विश्व पटल पर आदिवासियों की पहचान बनीं 'ग्यारसी बाई' का निधन

 सिविल सोसायटी की ओर से ग्यारसी बाई को स्त्री शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया था.

विश्व पटल पर आदिवासियों की पहचान बनीं 'ग्यारसी बाई' का निधन
आमिर खान ने 'सत्यमेव जयते' में किया था सम्मान

बारां: सिविल सोसाइटी की ओर से शक्ति पुरस्कार प्राप्त व बारां जिले को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली सहरिया समाज की शख्सियत एवं जाग्रत महिला संगठन व संकल्प संस्था की वरिष्ठ कार्यकर्ता ग्यारसी बाई सहरिया 59 बर्षीय का शुक्रवार आकस्मिक निधन हो गया. ग्यारसी बाई को भंवरगढ़ स्थित संस्था परिसर में उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा. इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. जिसके बाद उनका भंवरगढ गांव में अंतिम संस्कार किया गया.  

बंधुआ मजदूरी, सूचना का अधिकार, मनरेगा व महिला हिंसा से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वाली ग्यारसीबाई जिले के आदिवासी अंचल में सहरिया महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती थीं. उन्हें कई मौकों पर सम्मानित किया जा चुका है. 

अमेरिका में भी किया था नाम
बता दें कि ऑल ऑफ द फेम, सिविल सोसायटी की ओर से ग्यारसी बाई को स्त्री शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया था. ग्यारसी बाई टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम सत्यमेव जयते में भी शामिल हुई जहां सिने अभिनेता आमिर खान ने उनकी जिंदगी से प्रभावित होते हुए उनका सम्मान किया. इसके अलावा अमेरिका की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने भी ग्यारसी बाई पर एक फिल्म का निर्माण किया था जिसे ऑक्सफोर्ड के विद्यार्थियों को दिखाया जा चुका है. 

पूरा जीवन समाज के नाम
एक छोटे से गांव फल्दी की निवासी ग्यारसी बाई 1992 से आदिवासी अंचल में सहरिया व अन्य पिछड़े वर्ग के लिए काम कर रही थीं. अभावों से जूझने के बावजूद वे पीछे नहीं हटीं. उनके काम को देखते हुए राज्य स्तर पर कई बार उन्हें सम्मानित भी किया गया. यहां तक की मनरेगा, सूचना का अधिकार, बंधुआ मजदूरी, महिला हिंसा जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई. गरीबों के हक और अधिकारों के लिए भी ग्यारसी बाई ने खूब रैलियों, प्रदर्शनों में हिस्सा लिया. साक्षरता के नाम पर केवल अपना नाम लिखना जानने वाली ग्यारसी बाई पिछले काफी समय से कम्प्यूटर पर हाथ चलाना जानने लगी थी. उनकी प्रेरणा से कई अन्य बालिकाएं कम्प्यूटर ज्ञान पाने के लिए आगे आईं.