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आगामी लोकसभा चुनाव में असम के इतनी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल

राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने सोमवार को असम में हुई अपनी बैठक के बाद कहा है कि वह प्रदेश में आने वाली पंचायत चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारेगी.

 

राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल की बैठक
राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल की बैठक

गुवाहाटीः असम में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव और उससे पहले 2024 के लोक सभा चुनाव के लिए अभी से राजनीतिक दलों की गोलबंदी और गठबंधन शुरू हो गया है. अभी तीन दिन पहले ही असम प्रदेश कांग्रेस ने आने वाले आम चुनाव के लिए प्रदेश के 9 राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने का ऐलान किया था. एआईयूडीएफ और भाजपा भी आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर अभी से रणनीति बनाने में जुट गई है. वहीं, आसाम में होने वाले लोकसभा और पंचायत चुनाव से पहले राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल भी चुनावी मैदान में कूदने और भिड़ने के लिए आगे आ गई है. राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने कहा है कि वह पंचायत चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारेगी. 

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पंचायत चुनाव में 15 जिलों में पार्टी चुनाव लड़ेगी
राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने कहा है कि वह असम में सांप्रदायिकता के खिलाफ लोकसभा और पंचायत चुनाव लड़ने जा रही है. काउंसिल ने सोमवार को हुई अपनी एक बैठक के बाद कहा कि असम के जनता के सामने ऐलान किया कि राज्य में आने वाले पंचायत चुनाव में 15 जिलों में पार्टी चुनाव लड़ेगी और लोकसभा चुनाव में कम से कम 8 सीटों पर सांप्रदायिकता के खिलाफ चुनावी मैदान में अपने उम्मीदवार उतारेगी. राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के असम प्रदेश अध्यक्ष मौलाना उबैदुर रहमान कासमी ने कहा कि  हमारी पार्टी देश में शांति और भाईचारे के लिए काम करती है. हमारा एक ही नारा है ’मुस्लिम हिंदू साथ चलेगा एकता का राज चलेगा.’ उन्होंने कहा कि हमारे दल मैं हिंदू मुस्लिम सिख, ईसाई सभी जाति धर्म के लोग शामिल है. हम आने वाले चुनावों में सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहे हैं. हमें उम्मीद है कि हमें सफलता भी मिलेगी, क्योंकि हम लोग असम के अंदरूनी हिस्से में जमीनी सतह पर काम कर रहे हैं.

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डिटेंशन कैंप से लोगों को कराएगी मुक्त  
राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के असम प्रदेश अध्यक्ष मौलाना उबैदुर रहमान कासमी ने कहा हम असम में जो बेरोजगारी और बुलडोजर चलाने के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. खासतौर से हम भूमिहीन लोगों को जमीन का पट्टा देने के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि असम में सिर्फ भाजपा अकेली सांप्रदायिक पार्टी नहीं है बल्कि जब कांग्रेस की प्रदेश में सरकार थी तब भी भारत तथा असम में बहुत से सांप्रदायिक घटनाएं घटी थी. इसीलिए हम लोग सभी को सांप्रदायिक ताकत मानते हैं. हम लोग खासतौर से डी वोटर्स और डिटेंशन कैंप के लोगों को मुक्त कराने के लिए प्रदेश में काम करेंगे. 

2009 से चुनाव लड़ रही है राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल 
मौलाना उबेदुर रहमान ने कहा कि हम लोग किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे. हमें किसी की साथ नहीं चाहिए गठबंधन वह करते हैं जिनकी ताकत कम होती है या चुनाव हारने का डर रहता है. हमारी दल अकेले ही 8 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. रहमान ने कहा कि हमने राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के हिंदू लीडर से भी बातचीत की है. गौरतलब है कि राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल एक राजनीतिक दल है जो 2008 में मौलाना अमीर रसदी मदनी ने बनाया था. यह 2009 से लोकसभा और यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ती आ रही है, लेकिन कोई सीट नहीं जीती है. पिछले 2019 से असम में राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल जमीनी तौर पर काम कर रही है. 

:- गुवाहाटी से शरीफ उद्दीन अहमद की रिपोर्ट

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