Siberia Asteroid: वैज्ञानिक कितना भी रिसर्च करते रहें लेकिन अंतिरक्ष हमेशा से ही लोगों क लिए अजूबा बना रहता है. इसी कड़ी में अगर धरती के आसमान में अचानक से जलती हुई रोशनी दिखे, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता. ऐसा ही कुछ रूस के साइबेरिया में हुआ जब एक छोटा एस्टरॉयड जलते हुए धरती के वायुमंडल में दाखिल हुआ. यह सब तब हुआ जब 4 दिसंबर 2024 सुबह 4:15 बजे स्थानीय समय साइबेरियाई आसमान में यह नज़ारा देखा गया. गनीमत यह रही कि यह घटना पूरी तरह सुरक्षित रही, लेकिन इसके बारे में समझना जरुरी है. 


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घटना क्या हुई और ये एस्टरॉयड क्या था?
असल में एबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह एस्टरॉयड करीब 70 सेंटीमीटर व्यास का था और जैसे ही यह वायुमंडल में घुसा, तेज रोशनी और गर्मी के कारण जलकर राख हो गया. इसे वैज्ञानिकों ने C0WEPC5 नाम दिया है. इसकी गति 15.5 किलोमीटर प्रति सेकंड थी, और यह 58 डिग्री के कोण से धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर रहा था. इस अद्भुत नज़ारे को रूस के कई शहरों याकुत्स्क, मिर्नी, नोरील्स्क और दुडिंका में देखा गया. कुछ छोटे टुकड़े जमीन पर गिर सकते हैं लेकिन इससे किसी भी तरह का खतरा नहीं हुआ.


कैसे इसका पता चल पाया?
इस एस्टरॉयड को कुछ घंटे पहले ही यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के बोक टेलिस्कोप और नासा के कैटालिना स्काई सर्वे की मदद से खोजा गया था. नासा के जेट प्रोपल्शन लैब के सेंटर फॉर नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज़ (CNEOS) ने इसकी सही समय पर ट्रैकिंग की और यह सुनिश्चित किया कि यह केवल वायुमंडल में जलकर खत्म हो जाएगा.



ऐसी घटनाओं के मायने क्या हैं?
यह घटना वैज्ञानिकों के लिए एक अध्ययन टाइप है. रिपोर्ट्स के मुताबिक क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के प्रोफेसर एलन फिट्जसिमन्स ने कहा कि हालांकि यह छोटा एस्टरॉयड था, लेकिन इसका समय पर पता लगाना दिखाता है कि हमारी निगरानी तकनीक कितनी बेहतर हो चुकी है. यह 2024 में चौथी बार है जब किसी एस्टरॉयड को धरती से टकराने से पहले खोजा गया हो. ऐसे समय पर की गई खोजें हमें भविष्य में बड़े खतरों से बचाने में मदद कर सकती हैं.


अगर बड़ा एस्टरॉयड आ जाए तो क्या होगा?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई बड़ा एस्टरॉयड धरती की तरफ आता है, तो यह एक बड़ी आपदा बन सकता है. इतिहास में 1908 का तुंगुस्का हादसा इसका उदाहरण है, जब साइबेरिया के जंगलों में एक विशाल एस्टरॉयड के कारण 830 वर्ग मील क्षेत्र में पेड़ तहस-नहस हो गए थे. ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय को सतर्क रहने और एस्टरॉयड डिफ्लेक्शन तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित करती हैं. नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) लगातार इस दिशा में काम कर रही हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके.