5वीं पास प्रेम प्रकाश के मुन्ना बजरंगी बनने की पूरी कहानी, क्यों पूर्वांचल में था खौफ की पहचान?

बागपत जिला जेल में कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई.

5वीं पास प्रेम प्रकाश के मुन्ना बजरंगी बनने की पूरी कहानी, क्यों पूर्वांचल में था खौफ की पहचान?

बागपत: पूर्वांचल के कुख्यात डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जिला जेल के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई. जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 6.30 बजे हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया. BSP विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में सोमवार को उसे बागपत कोर्ट में पेश किया जाना था. इसी वजह से रविवार (8 जुलाई) को उसे झांसी जेल से बागपत जिला जेल में शिफ्ट किया गया. हत्या का शक साथी कैदी सुनील राठी पर है. बता दें, 29 जून को मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने मीडिया से कहा था कि उनके पति की जान को खतरा है. मुन्ना बजरंगी पर हत्या और लूट समेत करीब 40 गंभीर मामले दर्ज हैं. मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश है.

साथी कैदी सुनील राठी पर हत्या का आरोप
जानकारी के मुताबिक, झांसी जेल से बागपत जेल में लाए जाने के बाद उसे कुख्यात सुनील राठी और विक्की सुंहेड़ा के साथ स्पेशल सेल में रखा गया था. जेल के भीतर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. यह समझ  के बाहर है कि आखिरकार, जेल के भीतर हथियार कैसे पहुंचा. ऐसे में जेल प्रशासन भी सवालों के घेरे में है. मेरठ जोन के ADG ने जी मीडिया से बात करते हुए कहा कि फिलहाल इस मामले में जेल प्रशासन की नाकामी और मिलीभगत साफ नजर आ रही है. हालांकि, यह जांच का विषय है.

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चार अधिकारी सस्पेंड किए गए
ताजा जानकारी के मुताबिक बागपत जिला जेल के जेलर, डिप्टी जेलर समेत चार जेलकर्मी सस्पेंड कर दिए गए हैं. मौके पर डॉग स्क्वॉड की टीम पहुंच चुकी है.

17 साल की उम्र में पहला अपराध
मुन्ना बजरंगी का जन्म 1967 में यूपी के जौनपुर में हुआ था. उसने केवल कक्षा पांच तक की पढ़ाई पूरी की उसके बाद वह दूसरे रास्ते पर आगे बढ़ता चला गया. 17 साल की उम्र में वह अपराध की दुनिया में छा गया था. जब वह केवल 17 साल का था तब उसके खिलाफ पुलिस ने पहला मामला दर्ज किया था. पहला मामला अवैध हथियार रखने का था.

1984 में की पहली हत्या
1984 में लूट की वारदात को अंजाम देने के दौरान उसने पहली बार एक व्यापारी की हत्या कर दी थी. जौनपुर के स्थानीय माफिया गजराज सिंह का वह बेहद खास था. गजराज सिंह के कहने पर ही उसने बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह की भी हत्या कर दी. उस हत्याकांड के बाद पूर्वांचल में हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा.

90 के दशक में पूर्वांचल में सरकारी ठेका और अवैध वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का एकछत्र राज था. लेकिन, उसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय तेजी से उभरने लगे. मुख्तार अंसारी के लिए कृष्णानंद राय बाधा बनने लगे थे. ऐसे में मुन्ना बजरंगी ने मुख्तार अंसारी के कहने पर कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई.

कृष्णानंद राय अपने 6 लोगों के साथ लखनऊ हाइवे से गुजर रहे थे. मुन्ना बजरंगी और उसके लोगों ने करीब 400 राउंड फायरिंग की. सभी के शरीर से करीब 60-80 गोलियां निकाली गई थी. कृष्णानंद राय उस समय गाजीपुर से बीजेपी विधायक थे.

यूपी, बिहार में जब उसका रहना मुश्किल हो गया तो वह भागकर मुंबई चला गया. 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने उसे मुंबई के मलाड से गिरफ्तार किया था. ऐसा भी कहा जाता है कि उसने एनकाउंटर से बचने के लिए खुद की गिरफ्तारी करवाई थी.

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं.