'एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें', फिराक गोरखपुरी के शेर

Firaq Gorakhpuri Poetry: फिराक गोरखपुरी उर्दू के मशहूर शायर थे. उनका असल नाम रघुपति सहाय था. वो 1 अगस्त 1896 ई. में गोरखपुर में पैदा हुए. फिराक को शायरी विरासत में मिली. उनके वालिद शायर थे.

'एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें', फिराक गोरखपुरी के शेर

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Siraj Mahi

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सिराज माही युवा पत्रकार हैं. देश, दुनिया और मनोरंजन की खबरों पर इनकी अच्छी पकड़ है. ज़ी मीडिया से पहले वह 'ईटीवी भारत' और 'दि संडे पोस्ट' जैसे मीडिया हाउस में काम कर चुके हैं. लिखने-पढ़ने के अलावा इन्हें घूमना और खाना बनाना पसंद है.

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