राजस्थान यूनिवर्सिटी बनी छात्रों का धरना स्थल, RAS से लेकर LDC के अभ्यर्थी कर रहे प्रदर्शन

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कई दिनों से यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर धरने दिए जा रहे हैं. विश्वविद्यालय में कोई एक या दो संगठनों के नहीं बल्कि चार संगठनों के धरने लगातार जारी हैं. 

राजस्थान यूनिवर्सिटी बनी छात्रों का धरना स्थल, RAS से लेकर LDC के अभ्यर्थी कर रहे प्रदर्शन
विश्वविद्यालय में चार संगठनों के धरने लगातार जारी हैं.

जयपुर/ ललित कुमार: राजस्थान का सबसे बड़ा शिक्षा का मंदिर यानी राजस्थान यूनिवर्सिटी इस समय अपनी शिक्षा के लिए नहीं बल्कि धरना स्थली के लिए पहचानी जा रही है. बीते कुछ दिनों से राजस्थान विश्व विद्यालय में नियुक्ति की मांग को लेकर करीब आधा दर्जन धरने चल रहे हैं. 16 दिनों से जहां आरएएस 2016 के चयनित अभ्यर्थी धरना दे रहे थे तो अब इसी कड़ी में पंचायत राज एलडीसी भर्ती, तृतीय श्रेणी शिक्षक 2012 और 2013 भर्ती सहित अन्य संगठन भी नियुक्ति की मांग को लेकर धरने पर उतर चुके हैं. हालांकि, राजस्थान विश्व विद्यालय प्रशासन ने पुलिस को तीन बार पत्र लिखकर इन अभ्यर्थियों को हटाने की मांग की है लेकिन अभी तक पुलिस प्रशासन की ओर से इनको हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है. वहीं धरने पर बैठे ये अभ्यर्थी भी किसी भी हालात में यहां से हटते हुए नजर नहीं आ रहे हैं.

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कई दिनों से यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर धरने दिए जा रहे हैं. विश्वविद्यालय में कोई एक या दो संगठनों के नहीं बल्कि चार संगठनों के धरने लगातार जारी हैं. आरएएस 2016 भर्ती के अभ्यर्थी विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अपना धरना दे रहे हैं और अब अनशन पर भी हैं. आरएएस 2016 के साथ ही एक फरवरी से इस धरने पर एलडीसी भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थी, एसएसआर 2013 के अभ्यर्थी भर्तियों को पूरी करने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं. तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 और 2013 के अधिकतम अंको की भर्ती के अभ्यर्थी भी यहां अपनी मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं. 

हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ मजबूर भी है जिसकी वजह यह है कि इन छात्रों में से ज्यादातर यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रखने वाले हैं या फिर कुछ पूर्व विद्यार्थी भी शामिल हैं. ऐसे में वे उन्हें जबरन शक्ति के साथ हटाना नहीं चाहते लेकिन बार-बार अनुरोध करने के बाद भी अभ्यर्थी यहां से हटना नहीं चाहते क्योंकि अभ्यर्थियों को यह लगता है कि इसी जगह से उनकी आवाज सरकार तक पहुंचेगी. विश्वविद्यालय प्रशासन अभ्यर्थियों से कई बार समझाइश भी कर चुका है साथ ही उन्हें जगह खाली करने का अल्टीमेटम भी दिया जा चुका है लेकिन परीक्षाओं के दौर में विश्वविद्यालय में चल रहे आंदोलन विद्यार्थियों के लिए नुकसानदाय भी हो सकते हैं. ऐसे में विश्वविद्यालय इन्हें आने वाले दिनों में शक्ति से भी हटाने पर उतारू हो सकता है.