SriLanka Economic Crisis: भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका संकट के दौर से गुजर रहा है. यहां की जनता  राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे का इस्तीफा मांग रही है. लोगों ने राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास पर डेरा डाल दिया है. देश की अति सुरक्षित ये जगहें पिकनिक स्पॉट में बदल चुकी हैं. लोग यहीं पर खाना बना रहे हैं, अलग-अलग गेम खेल रहे हैं और पार्कों में मजे कर रहे हैं. 


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प्रदर्शनकारियों ने पहले ही साफ कर दिया है कि जब तक राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे अपने पदों से इस्तीफा नहीं देते तब तक वे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के घरों पर कब्जा करना जारी रखेंगे. टेंपल ट्री, जिसे श्रीलंकाई पीएम आवास के रूप में भी जाना जाता है, के अंदर लोगों को कैरम बोर्ड खेलते और सोफे पर आराम करते देखा जा सकता है, उनमें से कुछ सोते भी दिखे. 


पार्क के अंदर भी प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों की भीड़ देखी जा सकती थी. श्रीलंकाई पीएम के घर के अंदर एक प्रदर्शनकारी ने बताया, 'हम प्रदर्शनकारियों ने खाना बनाना शुरू कर दिया है, हम पीएम के घर के अंदर हैं. हमने पीएम विक्रमसिंघे और राष्ट्रपति राजपक्षे के इस्तीफे के लिए संघर्ष किया है. हम परिसर से तभी निकलेंगे जब वे इस्तीफा देंगे.'



श्रीलंका में क्या हो रहा?


श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के आधिकारिक आवास पर हजारों प्रदर्शनकारियों ने धावा बोल दिया, जिससे उन्हें एक अज्ञात स्थान पर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा. प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंह के निजी आवास में भी आग लगा दी. लोगों के गुस्से के बीच राष्ट्रपति राजपक्षे 13 जुलाई को इस्तीफा देंगे, जबकि प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंह रविवार को इस्तीफा दे चुके हैं. 



प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन में छद्म कैबिनेट की बैठक की


राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के आवास पर रविवार को सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने छद्म कैबिनेट बैठक की और उनके नेतृत्व वाली सरकार का उपहास उड़ाने के लिए अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ चर्चा की.


छद्म कैबिनेट बैठक में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के घर पर हुई आगजनी पर चर्चा की.उन्होंने आईएमएफ की एक नाटकीय चर्चा की जिसमें एक विदेशी शामिल था, जो अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ परिसर का दौरा करता है. शनिवार को प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति भवन के शयन कक्ष, स्विमिंग पूल में इधर-उधर घूमते देखा गया.


ऐसा प्रतीत होता है कि 73 वर्षीय राजपक्षे, 1948 में देश के स्वतंत्र होने के बाद से अभूतपूर्व आर्थिक संकट को लेकर जनता के भारी आक्रोश के कारण भूमिगत हो गए हैं.


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