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लोकसभा चुनाव 2019: मेलों की नगरी गढ़वाल में इस बार किस पार्टी का लगेगा मेला ! 23 को लगेगा पता

उत्तराखंड की राजनीति की केन्द्र बिंदु गढ़वाल ही है. पौड़ी गढ़वाल के नाम से मशहूर गढ़वाल सीट हर अक्सर कांग्रेस और बीजेपी का ही कब्जा रहा है. 

लोकसभा चुनाव 2019: मेलों की नगरी गढ़वाल में इस बार किस पार्टी का लगेगा मेला ! 23 को लगेगा पता
1957 के बाद गढ़वाल लोकसभा सीट अस्त्तिव में आई थी और इसके अन्तर्गत पांच जिले आते हैं

नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण में उत्तराखंड की गढ़वाल लोकसभा सीट पर मतदान हुआ. अब 23 मई को इस बात का फैसला होगा कि गढ़वाल में किस राजनीतिक पार्टी का सूर्योदय होगा. उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल सीट का एक प्रमुख स्थान है और ऐसा माना जाता है कि उत्तराखंड की राजनीति की केन्द्र बिंदु गढ़वाल ही है. पौड़ी गढ़वाल के नाम से मशहूर गढ़वाल सीट हर अक्सर कांग्रेस और बीजेपी का ही कब्जा रहा है. भाजपा ने इस बार बीसी खंडूरी की जगह यहां से तीरथ सिंह रावत को मैदान में उतारा है जिनका सामना कांग्रेस के मनीष खंडूरी से होगा.

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1957 के बाद गढ़वाल लोकसभा सीट अस्त्तिव में आई थी और इसके अन्तर्गत पांच जिले आते हैं जिनमें चमोली, पौड़ी गढंवाल, रुद्र प्रयाग, नैनीतार का कुछ हिस्सा और टिहरी गढ़वाल हैं. 2014 में भाजपा ने इस सीट से भुवन चंद्र खंडूरी को अपना उम्मीदवार बनाया था और खंडूरी ने चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस के प्रत्याशी हरक सिंह रावत को  हराया था. इन चुनावों में खंडूरी को 405690 वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में गढ़वाल में कुल 56.62 फीसदी मतदान हुआ था. बीसी खंडूरी गढ़वाल में भाजपा के लिए एक पुराना चेहरा है अब देखना होगा कि क्या यहां कि जनता तीरथ सिंह रावत का भी उतना साथ देती है या नहीं. 

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2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 12, 69, 083 मतदाता थे. पिछले आम चुनाव में यहां पुरुष मतदाताओं की संख्या 6 लाख 52 हजार 891 थी, जबकि महिला वोटर्स का आंकड़ा 6 लाख 16 हजार 192 था. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2017 के विधान सभा चुनाव में में  यहां मतदाताओं की संख्या बढ़कर लगभग 14 लाख हो गई थी. गढ़वाल लोकसभा सीट के अंतर्गत कुल 14 विधान सभा सीट आती है. गढ़वाल क्षेत्र में कुल आबादी के18.76 प्रतिशत लोग अनुसूचित जाति जबकि 1.13 लोग अनुसूचित जनजाति के हैं.