राजस्थानः पाकिस्तान से लौटे विस्थापितों को मिली भारतीय नागरिकता तो भर आई आखें

केंद्र सरकार ने देश के 40 जिला कलक्टरों को विस्थापितों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया हुआ है. इनमें जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर के जिले भी सम्मलित है.

राजस्थानः पाकिस्तान से लौटे विस्थापितों को मिली भारतीय नागरिकता तो भर आई आखें
जिन 36 लोगों को भारतीय नागरिकता मिली है उनमें से एक बुजर्ग प्रेमचंद और उनकी पत्नी माया ने पाकिस्तान में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में बताया

दीपक गोयल, जयपुरः पाकिस्तान से भारत लौटे 36 विस्थापितों को गुरुवार को जिला कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन ने भारतीय नागरिता का प्रमाण पत्र सौंपा. जयपुर के अब तक 72 पाक विस्थापित नागरिकों को भारत की नागरिकता दी जा चुकी है. ये लोग करीब 20 साल पहले पाकिस्तान से भारत आए थे. बता दें कि इससे पहले साल 2005 में भी राजस्थान में 5 हजार पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है. 

सरकारों से नागरिकता के लिए लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 20 साल से भटक रहे पाक विस्थापित नागरिकों को जयपुर जिला प्रशासन ने आखिरकार भारतीय नागरिकता प्रदान कर दी है. विस्थापन का दर्द झेल रहे तीन लोगों को भारतीय नागरिकता मिली तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे. जिला प्रशासन ने 36 पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र दिया है.

पाकिस्तान छोड़कर भारत आने वाले माया, लक्ष्मी और प्रेमचंद जैसे 36 पाक विस्थापितों को जब भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उनकी आंखों से खुशी के आंसू झलक रहे थे. उनका कहना था की पाकिस्तान से विस्थापित होकर जो अल्पसंख्यक भारत की शरण लेते हैं, उनमें ज्यादातर सिंधी हिंदू हैं. इन अल्पसंख्यकों को पाकिस्तान में धार्मिक भेदभाव के कारण हिंसक वारदातों का भी सामना करना पड़ रहा है. जिससे वहां इस समुदाय में असुरक्षा का भाव दिनों-दिन बढ़ रहा है.

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से विस्थापित हिंदू भारत में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं. उन्होंने मांग की कि वह पड़ोसी मुल्क से विस्थापित हिंदुओं की भारतीय नागरिकता के लम्बित प्रकरण सरकार जल्द से जल्द निपटाय, .ताकि उन्हें भारत में एक नागरिक के रूप में बुनियादी अधिकार हासिल हो सकें. वे जब भारत आए तो उन्होंने वापस पाकिस्तान जाने का ख्याल भी काफी डरवाना लग रहा था. जिसके बाद वे लगातार भारतीय नागरिता की मांग करते रहे और आखिर में उन्हें भारतीय नागरिता मिल गई. 

भारतीय नागरिकता मिलने के बाद लक्ष्मी का कहना है की मेरे परिवार ने 20 साल से भारतीय नागरिकता पाने के लिए काफी मेहनत की. इस दौरान मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे. मगर बीजेपी सरकार के आते ही भारतीय नगारिकता पाने के लिए जो नियम बने. उसकी वजह से हमें नागरिकता मिल सकी. 'हमारा सब कुछ यहीं पर है. यहां की नागरिकता लेने के लिए जो भी प्रक्रिया थी वह अब जाकर पूरी हुई है.यहां के कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया. जिस वजह से सब काम हो गया.पाकिस्तान के हालात थोड़े खराब हैं. हिंदू अल्पसंख्यकों की मुश्किलें हल करने में एनडीए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.'

हर व्यक्ति जानता है कि पाकिस्तान में गैर मुस्लिम खासकर हिन्दुओं को काफी जिल्लत का सामना करना पड़ता है तथा गुलामी की जिन्दगी जीनी पडती है. अब जिन 36 लोगों को भारतीय नागरिकता मिली है उनमें से एक बुजर्ग प्रेमचंद और उनकी पत्नी माया ने पाकिस्तान में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में बताया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक होने  के कारण हमने बेहद अत्याचार सहे. 'हमारे लिए वहां एक पल भी रहना मुश्किल था. आखिरकार हम भारत आकर बसे. जयपुर अच्छा लगा तो यहीं के होकर रह गए लेकिन यहां भी पुलिस परेशान करती रही पर आज हम बेहद खुश हैं.....हमें नागरिकता के साथ पाकिस्तानी अत्याचारों से भी मुक्ति मिली गई है. .....हमें सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि हम अपने वतन वापस आ गये हैं...भारतमाता की गोद में आ गये हैं. अब हमें न किसी चीज की न कोई चिंता है न कोई डर है.'

दरअसल केंद्र सरकार ने देश के 40 जिला कलक्टरों को विस्थापितों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया हुआ है. इनमें जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर के जिले भी सम्मलित है. इसी पावर का उपयोग करते हुए जयपुर के जिला कलक्टर सिद्धार्थ महाजन ने 36 पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्रदान की है. जयपुर में अब तक 72पाक विस्थापितों को एलटीवी और आईबी की रिपोर्ट आने के बाद भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है.

गौरतलब है कि अकेले राजस्थान में 30 हजार से ज्यादा पाक विस्थापितों ने शरण ले रखी है.कलक्टर सिद्धार्थ महाजन का कहना है की उनके जिले में जो प्रकरण इस तरह के लंबित है.जल्द ही इन प्रकरणों का निस्तारण करके अन्य विस्थापितों को भी नागरिकता दी जाएगी.