मदरसों में भारतीयता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

मदरसों में भारतीयता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भगवान राम और 'गो माता' हिंदू संस्‍कृति का आधार हैं.

  • भागवत ने कहा कि मूल स्‍थान पर ही बनेगा राम मंदिर
  • इससे पूरे विश्‍व में हिंदुत्‍व की पहचान स्‍थापित हो जाएगी
  • मुस्लिमों को समझना चाहिए कि हमारे पूर्वज एक हैं

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मदरसों में भारतीयता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

देहरादून: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भगवान राम और 'गो माता' हिंदू संस्‍कृति का आधार हैं. इसके साथ ही कहा कि हर भारतीय को यह समझना चाहिए कि अयोध्‍या में राम मंदिर का निर्माण मूल स्‍थान पर ही होना चाहिए. उन्‍होंने कहा, ''हम राम के प्रति श्रद्धा रखते हैं. गो माता और राम हिंदू संस्‍कृति का आधार हैं. हर भारतीय को यह समझना चाहिए कि अयोध्‍या में राम मंदिर का निर्माण मूल स्‍थान पर ही होगा. यदि ऐसा होता है तो हिंदुत्‍व की पहचान पूरे विश्‍व में स्‍थापित हो जाएगी.''

यहां पर अपने चार दिवसीय प्रवास के दौरान रिटायर्ड अधिकारियों से बुधवार को संवाद के दौरान आरएसएस प्रमुख ने ये बात कही. इस दौरान मदरसों के बारे में उन्‍होंने कहा, ''मदरसों में भारतीयता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए जोकि धर्मों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता और शांति की बात कहता है.''

इसके साथ ही उन्‍होंने कहा, ''मुस्लिम अपनी उपासना पद्धति को अपनाने के लिए स्‍वतंत्र हैं लेकिन उनको यह समझना चाहिए कि हम एक ही देश और संस्‍कृति से ताल्‍लुक रखते हैं और हमारे पूर्वज एक ही हैं.'' आरएसएस प्रमुख ने कहा कि केवल ये सामूहिक सोच ही सशक्‍त समाज और देश के निर्माण का मार्ग प्रशस्‍त कर सकती है.

उन्‍होंने दावा करते हुए कहा कि भारतीय आबादी और यहां तक कि अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान के पूर्वज एक ही हैं. वे एक ही संस्‍कृति से संबंधित हैं.  उन्‍होंने उदाहरण देते हुए कहा, ''इस्‍लाम में संगीत वर्जित है लेकिन अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान में कव्‍वाली गाई जाती है. इस्‍लाम में मूर्ति पूजा का निषेध है लेकिन इन मुल्‍कों के लोग जब इबादतगाह में प्रार्थना करने आते हैं तो ये इसके विपरीत दिखता है...ये दर्शाता है कि हम सब संस्‍कृति से हिंदू हैं. गौतम बुद्ध, गुरु नानक और महावीर अलग-अलग भाषाओं में भले ही बोलते हों लेकिन वे सभी हिंदू समाज के ही अंग हैं.''

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उत्‍तराखंड में 4 दिन का है प्रवास
दिल्ली से सोमवार रात यहां पहुंचे भागवत आठ फरवरी तक देहरादून में रहेंगे. इस दौरान वह समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों के अलावा संघ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से बातचीत करेंगे. संघ के सूत्रों ने बताया कि अपने प्रवास के दौरान वह बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, लोक कलाकारों तथा अन्य विशिष्टजनों से वार्ता करेंगे. उन्होंने बताया कि इस दौरान भागवत संघ कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करेंगे. आगामी लोकसभा चुनावों से पहले संघ प्रमुख के इस दौरे को जनता का रुख जानने तथा कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है.

निर्णायक दौर में राम मंदिर निर्माण मुद्दा
इससे पहले प्रयागराज में अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले शुक्रवार को कहा कि यह मामला ‘‘निर्णायक दौर’’ में है, मन्दिर बनने के किनारे पर है इसलिए हमें सोच समझकर कदम उठाना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि जनता में प्रार्थना, आवेश और जरूरत पड़ी तो ‘‘आक्रोश’’ भी जगाया जाना चाहिए. श्री ऱाम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में कुम्भ मेला में चल रही धर्म संसद को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, "देश की दिशा भी इस उपक्रम में भटक न जाए, इसे भी ध्यान में रखेगा." उन्होंने कहा, "आने वाले इन चार-छह महीने के इस कार्यक्रम को ध्यान में रखकर हमें सोचना चाहिए. मैं समझता हू कि इन चार-छह महीने की उथल पुथल के पहले कुछ हो गया तो ठीक है, उसके बाद यह जरूर होगा, यह हम सब देखेंगे."

उन्होंने मोदी सरकार की परोक्ष रूप से सराहना करते हुए कहा कि पड़ोसी देशों से सताए गए हिंदू अगर यहां आते हैं तो वे नागरिक बन सकते हैं, यह किसने किया है? उन्होंने यह बात नागरिकता संबंधी विधेयक की ओर संकेत करते हुए कही जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है.

संघ प्रमुख ने कहा, "जिस शब्दों में और जिस भावना से यह प्रस्ताव (राम मंदिर निर्माण) यहां आया है, उस प्रस्ताव का अनुमोदन करने के लिए मुझे कहा नहीं गया है, लेकिन उस प्रस्ताव का संघ के सर संघचालक के नाते मैं संपूर्ण अनुमोदन करता हूं." सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के फैसले से यह साबित हो गया था कि ढांचे के नीचे मंदिर है. अब हमारा विश्वास है कि वहां जो कुछ बनेगा वह भव्य राम मंदिर बनेगा और कुछ नहीं बनेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी बात, सरकार को हमने कहा था कि तीन साल तक हम आपको नहीं छेड़ेंगे... उसके बाद राम मंदिर है ... सरकार में मंदिर और धर्म के पक्षधर हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘न्यायालय से जल्द निर्णय की व्यवस्था के लिए अलग पीठ बन गई. लेकिन कैसी कैसी गड़बड़ियां करके उसे निरस्त किया गया, आप जानते हैं.’’

भागवत ने कहा, अब जब न्यायालय ने कह दिया कि यह उसकी प्राथमिकता में नहीं है. ‘‘हालांकि सरकार ने अपना इरादा (उच्चतम न्यायालय में अर्जी लगाकर) जाहिर कर दिया है, ऐसा मुझे लगता है. उन्हें लगा कि जिसकी जमीन है, उसे वापस कर देते हैं. उन्होंने कहा कि यह मामला निर्णायक दौर में है.. मंदिर बनने के किनारे पर है, इसलिए हमें सोच समझकर कदम उठाने पड़ेंगे. हम जनता में जागरण तो करते रहें और चुप न बैठें, जनता में प्रार्थना, आवेश और जरूरत पड़ी तो आक्रोश भी जगाते रहें.’’

भागवत ने कहा, आगे हम कोई भी कार्यक्रम करेंगे, उसका प्रभाव चुनाव के वातावरण पर पड़ेगा. मंदिर बनने के साथ लोग यह कहेंगे कि मंदिर बनाने वालों को चुनना है. इस समय हमें भी यह देखना चाहिए कि मंदिर कौन बनाएगा. मंदिर केवल वोटरों को खुश करने के लिए नहीं बनाएंगे तभी यह मंदिर भव्य और परम वैभव हिंदू राष्ट्र भारत का बनेगा.

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