राजस्थान : पुलवामा में शहीद हुए जवानों की शौर्य गाथाएं जुड़ेंगी पाठ्यपुस्तकों में

राजस्थान शिक्षा विभाग ने इन शहीदों के नाम पर अब प्रदेश के स्कूलों के नाम करने की भी योजना तैयार कर ली है.

राजस्थान : पुलवामा में शहीद हुए जवानों की शौर्य गाथाएं जुड़ेंगी पाठ्यपुस्तकों में

जयपुर: 14 फरवरी को पुलवामा में शहीद हुए राजस्थान के पांच शहीदों की शौर्य गाथाएं अब प्रदेश के विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों में पढ़ सकेंगे और इसको लेकर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के प्रस्ताव के बाद पाठ्यपुस्तक समितियों ने इस प्रस्ताव पर काम करना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने एनसीआरटी को भी इस संबंध में आग्रह किया है कि नए पाठ्यक्रम में शहीदों की शौर्य गाथाओं को जोड़ा जाए जिससे प्रदेश के हर व्यक्ति तक इन वीर योद्धाओं की शौर्य गाथाएं पहुंच सके. साथ ही शिक्षा विभाग ने इन शहीदों के नाम पर अब प्रदेश के स्कूलों के नाम करने की भी योजना तैयार कर ली है और जैसे ही इस संबंध का कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचता है. इस योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा. 

पुलवामा में शहीद हुए प्रदेश के पांच वीर सपूतों की शौर्य गाथाएं अब प्रदेश के हर बच्चे की पुस्तकों में होगी और इसके लिए शिक्षा विभाग ने पूरी तैयारी कल ली है.शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने पाठ्यपुस्तक समितियों के सामने एक प्रस्ताव रखा था और उस पर इन समितियों ने काम करना शुरू कर दिया है.इसके साथ ही शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि इन शहीदों की शौर्य गाथाएं आज हर बच्चे की जुबान पर है.लेकिन यदि इन पाठ्यक्रम में स्थान दिया जाता है तो सदियों तक इन वीर सपूतों को याद किया जाएगा.इसके साथ ही एनसीआरटी को भी इस संबंध में अवगत करवा दिया गया है.

वहीं, दूसरी ओर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के नाम भी इन शहीदों के नाम पर रखने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया गया है. शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि कलेक्टर्स को इस संबंध में आदेश दे दिया गया है साथ ही जिन भी शहीदों के परिवारों से इस प्रकार का कोई प्रस्ताव आता है साथ ही इन शहीदों को शहीद का प्रमाण पत्र मिलता है जिसके बाद तुरंत ही स्कूलों या फिर अन्य स्मारक का नाम इन शहीदों के नाम पर किये जाने का काम शुरू किया जाएगा.

दूसरी ओर पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं पर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पिछली सरकार ने पाठ्यपुस्तकों में अपने हिसाब से परिवर्तन कर दिया. उनके हिसाब से कांग्रेस के किसी भी नेता का योगदान देश के लिए नहीं रहा. साथ ही महाराणा प्रताप को लेकर भी बच्चों को गुमराह किया जा रहा है. एक जगह बताया जा रहा है कि उन्होंने जीत हासिल की तो वहीं दूसरी पुस्तक में बताया जा रहा है की हल्दीघाटी का युद्ध का निर्णय नहीं हो पाया. ऐसे में बच्चे क्या सीखेंगे? इसलिए पाठ्यपुस्तकों को लेकर समीक्षा कमेटी मंथन कर रही है और अगर जरुरत पड़ी तो पाठ्यपुस्तकों में बदलाव किया जाएगा.

बहरहाल, शिक्षा विभाग में पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा काम चल रहा है तो वहीं दूसरी ओर अब इन पुस्तकों में शहीदों के पाठ को जोड़ने को लेकर भी संभावनाएं तलाशना इन समितियों ने शुरू कर दिया. ऐसे में शिक्षा मंत्री की माने तो नए सत्र से पुस्तकों में प्रदेश के विद्यार्थी इन शहीदों की गाथाएं पाठ्यपुस्तकों में पढ़ेंगे.