बांदा : 15 वर्षों से कुएं पर रह रही है महिला, Aadhar में भी है पता 'कुआं वाला घर'

कुएं पर रहने की वजह से गांव के लोग महिला को 'कबूतरी' के नाम से पुकारने लगे हैं.

बांदा : 15 वर्षों से कुएं पर रह रही है महिला, Aadhar में भी है पता 'कुआं वाला घर'
महिला अपनी बेटी के साथ पिछले 15 सालों से कुआं पर रह रही है (फोटो-ANI)

लखनऊ : भले ही हम 21वीं सदी में रहकर न्यू इंडिया बनाने जा रहे हों, सूचना तकनीक में हम क्रांति कर रहे हैं, लेकिन एक तस्वीर यह भी है कि आज भी कितने ही लोगों खुले में रहने को मजबूर हैं. एक ऐसी ही तस्वीर यूपी के बांदा जिले में देखने को मिली है. यहां एक महिला पिछले 15 सालों से एक कुएं पर अपना आशियाना बना कर रह रही है. खासबात यह है कि उसके आधार कार्ड और राशन कार्ड में भी घर का पता कुआं वाला घर ही लिखा हुआ है. कुएं पर रहने के कारण लोग उसे कबूतरी कहकर बुलाते हैं. कुएं पर ही पलकर आज उसकी बेटी 15 साल की हो गई है.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अभी हाल में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत गरीबों को घर देने में देश में खुद को 'नंबर वन' बताया है. लेकिन, बांदा जिले की नरैनी तहसील क्षेत्र के नसेनी गांव में पिछले 15 साल से 'कुएं' को आशियाना बनाकर अपनी बेटी के साथ रह रही विधवा दलित महिला छोटी (50) सरकार के इस कथन की पोल खोल रही है. कुएं पर रहने की वजह से गांव के लोग उसे 'कबूतरी' के नाम से पुकारने लगे हैं. 

पति की मौत बाद घर से निकाला
मूलरूप से मध्य प्रदेश के अजयगढ़ के पांड़ेपुरवा की रहने वाली दलित महिला छोटी के पति की मौत के बाद उसके ससुरालवालों ने उसे घर से निकाल दिया था. उसने अपनी छह माह की बेटी के साथ नरैनी तहसील के नसेनी गांव में शरण ली और एक कुएं को घर मानकर रहने लगी. उसकी बेटी रोशनी अब 15 साल की हो गई है. उसकी बेटी रोशनी पढ़ाई भी कर रही है, उसकी किताबें और बस्ता भी कुआं वाले घर में रखे हुए हैं. इसी में घर-गृहस्थी का पूरा सामान भी है. यह महिला दो वक्त की रोटी का इंतजाम मेहनत-मजदूरी से करती है.

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आधार में भी है पता
महिला को सरकार से राशन कार्ड और आधार कार्ड भी मिला है. इन पहचान पत्रों में भी उसका पता 'कुआं वाला घर' लिखा हुआ है. बेटी के स्कूल में भी कुआं वाला घर का पता लिखा हुआ है. 

क्रबिस्तान की बगल में मिला जमीन का पट्टा
दलित महिला छोटी बताती है कि उसे कुछ साल पहले आवासीय भूखंड का पट्टा दिया गया था, लेकिन यह भूखंड कब्रिस्तान के बिल्कुल बगल में होने की वजह से वह वहां घर नहीं बना सकी. ग्राम प्रधान से लेकर अधिकारियों की चौखट पर कई बार माथा टेक चुकी छोटी की किसी ने नहीं सुनी, और अब यह कुआं ही उसका आशियाना बन गया है. 

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ग्राम प्रधान जमील अंटा ने बताया कि पंचायत की तरफ से महिला को आवासीय भूखंड आवंटित किया गया था, लेकिन कब्रिस्तान के पास होने की वजह से उसने लेने से मना कर दिया. प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत लाभान्वित करने का प्रस्ताव अधिकारियों को भेजा गया है, लेकिन अब तक धनराशि नहीं दी गई है.

जागा प्रशासन, दिया आश्वासन
जिलाधिकारी दिव्य प्रकाश गिरि ने कहा कि इसके पहले इस महिला के बारे हमें कोई सूचना नहीं थी. शुक्र है कि माडिया ने उसके हालात से रूबरू कराया. जिलाधिकारी ने कहा कि एक टीम भेज कर जांच कराएंगे और महिला को आवासीय भूखंड और सरकारी धन से घर बनवाने की कार्रवाई की जाएगी.