World Cup 2011: 10 साल पहले जब अनजान खिलाड़ी ने जड़ा था विश्वकप इतिहास का सबसे तेज शतक, इंग्लैंड की हुई थी शर्मनाक हार

हम आपको क्रिकेट के जन्मदाता इंग्लैंड की जिस हार के बारे में बताने जा रहे हैं वो दरअसर आयरलैंड के खिलाफ उसे मिली थी. क्रिकेट में 2011 तक आयरलैंड को बेहद कमजोर टीम माना जा रहा था. हालांकि अब उसे टेस्ट का दर्जा मिल गया है लेकिन 2 मार्च 2011 तक ऐसा बिल्कुल नहीं थी.

Written by - Adarsh Dixit | Last Updated : Mar 3, 2021, 05:02 PM IST
  • केविन ओब्रायन ने विश्वकप इतिहास का सबसे तेज शतक जड़ा था
  • 50 गेंद में शतक जमाकर विश्व कप का सबसे तेज सैकड़ा बनाया
World Cup 2011: 10 साल पहले जब अनजान खिलाड़ी ने जड़ा था विश्वकप इतिहास का सबसे तेज शतक, इंग्लैंड की हुई थी शर्मनाक हार

नई दिल्ली: भारत में खेला गया 2011 का विश्वकप सिर्फ इसलिये खास नहीं है कि उसमें भारत विजयी बना था. इस विश्वकप की कई विशेषताएं हैं. ये विश्वकप कई अनोखे रिकॉर्ड्स के लिये भी जाना जाता है. क्रिकेट का जन्मदाता इंग्लैंड को माना जाता है लेकिन 2019 से पहले 3 बार विश्वकप के फाइनल में पहुंचने के बावजूद इंग्लैंड एक भी बार भी विश्वचैंपियन नहीं बना सका था.

2011 के विश्वकप में उसे बहुत भरोसा था कि वो विश्वकप जीत सकता है लेकिन आज के ही दिन 2011 में उसे ऐसी हार झेलनी पड़ी जिसने पूरे इंग्लैंड को झकझोर कर रख दिया था. सबसे बड़ी बात ये है कि आयरलैंड की ओर से केविन ओब्रायन ने विश्वकप इतिहास का सबसे तेज शतक जड़ा था. केविन ओ ब्रायन ने सिर्फ 50 गेंद में शतक जमाकर विश्व कप का सबसे तेज सैकड़ा अपने नाम कर लिया था.

आयरलैंड के हाथों बुरी तरह पिटा था इंग्लैंड

हम आपको क्रिकेट के जन्मदाता इंग्लैंड की जिस हार के बारे में बताने जा रहे हैं वो दरअसर आयरलैंड के खिलाफ उसे मिली थी. क्रिकेट में 2011 तक आयरलैंड को बेहद कमजोर टीम माना जा रहा था. हालांकि अब उसे टेस्ट का दर्जा मिल गया है लेकिन 2 मार्च 2011 तक ऐसा बिल्कुल नहीं थी. इंग्लैंड के द्वारा दिये गये 328 रन के लक्ष्य को हासिल करके इंग्लैंड के विश्वविजेता बनने के सपने को चकनाचूर कर दिया था.

इंग्लैंड के तत्कालीन कप्तान एंड्रयू स्ट्रॉस ने एक इंटरव्यू में कहा था कि आयरलैंड से हारने के बाद वे इतना टूट गये थे कि उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था और इस हार के बाद वे कई दिनों तक सो नहीं सके थे.

327 रन बनाने के बावजूद हार गया था इंग्लैंड

क्रिकेट का जन्मदाता इंग्लैंड 1975, 1979 और 1989 के विश्वकप के फाइनल तक का सफर तय कर चुका था लेकिन वो कभी विश्वकप जीता नहीं था. 2011 के विश्वकप में भारत से इंग्लैंड का मुकाबला टाई रहा था और इससे अंग्रेज खिलाड़ी बहुत खुश थे. क्योंकि 2011 वर्ल्डकप का भारत सबसे मजबूत दावेदार था और भारत से हारा हुआ मैच टाई करवाकर इंग्लैंड के खिलाड़ी बहुत उत्साहित थे.

जब उसके सामने आयरलैंड आया तो इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया.

इंग्लैंड ने जोनॉथन ट्रॉट के 92, इयॉन बेल के 81, केविन पीटरसन के 59 और एंड्रयू स्ट्रॉस के 34 रन की बदौलत आयरलैंड के सामने 328 रन का विशाल लक्ष्य रखा. बेंगलुरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में 328 रन का टारगेट हासिल कर पाना बहुत मुश्किल था. लेकिन आयरलैंड ने इसे भी हासिल करके इतिहास रच दिया.

केविन ओब्रायन की धमाकेदार पारी ने आयरलैंड को जिताया

आयरलैंड की पारी शुरू होते ही पहली ही गेंद पर कप्तान विलियम पोर्टरफील्ड जेम्स एंडरसन की गेंद पर बोल्ड हो गये. इसके बाद पॉल स्टर्लिंग ने एड जॉयस के साथ मिलकर पारी को संभाला और इस खतरे से बाहर निकाला. इंग्लैंड मैच में वापसी कर पाता उससे पहले ही केविन ओब्रायन ने चौकों और छक्कों की बरसात कर दी. केविन ने 63 गेंद का सामना करके 6 छक्कों और 13 चौकों की मदद से 113 रन बनाए और आयरलैंड को ऐतिहासिक जीत दिला दी.

आयरलैंड के केविन ओ ब्रायन ने जबरदस्त बल्लेबाजी की और वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे तेज शतक लगाया. उन्होंने केवल 50 गेंदों में शतक पूरा किया.

इस हार पूरे इंग्लैंड को हिलाकर रख दिया था. इतनी कमजोर और अनुभवहीन टीम से हारकर इंग्लैंड विश्वकप में बाहर होने की कगार पर पहुंच गई थी. बाद में इंग्लैंड क्वार्टरफाइनल में श्रीलंका से हारकर विश्वकप 2011 से बाहर हो गया था.

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