राजस्थान: पद्मश्री महाराज नारायण दास जी के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब

तबियत में अचानक आई गिरावट के बाद उन्हें शनिवार की सुबह त्रिवेणी धाम में उनके महल में नवनिर्मित आइसीयू में शिफ्ट किया था. लेकिन तमाम कोशिशों के बाद शाम करीब 5 बजे महाराजश्री ने अंतिम सांसें लीं.

राजस्थान: पद्मश्री महाराज नारायण दास जी के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब
नारायण दास जी महाराज का जन्म चिमनपुरा शाहपुरा में गौड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था

दीपक गोयल/जयपुर: पद्मश्री महाराज नारायण दास जी पवित्र स्थान त्रिवेणी धाम पर को शनिवार को ब्रह्मलीन हो गए. 94 साल की उम्र में उनके ब्रह्मलीन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. वहीं उनके निधन के बाद उनके अंतिम दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में लोग त्रिवेणी धाम पहुंच रहे हैं.  वहीं शाहपुरा सहित आसपास के बाजार बंद हो गए हैं. नारायण दास महाराज काफी दिन से बीमार चल रहे थे जिसके कारण वह काफी दिनों से अस्पताल में ही भर्ती थे.

लेकिन उनकी तबीयत दिनों दिन बिगड़ने व सुधार की गुंजाइश नहीं रहने पर शनिवार सुबह उन्हें अस्पताल से त्रिवेणी धाम लाया गया था. जहां उनकी हालत दोपहर तक स्थिर बनी हुई थी लेकिन इसके बाद शाम 4.45 बजे उनका देवलोकगमन हो गया. वहीं उनके निधन का पता चलते ही श्रद्धालु त्रिवेणी धाम पहुंचना शुरू हो गए. खबरों के मुताबिक रविवार की सुबह 3 बजे से सुबह 11 बजे तक महाराज का पार्थिव देह के श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

खबरों के मुताबिक संत शिरोमणि पद्मश्री नारायणदासजी महाराज का अस्पताल में उपचार के बाद स्वास्थ्य में हल्का सुधार हुआ था. लेकिन तबियत में अचानक आई गिरावट के बाद उन्हें शनिवार की सुबह त्रिवेणी धाम में उनके महल में नवनिर्मित आइसीयू में शिफ्ट किया था. लेकिन तमाम कोशिशों के बाद शाम करीब 5 बजे महाराजश्री ने अंतिम सांसें लीं. जिसके बाद अजीतगढ़, शाहपुरा समेत देश-विदेश में श्रृद्वालुओं और भक्तों में शोक की लहर छा गई.

त्रिवेणी धाम के नारायण दास जी महाराज का जन्म चिमनपुरा शाहपुरा में गौड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था इनका जन्म पिता राम दयाल शर्मा और माता भूरी बाई के घर 18 सितम्बर 1927 को हुआ. नारायण दास जी महाराज की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम जसवंतपुरा(बाड़ीजोड़ी) में पंडित साधु राम शर्मा के सानिध्य में हुई थी. उसके बाद त्रिवेणी धाम के महाराज बाबा भगवान दास जी को गुरु बनाकर बाल्यकाल में जगदीश(अजीतगढ़) की पहाड़ियों में कठोर तपस्या की थी.

महाराज श्री को 2004 में उज्जैन महाकुंभ में अखाड़ा के साधु संतों ने खोजीद्वाराचार्य की उपाधि प्रदान की थी. वहीं शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उनका योगदान सराहनीए रहा. लोग शिक्षित और स्वस्थ हों इसलिए प्रदेश में उन्होने कई अस्पताल और कॉलेज खोले. नारायण दास जी महाराज ने 2002 में जयपुर भांकरोटा के मदाऊ ग्राम में करोड़ों की लागत से जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय का विशालकाय भव्य भवन बनाकर सरकार को सौंप दिया था. 

महाराज श्री ने चिमनपुरा ग्राम में बाबा भगवानदास राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना, शाहपुरा में बाबा गंगादास राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना, अजीतगढ़ में बाबा नारायण दास राजकीय चिकित्सालय की स्थापना, कांवट में राजकीय महिला चिकित्सालय की स्थापना शाहपुरा में राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की स्थापना की. जिसमें देशभर के छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. 

बता दें कि महाराज श्री डाकोर धाम गुजरात गद्दी के भी पीठाधीश्वर थे. इसके अलावा महाराज श्री महाकुंभ में भी श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भंडारा लगाते थे. साथ ही उन्होने त्रिवेणी धाम में वेद विद्यालय की स्थापना भी की थी जिसमें ब्राम्हण परिवार के बच्चों को वेद और कर्मकांड की शिक्षा दी जा रही है. इसी तरह जयपुर व आसपास के जिलों में अस्पताल भी संचालित हो रहे हैं.

त्रिवेणी धाम जयपुर दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित शाहपुरा कस्बे से दस किलोमीटर तथा श्रीमाधोपुर से चालीस किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ों की तलहटी में त्रिवेणी के तट पर स्थित है. इसके त्रिवेणी नाम का सम्बन्ध महाभारत काल से बताया जाता है. कहते हैं कि अज्ञात वास के समय पांडव विचरण करते हुए विराटनगर से इस स्थान की तरफ आ गए थे तथा इस स्थान पर शीतल जल की धारा की वजह से उनकी तृष्णा (प्यास) शांत हुई थी. इसलिए इसे तृष्णवेणी के नाम से पुकारा जाता है. वहीं वेणी को पांडव धारा या धाराजी के नाम से भी जाना जाता है.