चुनाव बाद पहली बार बोलीं सोनिया गांधी, 'वोट के लिए हर तरह का प्रपंच किया गया'

उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पर कब्जा बनाए रखने के लिए सभी मर्यादाओं को ताक पर रखना देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है. यूपीए अध्यक्ष ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए.

चुनाव बाद पहली बार बोलीं सोनिया गांधी, 'वोट के लिए हर तरह का प्रपंच किया गया'
इस दौरान उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं का धन्यवाद दिया और उनका आभार व्यक्त किया.

रायबरेली: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी एक दिवसीय दौरे के लिए बुधवार (12 जून) को रायबरेली पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं का धन्यवाद दिया और उनका आभार व्यक्त किया. इस दौरान उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर जमकर निशाना साधा. 

चुनाव परिणाम के बाद अपनी पहली बार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष ने चुनाव के दौरान कुछ पार्टियों द्वारा अपनाए गए चुनावी हथकंडों की आलोचना की और दावा किया कि देश की चुनावी प्रक्रिया पर 'कई तरह के संदेह' पैदा हो गए हैं. उन्होंने बीजेपी व अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में वोटरों को भरमाने के लिए हर तरह का प्रपंच किया गया, जो हुआ वो कितना नैतिक था या कितना नहीं, ये आप सब और सारा देश समझता है. 

उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पर कब्जा बनाए रखने के लिए सभी मर्यादाओं को ताक पर रखना देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है. यूपीए अध्यक्ष ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए, और कहा, पिछले कुछ सालों में हमारी चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई तरह के संदेह उभर आए हैं.

इस दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं. भुएमऊ गेस्ट हाउस में नेता-कार्यकर्ता सबसे अलग-अलग मुलाकात की. इस दौरान कांग्रेस ने चिंतन मंथन बैठक में 2022 के प्रदेश में विधानसभा चुनावों पर चर्चा की. कांग्रेस आभार सम्मेलन में प्रियंका गांधी नाराज दिखीं. 

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी ने पहले से भी बेहतर जनादेश हासिल किया, और पार्टी ने अपने बूते पहली बार 300 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया. बीजेपी ने 303 सीटों पर जीत पाई, और उनके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 352 संसदीय क्षेत्रों में जीती. वहीं, कांग्रेस देशभर में कुल 53 सीटों पर जीती, तथा 18 राज्य व केंद्रशासित प्रदेश ऐसे रहे, जहां उसका सूपड़ा साफ हो गया.