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फौजी की बहन को है भाई का इंतजार, ड्यूटी से घर लौटते वक्त हुआ था लापता

धीरज जब 13 जुलाई के बाद अपनी यूनिट पर नही पहुंचा तो फिर सेना ने उसके घर पर फ़ोन किया उसके बाद ही घरवालों को मालूम चला. अब सेना ने भी एक पत्र भेजकर धीरज के गायब होने की जानकारी टिहरी और सिलीगुड़ी प्रशासन को भेज दी है.

फौजी की बहन को है भाई का इंतजार, ड्यूटी से घर लौटते वक्त हुआ था लापता

देहरादूनः 15 अगस्त को देश आजादी का जश्न मना रहा होगा.बहनें उस दिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांध रही होंगी लेकिन उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के धौलागिरी गांव निवासी सेना का जवान रहस्यमय तरीके से लापता हो गया.एक बहन को अपने भाई का इंतजार है.परिवार ने पुलिस से लेकर सीएम दरबार तक बेटे को खोजने की गुहार लगाई है लेकिन कोई सुराग नही लगा. सेना का जवान राइफलमैन धीरज रावत 45 दिनों से है गायब

धीरज रावत टिहरी गढ़वाल के धौलागिरी गांव का मूल निवासी है जो पिछले वर्ष ही फौज में भर्ती हुआ था. भर्ती होने के बाद धीरज की पलटन नवीं गढ़वाल राइफल अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच सिलीगुड़ी में तैनात था. धीरज 23 जून से 13 जुलाई तक कि 20 दिन की छुट्टी लेकर अपने गांव के लिए निकला लेकिन ना तो धीरज घर लौटा और ना ही छुट्टी के बाद वापस अपनी यूनिट में गया. धीरज के रहस्यमय तरीके से गायब होने के बाद उसके परिजनों की चिंताए बढ़ती जा रही.बहन को बस इस इंतजार है कि भाई 15 अगस्त को घर लौट आए.

कृष्णा धीरज की सबसे छोटी बहन है और 12वीं में पढ़ती है उससे बड़ी बहन सपना की शादी हो चुकी है जो देहरादून के पास थानों में रहती है. नम आखों से कृष्णा बताती है कि पिछले साल रक्षा बंधन के त्यौहार पर अपने भाई की कलाई पर राखी बांधी थी.पिता ने टिहरी जिले के चम्बा थामे में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की.डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार से भी फरियाद की लेकिन कोई फायदा नही हुआ.परिजन मुख्यमंत्री से भी मिलने गए लेकिन वहाँ तो ठीक से मुलाकात ही नही हुई.

धीरज ही एकलौता है जो कमाता है
धीरज ही एक मात्र था जो परिवार में कमाता था खेती बाड़ी से किसी तरह गुजारा चलता है.एक छोटा सा मकान है.धीरज के पिता ने टिहरी पुलिस से लेकर मुख्यमंत्री तक अपने बेटे को खोजने की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नही हुई. धीरज के पिता रमेश सिंह और 45 वर्षीय मां सावित्री देवी का रो रो कर बुरा हाल है. मां कह रही है कि बेटे के लिए सिल्ला गाँव में लड़की भी ढूंढ ली थी लेकिन क्या फायदा जब बेटा ही लापता हो गया. 50 वर्षीय रमेश सिंह रोते हुए बस यही कह रहे है कि बेटा घर वापस आ जाए.अभी फौज में भर्ती हुए एक साल ही हुए थे. इस समय घर में सन्नाटा पसरा है. इस उम्र में परिवार की स्थिति ने उन्हें तोड़ दिया है.

पुलिस और सेना की खुफिया एजेंसियां जांच में जुट गई है
धीरज के चाचा राजेन्द्र सिंह कहते है कि धीरज सिंह होनहार लड़का है.इस साल फरबरी में छुट्टी भी आया था. धीरज अपनी बहन की शादी में आया था लेकिन अब किसी को कुछ भी मालूम नही है.सेना से धीरज के घर एक पत्र भेजा है जिसमे लिखा है कि 22 जून को धीरज ने डिब्रूगढ़ से नई दिल्ली में का टिकट राजधानी एक्सप्रेस में बुक किया था और फिर 11 जुलाई का वापसी का भी टिकट कराया है.इसके साथ ही धीरज ने सिलीगुड़ी में एटीएम से पैसे निकाले है.घरवालों को अभी भी उम्मीद है कि धीरज जिंदा है और कही मौजूद है लेकिन वो घर क्यों नही आया और अपनी यूनिट में क्यों नही पहुँचा इसका जवाब किसी के पास नही.घर में धीरज से कोई लड़ाई नही हुई बल्कि सभी धीरज  का इंतजार कर रहे है.

छोटा भाई भी फौज में शामिल भर्ती होना चाहता है
धीरज जब 13 जुलाई के बाद अपनी यूनिट पर नही पहुंचा तो फिर सेना ने उसके घर पर फ़ोन किया उसके बाद ही घरवालों को मालूम चला.अब सेना ने भी एक पत्र भेजकर धीरज के गायब होने की जानकारी टिहरी और सिलीगुड़ी प्रशासन को भेज दी है. छोटा भाई राहुल अभी 10वीं कक्षा में पढ़ता है.राहुल ने कहा कि बड़ा भाई उससे हमेशा कहता रहता था कि पढ़ाई करो फिर फौज में भर्ती की तैयारी करना.राहुल ने कहा कि वो भी फौज में भर्ती होना चाहता है.