मुरादाबाद: निशानेबाज जुड़वां बहनों ने उधार की राइफल से बनाई नेशनल ट्रायल में जगह

अगले महीने होने वाले ट्रॉयल के लिए अंशिका और वंशिका उधार ली गई बंदूक और एक किट से अभ्यास कर रही हैं. 

मुरादाबाद: निशानेबाज जुड़वां बहनों ने उधार की राइफल से बनाई नेशनल ट्रायल में जगह
अंशिका और वंशिका ने बताया कि वह अपने कोच मुकुल टंडन की राइफल से अभ्यास और प्रतियागिताओ में भाग लेती हैं.

दीपचंद्र जोशी/मुरादाबाद: इंसान के मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो, कोई राह मुश्किल नहीं होती. जी हां इस कहावत को सच कर दिखाया है दो जुड़वां बहनों अंशिका और वंशिका विश्नोई ने. ये दोनों उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के कांशीरामनगर में रहती हैं. दोनों बहनों ने आर्थिक तंगी को अपने सपनों के आड़े नही आने दिया और उधार की राइफल के बलबूते पदक जीतकर टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं. दोनों ही बहनों ने भोपाल में नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता में अव्वल स्थान हासिल किया था.

अगले महीने है नेशनल ट्रॉयल, दिन रात कर रही हैं जमकर अभ्यास
अगले महीने होने वाले ट्रॉयल के लिए अंशिका और वंशिका उधार ली गई बंदूक और एक किट से अभ्यास कर रही हैं. इन बहनों का सपना देश का नाम रौशन करने का है. कुछ दिनों पहले भोपाल में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में दोनों बहनों ने हिस्सा लिया और टीम इंडिया के ट्रॉयल के लिए क्वालीफाई किया. बेटियों की सफलता पर परिवार को नाज हैं. पिता एक निजी कम्पनी में काम करते हैं और दस हजार रुपये महीने की सैलरी में परिवार का पालन-पोषण करते हैं. अंशिका और वंशिका ने बताया कि वह अपने कोच मुकुल टंडन की राइफल से अभ्यास और प्रतियागिताओ में भाग लेती हैं. अगर सरकार या प्रशासन उनकी मदद करे तो, वह अपने खेल और अधिक बेहतर बना सकती है.

बेटियों के खेल के लिए घर तक बेचने को तैयार हैं पिता
दो बेटियों के पिता राजीव विश्नोई का कहना है कि मेरी दोनों बेटियां मेरे बेटे से कम नही हैं. उनकी तरक्की और उनके खेल के लिए अपना घर तक बेचना पड़ा तो, वह इससे भी पीछे नहीं हटेंगे. स्कूल से लेकर नेशनल लेवल तक कई पदक जीत चुकीं दोनों बहनों का सपना टीम इंडिया के लिए खेलने का है और हर दिन इसके लिए यह दोनों घंटों अभ्यास कर रही हैं.

(संपादन - दिव्यांश शर्मा)