Rajasthani Sanganeri Print: राजस्थान में सांगानेरी प्रिंट का करीब 1800 करोड़ का करोबार हैं. इस प्रिंट की शुरुआत 16वीं शताब्दी में राज परिवारों के लिए की गई थी.
1/5आधुनिकीकरण में कला कही खोती जा रही है. एक्सपर्ट का कहना है कि जो काम करने में 6 महीने लगते थे. अब डिजटलीकरण के कारण 3 दिन में काम हो जाता है. सिंथेटिक रंगो का यूज हो रहा है. पहले की तरह प्राकृतिक रंग प्रयोग नहीं किए जाते हैं.
2/5समय के साथ इस प्रिंट में काफी बदलाव देखने को मिले हैं. पहले धनिए की बूटी, पतासे, झूले, बेल आदि बनाए जाते थे. अब ट्रेडिसन प्रिंट के साथ कंटेंम्परेरी डिजाइन भी बनाए जा रहे हैं, जो लोगों को बेहद पसंद आ रहे हैं.