Nasha Mukti Kendra : किसी भी मादक पदार्थ जैसे कि शराब सिगरेट जैसी चीजों के नशे से परेशान इंसान अगर नशा छोड़ना नहीं चाहता तब तो उसका कुछ नहीं हो सकता है, लेकिन अगर कोई शख्स चाहता है कि वो नशे के नर्क से हमेशा के लिए बाहर निकल जाए तब तो उसके सामने नशा छुड़ाने के कई रास्ते हैं. नशा मुक्ति केंद्र उन्हीं रास्तों में से एक है. लेकिन एक बात यह भी सत्य है कि नशा मुक्ति केंद्र के बारे में बहुत कुछ ऐसे भ्रम फैलाए गए हैं कि लोग वहां जाने से हिचकते हैं. 


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लोगों के कई सवाल
लोगों के मन में नशा मुक्ति केंद्र (de addiction center) को लेकर कई सवाल होते हैं- जैसे कि वहां क्या होता है, नशा छुड़वाने की पूरी प्रक्रिया क्या है. नशा मुक्ति केंद्र में कैसे नशा पीड़ित को रखा जाता है और कितने टाइम बाद नशे से मुक्ति पाई जा सकती है. ऐसे ही सवाले के जवाब हम लेकर आए हैं. 


सबसे पहले फुल चेकअप 
जब भी कोई नशे से जकड़ा शख्स नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती किया जाता है तो पहले तो उसके फुल चेकअप किया जाता है. उनके LFT, RFT के साथ ही CBC, BLOOD SUGAR यहां तक कि HIV  का भी टेस्ट किया जाता है. व्यक्ति के बॉडी पर नशे का क्या प्रभाव पड़ा है इस बारे में इन जांचों से पता लगाया जाता है और इन्हीं रिपोर्ट्स के बेस पर व्यक्ति के  withdrawal और detox जैसी प्रक्रिया को शुरू किया जाता है. इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब कोई व्यक्ति  नशा बंद करता है तो उसको कई सारी दिक्कतें होती है. इनको withdrawal कहा जाता है. 


मनोवैज्ञानिक चिकित्सा
इस पूरी प्रक्रिया में 10 से 15 दिन का समय लग जाता है. कभी कभी इससे अधिक समय भी लग जाता है क्योंकि कोई कोई मरीज खुद को नशे से बहुत नुकसान पहुंचा चुके होते हैं.  withdrawal और detox हो जाने के बाद थैरिपी की प्रक्रिया होती है जिसमें मनोवैज्ञानिक चिकित्सा और काउंसलर के द्वारा मरीज का असेसमेंट किया जाता है. इससे नशे का दिमाग पर कैसा असर पड़ा है यह जानने की कोशिश की जाती है. उसकी कैस हिस्ट्री क्या है और उसके क्या ट्रिगर प्वाइंट हैं जिससे वह नशा करता है, यह सब जानने के बाद उनकी थैरिपी को आगे बढ़ाया जाता है. इसमें योग, ध्यान के साथ ही Behavioral Therapy को बी आजमाया जाता है. CBT, REBT, Motivational और Interviewing, DBT के साथ ही Person Centered Therapy का इस्तेमाल किया जाता है. 


परामर्श प्रक्रिया
सामूहिक परामर्श के साथ ही व्यक्तिगत परामर्श और पारिवारिक परामर्श जैसी थेरेपी शामिल है. 12 Staps, Alcoholic Ananymous (AA) के साथ ही NA narcotics ananymous और AA/NA fellowship करवाई जाती है. आध्यात्मिक जाग्रति और therapeutic games भी थेरेपी में शामिल होते हैं. 


इच्छा शक्ति को मजबूत करना होगा.
नशा मुक्ति (person centered therapy) में इलाज की प्रक्रिया कैसी होगी यह उस व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है जिसका इलाज हो रहा है. उसकी मानसिक और शरीरिक स्थिति कैसी है उसका इलाज इस पर डिपेंड करता है और इस पर ही नशा छोड़ने की जल्दी और देरी भी डिपेंड करता है. कोई ये सोचकर न जाए कि नशा मुक्ति में भर्ती होते ही वह नशे से मुक्त हो सकता है. उसे अपने ऊपर टाइम देना होगा और अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करना होगा. 


व्यक्तित्व पर काम किया जाता है 
एक्टिव एडिक्शन से व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक स्थिति खराब होती जाती है. समाज में भी उनका स्थान कटता जाता है. भावनात्मक रूप से ऐसे लोग कमजोर होते जाते हैं. नशा मुक्ति केंद्र में नशा पीड़ित व्यक्ति की पूरी पर्सनालिटी पर काम किया जाता है. इस पर ध्यान दिया जाता है कि व्यक्ति की शरीरिक और मानसिक स्थिति मजबूत हो सके. 


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