अब UP में दुकान-मकान या जमीन का स्टांप पता करना हुआ आसान, ऐसे ले सकते हैं जानकारी
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अब UP में दुकान-मकान या जमीन का स्टांप पता करना हुआ आसान, ऐसे ले सकते हैं जानकारी

स्टांप मंत्री ने बताया कि अभी तक जो व्यवस्था चल रही थी उसमें कोई व्यक्ति भूमि, भवन खरीदना चाहता था तो उस भू-सम्पत्ति का मूल्य कितना है इस पर संशय बना रहता है.

फाइल फोटो

लखनऊ: यूपी में अब जमीन, मकान, फ्लैट, दुकान आदि भू-सम्पत्तियों की कीमत और ऐसी सम्पत्ति की खरीद फरोख्त में रजिस्ट्री करवाने के लिए लगने वाले स्टांप शुल्क को जिलाधिकारी तय करवाएंगे. सोमवार को कैबिनेट में स्टांप और रजिस्ट्री विभाग की ओर से लाए गए प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई. इस प्रस्ताव की स्वीकृति मिलने के बाद रेट को लेकर संशय होने के बाद खरीदार अपने जिले के डीएम को प्रार्थना पत्र लिखकर निर्धारित शुल्क की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. 

100 रुपये करना होगा जमा 
अगर आप उत्तर प्रदेश के किसी जिले में जमीन, मकान, फ्लैट, दुकान खरीदना चाहते हैं और आपको लगता है कि स्टाम्प शुल्क अधिक है तो आप ट्रेजरी चालान के माध्यम से कोषागार में 100 रुपये का शुल्क जमा करके उचित रेट की जानकारी ले सकते हैं. इस शुल्क के जमा करने के बाद जिलाधिकारी लेखपाल से उस भू-सम्पत्ति की डीएम सर्किल रेट के हिसाब से मौजूदा कीमत का मूल्यांकन करवाएंगे. उसके बाद उस सम्पत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क का भी लिखित निर्धारण होगा. 

हालांकि ये वैकल्पिक है और यह व्यक्ति के खुद की इच्छा पर है. ऐसी व्यवस्था प्रॉपर्टी के मुकदमों को कम करने के लिए किया गया है. क्योंकि प्रॉपर्टी के दर से जुड़े कई मुकदमे आते हैं जो सालों तक चलते हैं.

स्टाम्प शुल्क को लेकर नहीं होंगे विवाद: रवीन्द्र जायसवाल
प्रदेश के स्टाम्प व रजिस्ट्री मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि कैबिनेट के इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद अब प्रदेश में भू-संपतियों की कीमत तय करने और रजिस्ट्री करवाते समय उस पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क को तय करने में विवाद नहीं होंगे और इस मुद्दे पर होने वाले मुकदमों की संख्या घटेगी.

नहीं होगा संशय 
स्टांप मंत्री ने बताया कि अभी तक जो व्यवस्था चल रही थी उसमें कोई व्यक्ति भूमि, भवन खरीदना चाहता था तो उस भू-सम्पत्ति का मूल्य कितना है इस पर संशय बना रहता है और खरीददार प्रापर्टी डीलर, रजिस्ट्री करवाने वाले वकील, रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी से सम्पर्क करता था और उसमें मौखिक तौर पर उस भवन या भूमि की कीमत तय हो जाती थी, उसी आधार पर उसकी रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क लगता था.

ऐसे मुकदमों पर लगेगा अंकुश 
बाद में विवाद की स्थिति पैदा होती थी कि उक्त भू-संपत्ति की कीमत इतनी नहीं बल्कि इतनी होनी चाहिए थी, इस लिहाज से इसकी रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क कम वसूला गया. प्रदेश के स्टाम्प व रजिस्ट्री विभाग में ऐसे मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही थी जिस पर अब अंकुश लगेगा.

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