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राजस्थान: पानी के संकट से निपटने के लिए दोबारा विकसित किए जाएंगे परम्परागत जल स्त्रोत

राजस्थान में मानसून की दस्तक दे चुका है लेकिन प्रदेश के 95 फीसदी जलस्रोत खाली पड़े है. अगर इन पुराने जल स्त्रोंतों में पानी भर जाए तो जल स्तर बढ़ने के साथ पानी की कमी को भी पूरा किया जा सकता है.

राजस्थान: पानी के संकट से निपटने के लिए दोबारा विकसित किए जाएंगे परम्परागत जल स्त्रोत
राजस्थान में 9 जिले पिछले साल सूखा घोषित हो चुके थे.

दामोदर प्रसाद/जयपुर: जलशक्ति अभियान के जरिये पानी को बचाने की दिशा में काम किया जा रहा है. इस अभियान के तहत परम्परागत जल स्त्रोतों को दोबारा डवलप करके. पानी का लेवल बढ़ाया जाएगा. जयपुर के आमेर में भी पुराने कुएं और बावड़ियां है, जिन्हें फिर से जीवत करने की जरुरत है. इसके लिए सरकार के साथ-साथ हम लोगों भी जागरुक होना होगा.

दुनिया के नक्शे पर आमेर एक चर्चित पर्यटन स्थल है. 3 किलोमीटर के दायरे में फैले आमेर में 12 से ज्यादा बावड़ियां है. जिनका निर्माण उस समय के शासकों ने अपनी जरुरतों के हिसाब कराया था. इन बावड़ियों में पानी भर रहता था, जो जमीन के जल स्तर को कम होने नहीं देता था. लेकिन जैसे-जैसे राजा महाराजों का शासन खत्म हुआ. इन बावड़ियों की दशा भी बिगड़ने लगी. आज ये सूख चुकी है और किसी काम की नहीं है.

राजस्थान में मानसून की दस्तक दे चुका है लेकिन प्रदेश के 95 फीसदी जलस्रोत खाली पड़े है. अगर इन पुराने जल स्त्रोंतों में पानी भर जाए तो जल स्तर बढ़ने के साथ पानी की कमी को भी पूरा किया जा सकता है. लेकिन ये काम किसी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि बावड़ियों पर अतिक्रमण के साथ-साथ. भूमाफियाओं का कब्जा भी है.

देश के सबसे बड़े राज्य. राजस्थान में पानी की कमी और आकाल जैसे हालात पर काबून पाने के लिए. भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने साथ जल स्वावलंबन अभियान पर काम करने की जरुरत है. जिससे बारिश के पानी को एकत्रित किया जा सके.

बता दें कि राजस्थान में 9 जिले पिछले साल सूखा घोषित हो चुके, लेकिन यदि ऐसे ही हालात रहे तो बाकी दूसरे जिलों का भी कुछ ऐसा ही हाल दिखाई देगा. पिछले करीब चार दशक में मरूधरा की आबादी बढ़कर दोगुना हो गई है. लेकिन चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि इस अवधि में धरती से जितना पानी हमने निकाल लिया. उसके अनुपात में भूजल स्तर रिर्चाज तक नहीं हुआ है और भूजल स्तर में तुलनात्मक रूप से लगातार गिरता जा रहा है.

1984 में राजस्थान में कुल 13 हजार 790 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी रीचार्ज हुआ था और जो अब घटकर 11257 मिलियन क्यूबिक मीटर तक रह गया है. उस वक्त पानी का दोहन 4927 मिलियन क्यूबिक हुआ करता था, जो आज बढकर  15706 मिलियन क्यूबिक तक पहुंच गया है. यानि बीते सालो में पानी का दोहन 36 फीसदी से 139 फीसदी तक पहुंच गया है. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि आज पानी नहीं बचाया तो कल का भविष्य भतरे में है.