उत्तराखंड: पर्यटन सीजन के बावजूद सरोवर नगरी नैनीताल से पर्यटकों ने बनाई दूरी, ये है वजह

नैनीताल में इस बार पर्यटकों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है. हालांकि, स्थानीय व्यापारियों को उम्मीद है कि थर्टी फस्ट को सैलानियों की भीड़ उमड़ेगी.

उत्तराखंड: पर्यटन सीजन के बावजूद सरोवर नगरी नैनीताल से पर्यटकों ने बनाई दूरी, ये है वजह
नैनीताल में मौसम सुहाना लेकिन सैलानियों का इंतजार

नैनीताल: नए साल के जश्न के लिए लोग उत्तराखंड का रुख कर रहे हैं. यहां की शांत वादियां और बर्फ की चादर से ढ़की पहाड़ियों हर किसी को अपनी ओर खींच रही है. लेकिन, सरोवर नगरी नैनीताल से पर्यटकों ने दूरी बना ली है.

इस साल नैनीताल में सौलनियों की कमी को देखते हुए साफ लग रहा है कि यहां थर्टी फस्र्ट का जश्न फीका रहने वाला है. आर्थिक मंदी, पार्किंग की कमी और नागरिक संसोधन एक्ट को लेकर हुए विरोध के कारण बड़ी संख्या में सैलानियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है. इस बार करीब 50 प्रतिशत की कमी पर्यटकों की संख्या में आई है. साथ ही थर्टी फस्र्ट पर वीकेंड ना होना और मंगलवार भी सैलानियों की रास्ते में रोड़ा बन रहा है.

मौसम सुहाना लेकिन सैलानियों का इंतजार

नैनी झील में नौकायन करते हुए गुनगुनी धूप और साफ आबो हवा के बीच सैलानी हर साल नए साल का स्वागत करने नैनीताल आते रहे हैं. लेकिन, इस बार नैनीताल पर ट्रिपल अटैक हुआ है. व्यापारियों की माने तो 2013 की आपदा के बाद पहली बार पर्यटकों की संख्या में इतनी कमी हुई है. होटल व्यापारी संजय नागपाल ने कहा कि इस साल आर्थिक मंदी का असर भी पर्यटन कारोबार पर पड़ रहा है. पार्किंग न हो पाना सबसे बड़ी समस्या है, जिससे लगातार पर्यटन कारोबार को नुकसान हो रहा है.

नैनीताल में हालात ये हैं कि पार्किंग ना होने से सैलानियों ने दूसरे हिल स्टेशन का रुख करना शुरू कर दिया है. इस समय हर दिन करीब 450 गाड़ियां नैनीताल में आ रही हैं. लेकिन, शहर में फ्लैट्स ग्राउंड, मेट्रोपोल और सूखाताल और तल्लीताल में ही पार्किंग की व्यवस्था है. जिस में बहुत कम गाड़ियां आती हैं. नैनीताल में पार्किंग की स्थिति भी अब राजनीति का रूप ले चुकी है. बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर सिर्फ आरोप प्रत्यारोप लगाते नजर आते हैं.

नैनीताल में इस बार पर्यटकों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है. हालांकि, स्थानीय व्यापारियों को उम्मीद है कि थर्टी फस्र्ट को सैलानियों की भीड़ उमड़ेगी. 

विश्वजीत टंडन ने कहा कि आर्थिक मंदी, पार्किंग और नागरिकता संसोधन विधेयक के कारण थोड़ी कमी पर्यटकों में कमी आई है. लेकिन इसके बावजूद उन्हें भरोषा है कि नए साल के जश्न मनाने के लिए संख्या बढ़ेगी.

नैनीताल में केवल 550 होटल रजिस्टर हैं. लेकिन वास्तव में होटल की संख्या काफी ज्यादा है. जिससे पर्यटकों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना काफी मुश्किल है. बताते चलें कि नैनीताल में गर्मियों के समय पूरा शहर पैक रहता है. उसके बाद सीजन नवरात्रों और दीवाली के समय शुरू होता है और फिर नए साल का जश्न मनाने के लिए देश विदेश के सैलानी नैनीताल पहुंचते हैं.

जिला पर्यटन अधिकारी की माने तो नैनीताल के आस पास के पर्यटन क्षेत्रों में सैलानियों की संख्या में इजाफा हो रहा है.

मुक्तेश्वर, रामगढ़ का रुख कर रहे है सैलानी

नैनीताल में पार्किंग की समस्या है और अब सैलानी भी यहां आने का रुख करने के बजाए रामगढ़, मुक्तेश्वर, धनाचूली, भवाली, भीमताल, नौकुचियाल, सातताल, रामनगर जैसे पर्यटक स्थलों का रुक कर रहे हैं. मुक्तेश्वर होटल एसोसिएशन के सह सचिव दीपक बिष्ट ने कहा कि इस इलाके में काफी टूरिस्ट पिछले 10 सालों में बढ़े हैं.