कोरोना के बहाने से ही सही, हमने सफाई का महत्व तो समझा

सफेदी की चमक हर जगह दिखाई दे रही है. यकीन नहीं होता कि हम वही भारतीय हैं जो ट्रेनों में मूंगफली के छिलके बिखेरा करते थे. चलती बसों-कारों से पैकेट फेक दिया करते थे. राह चलते थूक दिया करते थे और पान-गुटखा से चित्रकारी किया करते थे. कोरोना के कारण ही सही हमने इन गलत आदतों से तौबा तो कर ली है. साथ ही कोरोना स्वच्छ भारत अभियान की जरूरत भी पुख्ता कर रहा है.

कोरोना के बहाने से ही सही, हमने सफाई का महत्व तो समझा

नई दिल्लीः आज सारा देश जब कोरोना के कहर से जूझ रहा है तो हमने एहतियात बरतना शुरू किया है. हम हाथ धो रहे हैं, बार-बार धो रहे हैं. सबको सिखा भी रहे हैं कि हाथ धो, हर बार धुलो. हम हर जगह सफाई कर रहे हैं. आलम यह है कि ऑफिस परिसरों में दवाइयों जैसी गंध भरी हुई है. पब्लिक प्लेस को साफ कराया जा रहा. जो कभी साफ नहीं होते थे, उन्हें दिन में तीन बार साफ किया जा रहा है. बाजारों में भीड़ नहीं है और  वहां भी लगातार झाड़ू लग रही है. सड़कें भी साफ हैं. बसें भी और रेल भी

मतलब, हर जगह हाईजेनिक है अब
यानी सफेदी की चमक हर जगह दिखाई दे रही है. यकीन नहीं होता कि हम वही भारतीय हैं जो ट्रेनों में मूंगफली के छिलके बिखेरा करते थे. चलती बसों-कारों से पैकेट फेक दिया करते थे. राह चलते थूक दिया करते थे और पान-गुटखा से चित्रकारी किया करते थे. और तो और टोकने पर कहते थे, अरे यार, सब तो करते हैं. तुम कौन टोकने वाले.

हमीं लोग हैं, जिन्हें 21वीं सदी में सिखाना पड़ा कि भैया, खुले में शौच मत करो, दीवारों के किनारे पेशाब मत करो. और तो और पब्लिक टॉयलेट में गंदी बात मत लिखो.

तो हम इतने सभ्य कैसे हो गए.
सभ्य कैसे हो गए? सवाल अच्छा है तो जवाब और भी अच्छा है. कहावत है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं. हुआ यह है कि माहौल में एक बीमारी घुली कोरोना. शुरू-शुरू में लोगों ने अखबारों में पढ़ा-टीवी में देखा कि कोरोना फैल रहा है. चलो फैल रहा है तो चीन में फैल रहा है न, यहां इंडिया में थोड़े ही है.

दो महीने बाद खबर आई, भैया भागो, चीन में नहीं दुनिया भर में फैल रहा है. इंडिया में भी है. बस हम तब जागे और टुनटुना निकाल कर पता करने लगे कैसे फैल रहा है? 

बस, यहीं से आंख खुली
जैसे ही पता लगा कि जबर तरीके से फैल रहा है और कोई इलाज भी नहीं मिल रहा है, तब हमारी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई. अब बचने के तरीके में कुल मिलाकर दो-तीन बातें, वो भी घुमा फिराकर केवल एक ही, कि सफाई रखो और ज्यादा से ज्यादा सफाई रखो. बस तबसे माहौल ये है कि जो लोग सिर्फ पानी को टच करने भर से साल भर का स्नान समझ लेते थे आज सेनेटाइजर में डूब कर गंगा स्नान कर रहे हैं.

खांस-छींक कर पैंट में हाथ पोंछने वाले टिश्यू इस्तेमाल करने लगे हैं और मुंह पर हाथ रखकर छींकने का शऊर सीख गए हैं. 

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स्वच्छता अभियान में अक्ल नहीं आई थी
2 अक्टूबर 2014 को पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान की शुरुआत की. इस दौरान भी कहीं इसे सीरियसली लिया गया तो कहीं अफसरों-विरोधियों ने इस अभियान को पलीता लगाने की कोशिश की. तब कहने के बावजूद कभी ट्रेन-स्टेशन, बसें-बस अड्डे गंदे रह जाते थे. अस्पताल के टॉयलेट जाने लायक नहीं रहते थे और बाजारों में तो महिलाएं टॉयलेट जाने के बारे में सोच नहीं सकती थीं.

पुरुषों को दीवारों के किनारे और नाला-नाली में धार गिराने का कार्यक्रम अब भी जारी था. लेकिन कोरोना क्या आया, एक झटके में सब समझ आ गया. जेहन में घुसा कि वाकई स्वच्छता आंदोलन कितना जरूरी था. आज अगर इसके कुछ कम मामले भारत में हैं तो वह पहले से जारी इस अभियान के कारण हैं, जिसे कोरोना के बाद बड़े स्तर पर केवल तेज धार दी गई है. अच्छा है कि यह पहले से हमारी प्रैक्टिस में था. 

सरकारें भी सख्त, जुर्माने लगा रही हैं. मुंबई में थूकने पर जुर्माना
कोरोनावायरस के बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए बीएमसी ने मुंबई और पीएमसी ने पुणे में सार्वजानिक स्थानों पर थूकने वालों से 1,000 रुपये जुर्माना वसूलना शुरू किया है. इसके लिए मार्शलों को खासतौर पर सतर्क रहने का आदेश दिया गया है. बीएमसी कमिश्नर प्रवीण परदेशी ने कहा- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर थूकने से बीमारी फैलने की आशंका बढ़ जाती है.

इसलिए इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. सिर्फ मुंबई में एक दिन में यानि बुधवार शाम तक एक लाख 11 रुपए से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया है. 

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पांडिचेरी में गुटखा प्रतिबंध
पांडिचेरी प्रशासन ने गुटखा व पान मसाला पर प्रतिबंध लगाया है. दरअसल इन्हें खाने वाले जहां-तहां थूकते जरूर हैं. थूक वायरस फैलने का एक बड़ा माध्यम है. इसलिए यह प्रतिबंध लगाया गया है. इस पर रोकथाम का कानून तो नहीं है, लेकिन अपीली तौर पर लोगों से इससे बचने के लिए कहा गया था. लेकिन कोरोना का मामला गंभीर होने के बाद प्रशासन को इस पर सख्ती से पेश आना पड़ा. लिहाजा कई इलाकों में इसकी खरीद पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया है, साथ ही थूके जाने पर भारी जुर्माना वसूला जा रहा है.