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उदयपुर की नालियों में बह रहा बारिश का शुद्ध पानी, प्रशासन बेखबर

उदयपुर की नालियों में बारिश का शुद्ध पानी व्यर्थ बह रहा है. शहर की स्वरूप साग झील की पाल से पानी तीन अलग अलग स्थानों से निकल रहा है.

उदयपुर की नालियों में बह रहा बारिश का शुद्ध पानी, प्रशासन बेखबर
स्वरूप सागर झील शहर के पिछोला झील से जुड़ी हुई है.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: पानी की एक एक बूंद बचाने के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार करोड़ों रूपए खर्च करती है. लेकिन कुछ ही दिन पहले जल संकट से जूझ रहे उदयपुर शहर में हर रोज लाखों लीटर पानी व्यर्थ ही शिवरेज लाइन में बह रहा है. बावजूद इसके जिम्मेदार इस ओर आंख मूंद कर बैठे है और ना ही पानी को राकने और इसका उपयोग लेने के लिए काई रूचि नहीं दिखा रहे है.

उदयपुर की नालियों में बारिश का शुद्ध पानी व्यर्थ बह रहा है. शहर की स्वरूप साग झील की पाल से पानी तीन अलग अलग स्थानों से निकल रहा है. लेकिन इसको रोकने या इसका उपयोग करने को लेकर अब तक काई प्रयास नहीं किया गया है. ऐसे में हर रोज लाखों लिटर पानी शहर की शिवरेज लाइन में समा कर बर्बाद हो रहा है. झील का यह पानी किसी एक स्थान से नहीं बल्कि तीन अलग अलग स्थानों से बहकर बाहर निकल रहा है और गंदे नाले में समा रहा है. वर्षो से व्यर्थ बह रहे इस पानी को उपयोग में लेने के लिए कई बार शहर के जागरूक नागरिकों ने आवाज उठाई लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया. 

जानकारों की माने तो किसी भी बांध और झील की पाल पर पानी के दबाव को कम करने के लिए कई बार पानी के निकासी की व्यवस्था की जाती है. संभतया यही कारण है कि स्वरूप सागर झील की पाल से पानी की निकासी हो रही है. लेकिन रियासत काल में यह पानी लोगों के दैनिक उपयोग के लिए काम में लिया जाता था. लेकिन आधूनिक दौर में और शहर की विस्तार के साथ ही धीर धीर इस पानी का उपयोग कम होता गया और अब यह पानी व्यर्थ नालियों में बह रहा है.

झील प्रेमियों की मानें तो स्वरूप सागर झील शहर के पिछोला झील से जुड़ी हुई है. जब इसका जल स्तर 6 फिट के पास पहुंचता है तो जरिया मार्ग स्थित स्वरूप सागर की पाल से तीन स्थानों से एक साथ पानी की निकासी शुरू हो जाती है. यह क्रम हर साल करीब नो से दस महीने तक चलता है और झील का जल स्तर कम होने के साथ ही पानी की निकासी भी बंद हो जाती है. इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुडे लोगों की माने तो अत्धिक मात्रा में हो रही पानी की निकासी चिंता का विषय भी है. कई बार इससे पाल को भी खतरा हो सकता है. इसके लिए जरूरत है कि विशेषज्ञों की टीम द्धारा स्वरूप सागर पाल का निरिक्षण किया जाए और इसके बाद पानी को रोकने की माकूल व्यवस्था भी की जाए.

जरिया मार्ग पर रहने वाले लोग भी पानी की हो रही इस बर्बाद से दुखी है. उनकी मानें तो कई बार स्थानिय निकायों के साथ जल दाय विभाग के अधिकारियों ने मौका मुवायना भी किया लेकिन झील से निकल रहे इस पानी को रोकने के लिए धरातल पर कुछ भी प्रयास नहीं किया गया. हालांकि इस बीच तमाम जिम्मेदार लोग अपना बचाव करते हुए इसके लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है.

बहरहाल लाखों लिटर पानी के बर्बादी को रोकने के प्रति जिम्मेदारों का यह उदासीन रवैया बेहद गंभीर बात है. साथ ही उनकी यह लापरवाई सरकार के बूंद बूंद पानी बचाओं अभियान के प्रति उनकी गंभीरता को प्रकट करने के साथ अभियान धरातल पर कितना प्रभावी हो पा रहा है इसकी भी पोल खोल ही रहा.