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कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट जाएगी यूपी सरकार, CM योगी ने लिया संज्ञान

कोर्ट ने मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी किया है. मुख्तार अंसारी के अलावा बाकी आरोपियों में उनके भाई अफ़ज़ाल अंसारी, संजीव माहेश्वरी, एजाजुल हक़, राकेश पांडेय, रामु मल्लाह, मंसूर अंसारी और मुन्ना बजरंगी शामिल थे. 

कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट जाएगी यूपी सरकार, CM योगी ने लिया संज्ञान
प्रदेश सरकार दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले का संज्ञान लिया है.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में भले ही सीबीआई कोर्ट ने समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया हो, लेकिन यूपी सरकार इस मामले पर उच्च न्यायालय जाएगी. जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर संज्ञान लिया है. 

प्रदेश सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार फैसले को पढ़ेगी और उच्च न्यायालय में अपील करेगी. प्रदेश सरकार दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले का संज्ञान लिया है.

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार (3 जुलाई) को फैसला सुनाते हुए सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया था. साल 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी समेत पांच लोगों पर लगा था. आरोपियों में से मुन्ना बजरंगी की बीते दिनों जेल में हत्या कर दी गई थी.  

बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की 29 नवंबर, 2005 को हत्या कर दी गई थी. इस मामले को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से दिल्ली कोर्ट में स्थानांतरण कर दिया गया था. 2013 में विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. मऊ से विधायक मुख्तार अंसारी के खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हैं. 

गौरतलब है कि कृष्णानंद राय गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र के तहत गोंडूर गांव के रहने वाले थे. उन्होंने साल 2002 में हुए चुनाव में मोहम्मदाबाद सीट पर मुख्तार के भाई अफजाल को हराकर अंसारी बंधुओं के वर्चस्व को चुनौती दी थी. यहीं से दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत हुई. साल 13 जनवरी, 2004 को मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के बीच पहली मुठभेड़ लखनऊ के कैंट इलाके में हुई. इसके बाद राय को अंसारी बंधुओं से अपनी जान का डर सताने लगा.

उन्होंने यूपी सरकार से अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की, लेकिन तब इस बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया. नतीजा, 29 नवंबर, 2005 को गाजीपुर में राय की हत्या हो गई. 

आरोप था कि मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने साथियों के साथ मिलकर लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की गाड़ियों पर AK47 से 400 गोलियां बरसाई थीं. इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे. इनके शव से 67 गोलियां बरामद की गई थी.