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'पिंजड़े का तोता' नहीं बनेगा चुनाव आयोग; सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ऐसे में बर्बाद हो जाएगा लोकतंत्र

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सरकार के हस्तक्षेप से दूर रखने और चुनावी प्रक्रियाओं को निष्पक्ष बनाने के मकसद से  मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का फैसला दिया है. 

अलामती तस्वीर
अलामती तस्वीर

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति को कार्यपालिका यानी सरकार के हस्तक्षेप से बचाने के मकसद से गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन पदों पर होने वाली नियुक्तियां प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) की एक समिति की सलाह पर राष्ट्रपति के जरिए की जाएंगी ताकि चुनाव प्रक्रिया की में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे. 

न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की सदारत वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने सर्वसम्मत फैसले में कहा कि चुनावी प्रक्रिया का लगातार हो रहा मिसयूज देश के लोकतंत्र की कब्र खोदने का पुख्ता तरीका है.’’ पीठ ने कहा कि लोकतंत्र में, चुनाव की शुचिता को बरकरार रखा जाना चाहिए, नहीं तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे.’’ 
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली लागू करने के अनुरोध संबंधी याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है. पीठ ने पिछले साल 24 नवंबर को इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 

चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय होता है 
गौरतलब है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय होता है और अनुच्छेद 324(2) के मुताबिक, निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्त होते हैं. उनकी नियुक्तियां संसद द्वारा बनाए गए कानून के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. निर्वाचन आयोग (चुनाव आयुक्त की सेवा और शर्तों) कानून, 1991 के तहत निर्वाचन आयुक्त का छह साल या 65 वर्ष की उम्र तक का कार्यकाल हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर लोकसभा में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं है, तो सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति संबंधी समिति में शामिल किया जाएगा. पीठ ने यह भी कहा, ‘‘यह नियम तब तक कायम रहेगा जब तक संसद इस मुद्दे पर कोई कानून नहीं बना लेती.’’ 

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चहेते अफसरों को सरकार बनाना चाहती है चुनाव आयुक्त 
मामले की सुनवाई के वक्त सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व नौकरशाह अरुण गोयल को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करने में केंद्र सरकार द्वारा दिखाई गई ‘जल्दबाजी’ पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि उनकी फाइल 24 घंटे में विभिन्न विभागों से इतनी जल्दी कैसे पास हो गई ? पंजाब कैडर के आईएएस अफसर गोयल को 19 नवंबर को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया था. अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के बाद, गोयल मौजूदा सीईसी राजीव कुमार के फरवरी 2025 में सेवानिवृत्त होने के बाद अगले मुख्य निर्वाचन आयुक्त होंगे. निर्वाचन आयोग में उनका कुल कार्यकाल पांच साल से ज्यादा का होगा. दो निर्वाचन आयुक्तों में से एक अनूप चंद्र पांडे, जिन्होंने नौ जून, 2021 को पदभार ग्रहण किया था, अगले साल 14 फरवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विपक्षी दलों ने किया स्वागत 

कांग्रेस 
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है, 'प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी संस्था के प्रमुख की नियुक्ति को लेकर भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए." सिंघवी ने कहा, ‘‘सरकार के पुरजोर विरोध के बाद यह फैसला आया है. सरकार को इस फैसले पर अमल करना चाहिए.’’ 

तृणमूल कांग्रेस 
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "यह फैसला लोकतंत्र की जीत है. हम संविधान पीठ के निर्णय का स्वागत करते हैं. दमनकारी ताकतों के कुत्सित प्रयासों पर जनभावना की विजय होगी.’’ तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि ‘बहुत ज्यादा समझौता करने वाला निर्वाचन आयोग’ अब ‘अत्यंत सक्षम’ बन सकता है.’’ 

आम आदमी पार्टी 
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा, "निर्वाचन आयोग प्रधानमंत्री की जनसभाओं, योजनाओं की घोषणाओं को ध्यान में रखकर निर्वाचन तिथियां निर्धारित करता था जिससे इस संस्था पर निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे थे. इस फैसले से लोकतंत्र मजबूत होगा.’’

असदुद्दीन ओवैसी 
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "इससे निर्वाचन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आने और निर्वाचन आयोग के और अधिक स्वतंत्र होने की उम्मीद है.’’ 

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