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सिरोही में CMHO का पद 1 पर अधिकारी दो, कुछ ऐसा है इस कुर्सी का किस्सा!

कार्यालय के बाहर सीएमएचओ की नेम प्लेट डॉ. राजेश के नाम की लगी हुई है लेकिन कुर्सी के लिए यहां दोनों में ही मनमुटाव शुरू हो गया है. 

सिरोही में CMHO का पद 1 पर अधिकारी दो, कुछ ऐसा है इस कुर्सी का किस्सा!
प्रतीकात्मक तस्वीर

सिरोही: राजस्थान के सिरोही में सीएमएचओ के एक पद को लेकर दो अधिकारी अपना हक जमा रहे हैं. डॉ. राजेश कुमार सरकारी आदेशों के तहत अपने आप को सीएमएचओ बता रहे हैं. वहीं डॉ. दिनेश शर्मा स्टे ऑर्डर के आधार पर अपने आप को सीएमएचओ बता रहे हैं. अब ऐसे में दोनों ने निदेशालय को पत्र लिख कर यह जवाब मांगा है कि किसे सीएमएचओ पद पर बने रहना चाहिए. दरअसल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से 7 मार्च को आदेश जारी कर रेवदर बीसीएमओ राजेश कुमार को सिरोही सीएमएचओ पद पर लगाया था. वहीं डॉ. दिनेश शर्मा का स्थानानंतरण सीएमएचओ सिरोही से अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर हो गया था लेकिन 1 महीने बाद ही डॉ. शर्मा इन आदेशों पर स्टे लेकर आ गए और 10 अप्रैल को सिरोही सीएमएचओ के पद पर ज्वाइन भी कर लिया. 

इसके बाद से पिछले तीन दिनों से डॉ. दिनेश शर्मा सीएमएचओ की कुर्सी पर आकर बैठ रहे हैं. डॉ. शर्मा का कहना है कि उन्होंने स्टे ऑर्डर के आधार पर फिर से सीएमएचओ के पद पर ज्वाइन किया है. इससे संबंधित सूचनाएं निदेशालय को भिजवा दी हैं. जबकि डॉ. राजेश का कहना है कि ऐसी स्थिति में उन्हें पहले निदेशालय में उपस्थिति देनी थी और इसके बाद यहां ज्वाइन करना था, जबकि नियमों के विरूद्ध जाकर उन्होंने यह पदभार संभाला है. हालांकि, अभी तक निदेशालय से भी इस मामले को लेकर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कौन सीएमएचओ रहेगा लेकिन अभी दोनों ही सीएमएचओ का पद संभाले हुए है.

कार्यालय के बाहर सीएमएचओ की नेम प्लेट डॉ. राजेश के नाम की लगी हुई है लेकिन कुर्सी के लिए यहां दोनों में ही मनमुटाव शुरू हो गया है. यहां तक कि 10 अप्रैल को ज्वाइन करने के बाद डॉ. दिनेश शर्मा ने स्टे ऑर्डर का हवाला देते हुए अपनी कार्यग्रहण रिपोर्ट निदेशालय को भी भेज दी और साथ ही यह भी निर्देश दिए कि विभाग संबंधी सारे गोपनीय दस्तावेज व आदेश उन्हें भेजे जाएं. हालांकि, निदेशालय के अधिकारियों का यह कहना है कि उन्हें भी अभी तक स्टे ऑर्डर नहीं मिले हैं, वो सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट किया जाएगा कि सिरोही का सीएमएचओ कौन होगा.

डॉ. राजेश का कहना है कि निदेशालय की ओर से 30 दिसंबर 2018 को जारी किए गए आदेशों में साफ है कि स्थगन आदेश के बाद बिना विभागाध्यक्ष की अनुमति के संबंधित अधिकारी कार्यग्रहण कर लेते हैं तो वह नियम विरूद्ध होता है. ऐसी स्थिति में उन्हें निदेशालय में पहले ज्वाइनिंग देनी थी और बाद में यहां वे ज्वाइन करते लेकिन वह अपनी मर्जी से ही यहां आ गए. इन्हीं आदेशों का हवाला देते हुए मैंने निदेशालय को पत्र लिख मार्गदर्शना मांगा है. वैसे भी डॉ. शर्मा कौन होते हैं जो मेरे लिए मार्गदर्शन मागेंगे. मुझे सरकार ने यहां भेजा है, मेरे पास उनके आदेश हैं.

सीएमएचओ में दो-दो अधिकारियों को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है. यहां तक कि कर्मचारी भी संशय की स्थिति में है कि किसके आदेश माने और किसके नहीं. यहां तक कि कुर्सी पर बैठने के लिए भी दोनों डॉक्टर एक-दूसरे से पहले पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. यानि जो पहले पहुंचेगा वह कुर्सी पर बैठेगा और जो देरी से आएगा उसे कुर्सी नहीं मिलेगी.