Deoria Murder Case: देवरिया में जिस जमीन को लेकर फतेहपुर गांव के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव समेत 6 लोगों की सामूहिक हत्या का मामला अभी भी सुर्खियों में है. उसी जमीन के खारिज दाखिल के वाद में भाटपाररानी के तहसीलदार ने वादी और आपत्तिकर्ता की मौत के बाद फैसला सुनाकर फिर चर्चाओं का माहौल गरम हो गया है. रुद्रपुर के फतेहपुर कांड के बाद तहसीलदार भाटपाररानी कोर्ट ने खारिज दाखिल के मामले का निस्तारण कर दिया है.  


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मृतक प्रेमचंद यादव के पक्ष में फैसला
जिस विवादित भूमि को लेकर हत्याकांड हुआ उस जमीन के मुकदमे में तहसीलदार कोर्ट ने वादी और आपत्तिकर्ता समेत 6 लोगों की हत्या के बाद अपना फैसला सुना दिया. साल 2014 में दाखिल हुए मुकदमे में भाटपार रानी के तहसीलदार ने मृतक प्रेमचंद यादव के पक्ष में फैसला देते हुए विवादित जमीन को उनके वारिसों का नाम दर्ज करने का निर्देश दिया है. 


सत्यप्रकाश दुबे की आपत्ति को किया तहसीलदार भाटपाररानी ने निस्तारित
इस हत्याकांड में पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे के साथ जान गंवाने वाले सत्यप्रकाश दुबे की आपत्ति को तहसीलदार भाटपाररानी ने निस्तारित कर दिया है. बैनामा करने वाले सत्यप्रकाश दुबे के भाई ज्ञानप्रकाश दुबे का नाम निरस्त कर प्रेमचंद और उसके भाई रामजी यादव का नाम खतौनी पर दर्ज हो गया है. 


ये रहा पूरा  मामला
ज्ञानचंद दुबे ने पांच जुलाई 2014 को भाटपाररानी तहसील इलाके के केहुनिया गांव में अपने हिस्से की पूरी जमाीन को प्रेमचंद और रामजी यादव के नाम बैनामा कर दिया था. सत्यप्रकाश दुबे ने  इस मामले में आपत्ति जताई थी.  उसी समय से खारिज दाखिल का मामला लटका हुआ था.  फतेहपुर में सामूहिक नरसंहार के बाद तहसीलदार कोर्ट ने इसका संज्ञान लिया. कोर्ट ने  सुनवाई करते हुए 13 अक्टूबर को मामले का निस्तारण कर दिया. 


वारिसों का नामांतरण करने का निर्देश 
भाटपाररानी के तहसीलदार चंद्रशेखर वर्मा ने 13 अक्तूबर को अपने आदेश में मृतक प्रेमचंद यादव के पक्ष में फैसला देते हुए राजस्व निरीक्षक को उनके वारिसों का नामांतरण करने का निर्देश दिया है.  तहसीलदार कोर्ट में प्रेमचंद यादव और रामजी यादव ने 5 जुलाई 2014 को एक नामांतरण वाद दाखिल किया था. प्रेमचंद, रामजी बनाम ज्ञानप्रकाश दुबे के खारिज दाखिल के वाद में केहुनिया गांव के मूल निवासी सत्यप्रकाश दुबे ने आपत्ति दाखिल की. इस आपत्ति में सत्यप्रकाश ने बताया था कि ज्ञानप्रकाश उनके सगे भाई हैं, जिनकी मानसिक स्थिति कमजोर हैं. प्रेम प्रकाश और उनके भाई ने उन्हें बहला फुसला कर रुद्रपुर और भाटपाररानी तहसील स्थित पैतृक जमीनों का बिना रुपये दिए बैनामा करा लिया. उन्होंने जमीन के बैनामा दस्तावेज में सत्यप्रकाश के हिस्से की जमींन भी लिखवा ली है.  सत्यप्रकाश की आपत्ति पर 9 साल से सुनवाई चल रही थी.  इसी सुनवाई के बीच 2 अक्तूबर को सामूहिक हत्याकांड में प्रेमचंद यादव और आपत्तिकर्ता सत्यप्रकाश दुबे की हत्या हो गई.


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