UP Chunav 2022: सपा में शामिल हुआ मुजफ्फरनगर दंगों का मुख्य आरोपी कादिर राणा, अखिलेश यादव ने किया स्वागत
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UP Chunav 2022: सपा में शामिल हुआ मुजफ्फरनगर दंगों का मुख्य आरोपी कादिर राणा, अखिलेश यादव ने किया स्वागत

पूर्व सांसद कादिर राणा बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. काफी दिनों से उनके बसपा छोडऩे की चर्चाएं चल रही थीं.

UP Chunav 2022: सपा में शामिल हुआ मुजफ्फरनगर दंगों का मुख्य आरोपी कादिर राणा, अखिलेश यादव ने किया स्वागत

लखनऊ: 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी पूर्व सांसद कादिर राणा बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. काफी दिनों से उनके बसपा छोडऩे की चर्चाएं चल रही थीं. राणा के इस सियासी कदम से जिले के राजनीतिक समीकरण में बदलाव के कयास लगाए जा रहे हैं. 

संजीव बालियान ने 2014 चुनाव में दी थी पटखनी
कादिर राणा वर्ष 2009 से 2014 तक बसपा से सांसद रहे. उन्होंने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में रालोद प्रत्याशी अनुराधा चौधरी को हराया था. हालांकि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान से भारी मतों से हार गए थे. आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जनपद से राजनीतिक चोला बदलने का क्रम जारी है. बसपा के नेता दूसरे दलों में शामिल हुए हैं. इसी क्रम में पूर्व सांसद कादिर राना भी बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए. 

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2013 में सांसद के कार्यकाल के दौरान मुजफ्फरनगर में हुए थे दंगे
बता दें, कादिर राणा अपने शुरुआती करियर में समाजवादी पार्टी से दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन दोनों ही चुनाव वह हार गए. इसके बाद कादिर राणा ने राष्ट्रीय लोकदल का हाथ थामा और मुजफ्फरनगर की मोरना (अब मीरापुर) से विधायक बने. उसके बाद कादिर राणा ने लोकदल का साथ छोड़ बसपा का दामन थामा और 2009 लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से लोकसभा सांसद बने, उनके सांसद कार्यकाल में ही 2013 में हुआ था.

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बता दें, मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक बवाल हुआ, जिसके कादिर राणा मुख्य आरोपी हैं. फिलहाल एक बार फिर सियासी करवट लेते हुए कादिर राणा साइकिल पर सवार हुए हैं. रविवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनकी समाजवादी पार्टी में वापसी कराई. 

भाजपा ने साधा निशाना
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने गुंडे माफियाओं के आगे पूरी तरह से घुटने टेक दिए हैं. समाजवादी पार्टी अपनी संभावित हार को देखते हुए इतनी निराशा में है कि अब गुंडों माफियाओं को अपनी पार्टी में शामिल करा के महिमामंडित करने का काम कर रही है. वहीं, सपा प्रवक्ता अभिषेक राय का कहना है कि सपा का कुनबा धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है. जनता बहुत उम्मीद से समाजवादी पार्टी की तरफ देख रहे हैं. कादर राणा ने सपा ज्वाइन की है, और रही बात उन पर आरोपों की तो वह अभी न्यायालय में विचाराधीन है. 

बता दें, कादिर राणा के छोटे भाई नूर सलीम राणा भी 2012 में मुजफ्फरनगर जिले की चरथावल विधानसभा से विधायक चुने गए थे और अभी कुछ दिन पहले उन्होंने हाथी का साथ छोड़ राष्ट्रीय लोक दल का दामन थामा है. बता दें नूर सलीम राणा भी 2013 दंगों के मुख्य आरोपी हैं. 

2013 में हुआ था मुजफ्फरनगर दंगा 
दरअसल घटना 27 अगस्त, 2013 की है. जब एक लड़की ने अपने भाइयों को बताया कि एक युवक ने उसके साथ छेड़छाड़ की है. जिसेक बाद लड़की के दोनों भाइयों ने छेड़छाड़ करने वाले लड़के की हत्या कर दी. इसके बाद लड़के के गुस्साए परिजनों ने दोनों को पीट-पीटकर मार डाला. दोनों पक्ष अलग-अलग समुदायों से थे. जिसके बाद दोनों के समुदायों के बीच तलवारें खिंच गईं. 

लड़की के परिवार से सहानुभूति रखने वालों ने कवाल गांव में 31 अगस्त को एक पंचायत बुलाने की घोषणा की. वहीं, दूसरे पक्ष ने इसका विरोध करते हुए शहर के खालापार इलाके में उसी दिन अपनी पंचायत बुलाने का फैसला किया.  कवाल पंचायत के लिए लगभग 40 हजार लोग इक्कट्ठा हो गए थे, लेकिन आयोजकों ने कहा कि पंचायत 7 सितंबर को की जाएगी. पंचायत के सदस्य जब घर लौट रहे थे, तो शाहपुर पुलिस थाने के तहत आने वाले गांव बस्सी में उन पर तलवारों से हमला किया गया. 

इस खबर के फैलने के बाद शामली और मेरठ जिलों के कुछ इलाकों में दंगा भड़क गया. तब से हालात और बिगड़ते गए और हिंसा दूसरे इलाकों में भी फैल गई. इस घटना में सैकड़ों लोगों की जान गई जबकि हजारों लोग बेघर हो गए.  

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