवरा चौकी पर ही प्रभारी सुरेश कुमार ने दो हजार रुपए ले लिए. शेष एक हजार रुपए देने के लिए एसीबी टीम के साथ शनिवार सुबह फिर से जयप्रकाश कुल्हरी चंवरा चौकी पहुंचा, लेकिन चौकी प्रभारी सुरेशकुमार के पास कुछ लोग बैठे थे.  इसलिए उसने कहा कि वह थोड़ी देर में अपने गांव जाएगा. तो रास्ते में उससे हिसाब कर लेगा. 

जयप्रकाश कुल्हरी इसके बाद दोरासर स्थित अपने गोदाम पर लौट आया. कुछ देर बाद चौकी प्रभारी सुरेशकुमार, गुढ़ागौडजी एसएचओ राजेंद्र शर्मा के साथ निजी गाड़ी में आये. साथ ही  एसएचओ भी गाड़ी में बैठे थे, जहां सुरेशकुमार ने जयप्रकाश से एक हजार रुपए लिए और साथ ही मूंगफली की मांग की गई.  

जानकारी के अनुसार इसी दौरान एसीबी की टीम ने सुरेश कुमार को दबोच लिया. कार्रवाई के बाद एसएचओ गुढ़ागौडजी राजेंद्र शर्मा भी गाड़ी को छोड़ बस से रवाना हो गए. एसीबी की पूछताछ और कार्रवाई में अब तक एसएचओ का कोई लेन-देन नहीं माना गया है, लेकिन चौकी प्रभारी के साथ एसएचओ का आना, साथ ही पैसे मांगने से पहले एसएचओ के नाम पर रिश्वत मांगना, इससे सवाल खड़े हो रहे हैं. हालांकि एसीबी ने इसके लिए जांच करने की बात कही है, लेकिन कहीं ना कहीं एसएचओ की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है.