close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

आखिर कैसे कांग्रेस ने महाराष्ट्र में खो दी अपनी जमीन? यहां पढ़ें- 4 बड़ी वजहें

जो कांग्रेस पांच साल पहले सूबे पर राज कर रही थी, वह महाराष्ट्र में आज चौथे नंबर की पार्टी बन गई है. कांग्रेस ने एक नहीं काफी कोताही बरती है. इसके पीछे कांग्रेस ने कहां-कहां कौन सी गलती कर दी, चलिए समझते हैं.

आखिर कैसे कांग्रेस ने महाराष्ट्र में खो दी अपनी जमीन? यहां पढ़ें- 4 बड़ी वजहें

नई दिल्ली: महज पांच साल पहले महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज कांग्रेस, आज राज्य की चौथे नंबर की पार्टी बन चुकी है. नंबर वन से नंबर चार पर आने के लिए कांग्रेस पार्टी ने बड़े जतन से पतन यात्रा की है. जब दूसरे दल जन आशीर्वाद यात्रा पर थे. जनता के बीच थे तो महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेता कहीं नहीं नजर आ रहे थे. 

1). सवाल उठना तय

कांग्रेस ने महाराष्ट्र चुनाव के दौरान प्रचार के दौरान जिस किस्म की शिथिलता दिखाई. उसके बारे में सवाल जरूर उठेंगे. सवाल उठेंगे कि आखिरकार क्यों कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र में आगे नहीं बढ़ पाई? क्यों वो एनसीपी का साथ हासिल करने के बावजूद महाराष्ट्र के मतदाताओं के दिल में नहीं उतर पाई ?

2). कांग्रेस ने कहां बरती कोताही?

  • राहुल गांधी ने इस बार महाराष्ट्र चुनाव में सिर्फ 8 रैलियों को संबोधित किया
  • सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी राज्य में चुनाव प्रचार से एकदम दूर रहीं

कांग्रेस के दिग्गजों के इस रवैये का नतीजा ये रहा कि प्रचार युद्ध में कांग्रेस शुरुआत से ही पिछड़ती चली गई. और मतदान का दिन आते आते वो मतदाताओं के दिलो-दिमाग से लगभग गायब हो गई. और अब आंकड़े बता रहे हैं कि कांग्रेस रेस में कहीं नहीं है.

3). फिर सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा

  • बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने महाराष्ट्र में 18 रैलियां की 
  • पीएम मोदी ने 9 रैलियां करके बीजेपी की जीत की पटकथा लिख दी

महाराष्ट्र में चुनावों से पहले कांग्रेस ने जो सक्रियता दिखाई थी वो सिर्फ और सिर्फ कागजी ही साबित हुई. कांग्रेस ने चुनाव से पहले पार्टी के पांच वरिष्ठ नेताओं को महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया था. पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक को विदर्भ क्षेत्र, राजस्थान के प्रभारी अविनाश पांडे को मुंबई और पार्टी के कंट्रोल रूम का प्रभारी नियुक्त किया गया था. वरिष्ठ नेता रजनी पाटिल को पश्चिमी और कोंकण क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया था, जबकि आरसी खुनटिया को महाराष्ट्र के उत्तरी क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया था.

4). जब सावरकर के नाम पर छिड़ी जंग

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान मुद्दों को लेकर भी कांग्रेस ऊंहापोह की स्थिति में रही भारतीय जनता पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की तो कांग्रेस हमलावर हो गई थी. कांग्रेस ने तब सावरकर को गांधी की हत्या का आरोपी करार दिया, लेकिन खुद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये कह दिया था कि सावरकर पर तो इंदिरा सरकार ने ही डाक टिकट जारी किया था. सावरकर पर पहले आक्रामक और फिर सॉफ्ट रुख, कांग्रेस का ये कन्फ्यूजन कहीं ना कहीं उनपर भारी पड़ा. 

रही सही कसर राहुल गांधी के रवैये ने पूरी कर दी. लोकसभा में हार के बाद राहुल गांधी ने जिस अंदाज में मैदान छोड़ा था. माना जा रहा है कि उसकी वजह से पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता चला गया. इस बार एनसीपी के साथ गठबंधन होने के बावजूद भी कांग्रेस के नेताओं ने एकजुटना नहीं दिखाई. जिसका खामियाजा ग्रैंड ओल्ड पार्टी को भुगतना पड़ा है. ये सवाल है, कि कांग्रेस महाराष्ट्र में इस हार का ठिकरा किसके सिर पर फोड़ना चाहेगी. क्योंकि पहले ही कांग्रेस ने महाराष्ट्र में ईवीएम पर सवाल खड़ा कर दिया था.